नोएडा में हुई हर्षित भट्ट की मौत को पुलिस भले ही एक दुर्घटना मान रही हो, लेकिन मृतक के परिवार ने इसे एक सोची-समझी साजिश और हत्या (Homicide Suspect) करार दिया है। गुरुवार सुबह तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम ने इस मामले में कानूनी और भावनात्मक मोड़ ला दिया है।
मां का बयान और चोट के निशान (Mother’s Allegation & Injury Marks)
हर्षित की मां ने पुलिस के सामने दिए अपने बयान में स्पष्ट तौर पर कहा है कि उनका बेटा शराब नहीं पीता था, जो पुलिस की ‘नशे में डूबने’ वाली थ्योरी पर सवाल उठाता है। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि हर्षित के शरीर पर कई जगह चोट के निशान (External Injuries) पाए गए हैं। मां का आरोप है कि पानी में डूबने से पहले उनके बेटे के साथ मारपीट की गई और फिर उसे जानबूझकर गड्ढे में धकेल दिया गया।
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच (Forensic Examination & Medical Panel)
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तीन डॉक्टरों के एक विशेषज्ञ पैनल (Panel of Doctors) से पोस्टमार्टम कराया है। इसकी वीडियोग्राफी भी की गई है ताकि भविष्य में किसी भी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो सके। पुलिस उपायुक्त (DCP Zone 1) साद मियां खान का कहना है कि वे सभी पहलुओं, जिसमें ‘मर्डर’ और ‘एक्सीडेंटल डेथ’ दोनों शामिल हैं, की जांच कर रहे हैं। शाम तक आने वाली विस्तृत रिपोर्ट यह तय करेगी कि यह मामला धारा 302 (हत्या) की ओर जाएगा या नहीं।
दोस्तों की भूमिका पर संदेह (Suspicious Role of Friends)
पुलिस फिलहाल हर्षित के तीनों दोस्तों—हिमांशु, व्यास और कृष से पूछताछ कर रही है। उनके बयानों में विरोधाभास की तलाश की जा रही है। हर्षित के पिता, जो लद्दाख में कार्यरत हैं, उनके दिल्ली पहुंचने के बाद इस मामले में और भी कड़े कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना है। सवाल यह उठता है कि क्या पिकनिक के दौरान कोई विवाद हुआ था? या फिर यह वास्तव में लापरवाही के कारण हुई एक दुखद दुर्घटना थी?



































