लखनऊ आवास पर सन्नाटा और नजरबंदी की विफल योजना समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और सदन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को उनके लखनऊ स्थित आवास पर ‘हाउस अरेस्ट’ करने की पुलिस की कोशिशें पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। कल देर रात से ही भारी संख्या में पुलिस बल ने उनके निवास को घेर लिया था ताकि उन्हें नोएडा जाने से रोका जा सके। लेकिन सुबह होते-होते यह साफ हो गया कि पांडेय पुलिस की घेराबंदी शुरू होने से पहले ही गंतव्य के लिए रवाना हो चुके थे। अभी उनके घर के बाहर की सुरक्षा हटा ली गई है क्योंकि वहां किसी भी प्रकार की आवाजाही नहीं देखी जा रही है। पुलिस की खुफिया इकाई इस विफलता के बाद अब उनके लोकेशन को ट्रैक करने में जुटी है।
दिल्ली के रास्ते नोएडा कूच करने की रणनीति ताजा अपडेट के मुताबिक, माता प्रसाद पांडेय लखनऊ से निकलकर दिल्ली पहुंच चुके हैं और वहां से रणनीति तैयार कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष आज दिन में दिल्ली से नोएडा की ओर प्रस्थान करेंगे। हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली से लगने वाली तमाम सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर दी है और भारी फोर्स तैनात कर दी गई है। यह पूरी तरह से संभव है कि पुलिस उन्हें नोएडा की सीमा पर ही रोक ले और जिले में प्रवेश की अनुमति न दे। पुलिस का तर्क है कि उनके आने से औद्योगिक क्षेत्र में पहले से व्याप्त तनाव और अधिक भड़क सकता है।
मजदूरों का विरोध प्रदर्शन और सपा का हस्तक्षेप नोएडा के औद्योगिक बेल्ट में मजदूरों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के निर्देशानुसार, पार्टी का एक विशेष 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज शुक्रवार को इन श्रमिकों से मिलने के लिए नोएडा पहुंचने वाला है। इस मिशन का नेतृत्व माता प्रसाद पांडेय स्वयं कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि मजदूरों का दमन किया जा रहा है और विपक्ष का कर्तव्य है कि वह पीड़ित पक्ष की आवाज बने। इसी उद्देश्य के साथ यह प्रतिनिधिमंडल जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेने और पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए कटिबद्ध है।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और सपा की सांगठनिक शक्ति समाजवादी पार्टी ने इस विरोध प्रदर्शन को धार देने के लिए अपने प्रभावी नेताओं की एक सूची तैयार की है। इस दल में माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, सुधीर भाटी और आश्रय गुप्ता जैसे स्थानीय प्रभावशाली नेता मौजूद हैं। साथ ही, पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर और कमाल अख्तर जैसे अनुभवी राजनीतिज्ञों के अलावा जुझारू विधायक अतुल प्रधान और पंकज कुमार मलिक को भी शामिल किया गया है। पूर्व एमएलसी शशांक यादव की उपस्थिति दल की वैचारिक और रणनीतिक गहराई को बढ़ाती है। पार्टी इस दल के माध्यम से सरकार की घेराबंदी करने की पूरी तैयारी में नजर आ रही है।
प्रशासनिक पक्ष और शांति व्यवस्था की दलील नोएडा पुलिस की मुखिया लक्ष्मी सिंह ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन ने निर्दोष मजदूरों के खिलाफ कोई सख्ती नहीं बरती है, बल्कि केवल उन अराजक तत्वों को चिन्हित किया है जो हिंसा और तोड़फोड़ में लिप्त थे। पुलिस के अनुसार, कुछ लोग भीड़ को उकसाकर सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिसके कारण गिरफ्तारियां अनिवार्य हो गई थीं। कमिश्नर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि किसी भी राजनीतिक दल को शहर की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आगामी राजनीतिक संघर्ष और सीमा पर तैनाती जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, नोएडा बॉर्डर पर तनाव बढ़ता जा रहा है। पुलिस को डर है कि माता प्रसाद पांडेय के पहुंचते ही वहां भारी भीड़ जमा हो सकती है, जिससे स्थिति बेकाबू हो सकती है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेता प्रतिपक्ष नोएडा में प्रवेश कर पाते हैं या उन्हें सीमा पर ही गिरफ्तार कर वापस भेज दिया जाता है। इस संघर्ष ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की सक्रियता और प्रशासन की चुनौतियों को उजागर कर दिया है, जिससे आने वाले घंटों में बड़ा सियासी धमाका होने की संभावना है।



































