गाजियाबाद में खौफनाक सड़क हादसा गाजियाबाद के विजयनगर इलाके में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है। एक अज्ञात चूक और तेज रफ्तार के कारण तीन लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। घटना उस समय हुई जब आईपीईएम कॉलेज के पास थार कार सवार कुछ युवक नीचे उतरकर एक बाइक सवार के साथ बातचीत में मशगूल थे। वे एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन पर खड़े थे, जो तकनीकी रूप से वाहनों के रुकने के लिए नहीं बनी है। तभी पीछे से काल बनकर आई एक टेंपो ट्रैवलर ने उन तीनों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी जीवनलीला समाप्त हो गई।
मृतकों की शिनाख्त और यात्रियों की सुरक्षा सुबह के सन्नाटे को चीरती हुई इस टक्कर ने मौके पर मौजूद लोगों को दहला दिया। मृतकों में दीपक और प्रवीण नामक दो युवकों की पहचान हो चुकी है, जबकि तीसरे मृतक की पहचान के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। बताया जा रहा है कि टेंपो ट्रैवलर दिल्ली से हरिद्वार की तीर्थयात्रा पर जा रही थी और उसमें सवार 26 महिलाएं इस भयानक हादसे की प्रत्यक्षदर्शी बनीं। गनीमत रही कि बस में सवार किसी महिला यात्री को गंभीर चोट नहीं आई। पुलिस ने बस ड्राइवर वीरेंद्र को पकड़ लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है कि उसने समय रहते ब्रेक क्यों नहीं लगाए।
प्रशासनिक जांच और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया विजयनगर पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शवों को विच्छेदन गृह (पोस्टमॉर्टम हाउस) भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की हर पहलू से तहकीकात कर रहे हैं। जांच का एक मुख्य हिस्सा यह है कि क्या सुबह के समय कोहरे या कम रोशनी की वजह से चालक को खड़े वाहन नहीं दिखे, या फिर वह लापरवाही से बस चला रहा था। इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे पर बिना किसी आपातकालीन कारण के गाड़ी रोकना भी एक बड़ा अपराध माना जाता है, जिसकी वजह से पीछे से आने वाले वाहनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।
अत्यधिक गति और लापरवाही का घातक मेल एक्सप्रेसवे पर वाहन चलाते समय गति सीमा का ध्यान रखना अनिवार्य है, परंतु अक्सर चालक इसका उल्लंघन करते हैं। इस घटना में भी ट्रैवलर की ओवरस्पीडिंग को मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है। चश्मदीदों के मुताबिक टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक और थार के परखच्चे उड़ गए। पुलिस यह भी देख रही है कि सड़क के उस हिस्से पर लाइटिंग की व्यवस्था कैसी थी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों ने स्थानीय लोगों और यात्रियों के मन में भय पैदा कर दिया है, क्योंकि यहाँ थोड़ी सी भी असावधानी सीधे मौत को निमंत्रण देती है।
बीते वर्ष के हादसे का दुखद दोहराव आज का हादसा हमें पिछले साल जुलाई की उस घटना की याद दिलाता है जिसमें दिल्ली के तीन निवासी अपनी जान गंवा बैठे थे। उस समय भी सेक्टर 58 के पास एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल डिवाइडर से टकरा गई थी। मरने वाले युवाओं, जिनमें जीवन ज्योति, सुमित और आदित्य शामिल थे, की उम्र महज 23 से 24 वर्ष के बीच थी। उस समय भी सीसीटीवी फुटेज में बाइक की रफ्तार बहुत अधिक पाई गई थी। उन युवाओं ने भले ही पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी, लेकिन उनकी बेतहाशा गति ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
सावधानी और नियमों के पालन की आवश्यकता इन लगातार हो रही मौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक्सप्रेसवे पर नियम केवल कागजों के लिए नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए होते हैं। पुलिस ने बार-बार अपील की है कि एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन पर कभी भी वाहन न रोकें और हमेशा निर्धारित गति सीमा के भीतर रहें। पिछले साल के कांवड़ वेशधारी युवकों की मौत और आज के थार सवारों की दुखद परिणति—दोनों ही मामलों में मानवीय भूल और गति का जुनून भारी पड़ा। जिला प्रशासन अब एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी की निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी में है।



































