वॉशिंगटन में गूँजा भारत-अमेरिका दोस्ती का नारा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के प्रति अपने विशेष लगाव को प्रदर्शित किया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई 40 मिनट की लंबी कॉल के दौरान, ट्रंप ने विदाई के समय “हम सब आपको बहुत प्यार करते हैं” जैसे आत्मीय शब्दों का प्रयोग किया। यह संवाद केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें दो मित्रों के बीच का सम्मान और गर्मजोशी साफ झलक रही थी। ट्रंप ने वॉशिंगटन में पत्रकारों के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी न केवल एक महान नेता हैं, बल्कि उनके एक अत्यंत प्रिय और विश्वसनीय मित्र भी हैं।
संवाद की गहराई और पीएम मोदी की सराहना जब ट्रंप से उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए संवाद की प्रकृति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक उत्कृष्ट चर्चा की। वे भारत का नेतृत्व बहुत ही प्रभावी ढंग से कर रहे हैं।” ट्रंप ने मोदी की कार्यशैली और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत की सराहना करते हुए बताया कि उनके बीच की बातचीत काफी सुखद रही। यह दर्शाता है कि ट्रंप के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच सामरिक और व्यक्तिगत संबंध कितने मजबूत हो चुके हैं।
युद्ध की छाया और द्विपक्षीय संबंधों का महत्व पिछले मंगलवार को हुई इस बातचीत का समय अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़रायल की सैन्य गतिविधियों के बाद की पहली बड़ी वार्ता थी। ट्रंप ने लास वेगास जाते समय मीडिया को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ न केवल आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बात की, बल्कि पश्चिम एशिया के ज्वलंत मुद्दों पर भी विस्तार से मंथन किया। दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि वैश्विक शांति के लिए भारत और अमेरिका का एक मंच पर होना और विचारों का आदान-प्रदान करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा मध्य पूर्व में जारी अशांति के बीच, ट्रंप और मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता के प्रथम चरण के विफल होने के बाद, ट्रंप प्रशासन अब दूसरे दौर के लिए सक्रिय है। राष्ट्रपति ने मोदी को बताया कि वे क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और इसमें वे भारत के सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। वार्ता में पश्चिम एशिया की स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
परमाणु हथियारों की होड़ और वाशिंगटन की चुनौती ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव मुख्य रूप से यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियारों की होड़ के इर्द-गिर्द घूम रहा है। वाशिंगटन का प्रशासन तेहरान पर सख्त प्रतिबंधों के माध्यम से दबाव बना रहा है कि वह अपने परमाणु महत्वाकांक्षाओं को त्याग दे। इस जटिल विषय पर भी ट्रंप ने मोदी से चर्चा की। अमेरिका चाहता है कि विश्व की प्रमुख शक्तियाँ ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने के उसके अभियान का समर्थन करें, ताकि भविष्य में किसी भी परमाणु संघर्ष की संभावना को समाप्त किया जा सके।
ईरान के रुख पर ट्रंप का नया और चौंकाने वाला दावा लेख के अंत में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान आखिरकार यूरेनियम संवर्धन को रोकने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जगत में अभी भी इस खबर को लेकर संशय बना हुआ है, क्योंकि ईरान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच की यह 40 मिनट की बातचीत आने वाले समय में विश्व राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों को किस प्रकार प्रभावित करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।



































