कानून लागू होते ही मायावती का सख्त रुख गुरुवार से देश भर में महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के विधिवत प्रभावी होने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजनीतिक दलों के पाखंड पर कड़ा प्रहार किया है। अधिसूचना जारी होने के उपरांत उन्होंने एक के बाद एक सात बिंदुओं के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि कांग्रेस, भाजपा और सपा जैसे दल कभी भी दलितों और पिछड़ों के वास्तविक शुभचिंतक नहीं रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने इन दलों के इतिहास को खंगालते हुए यह दावा किया कि आरक्षण के मुद्दे पर ये सभी पार्टियां दोहरा चरित्र अपनाती हैं और जनता को केवल भ्रमित करने का कार्य करती हैं।
आरक्षण कोटे पर कांग्रेस की उदासीनता का विवरण मायावती ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि यह वही पार्टी है जिसने दशकों तक देश पर राज किया, लेकिन कभी भी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ों के आरक्षण कोटे को पूरा करने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज महिला आरक्षण के भीतर वर्गों की बात कर रही है, लेकिन जब वे सत्ता के शीर्ष पर थे, तब उन्हें इन वर्गों की सुध नहीं आई। मायावती ने कांग्रेस को अवसरवादी बताते हुए कहा कि उनके समय में इन वर्गों के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का निरंतर हनन होता रहा और आज वे केवल वोट बैंक की खातिर अपनी भाषा बदल रहे हैं।
पिछड़ों के आरक्षण का असली श्रेय और ऐतिहासिक तथ्य बसपा नेता ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने में बीएसपी की भूमिका निर्णायक थी। उन्होंने तर्क दिया कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लागू करने में कांग्रेस की भूमिका नगण्य थी। वीपी सिंह की सरकार ने जब इस ऐतिहासिक कदम को उठाया, तो उसके पीछे बसपा का भारी दबाव था। मायावती का कहना है कि आज जो दल पिछड़ों के मसीहा बनने का ढोंग कर रहे हैं, उन्हें अपने अतीत के पन्नों को पलटना चाहिए, जहां उन्होंने केवल इन वर्गों के उत्थान के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न करने का कार्य किया था।
समाजवादी पार्टी के विरोधाभासों का खुलासा सपा पर हमलावर होते हुए मायावती ने कहा कि जब यह पार्टी सत्ता से बाहर होती है, तो इसका रवैया कुछ और होता है, लेकिन शासन में आते ही इनकी संकीर्ण मानसिकता सामने आ जाती है। उन्होंने 1994 की पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसे मुलायम सिंह सरकार ने लागू नहीं किया था। मायावती ने गर्व से कहा कि यह उनकी ही सरकार थी जिसने सत्ता संभालते ही पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में फैसले लिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी को ‘छलावे वाली पार्टी’ बताते हुए जनता को आगाह किया कि वे इनके दोहरे चरित्र और स्वार्थी राजनीति से सदैव सावधान रहें।
जनगणना आधारित आरक्षण पर मायावती का तर्क परिशमन और जनगणना की जटिलताओं पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि यदि सरकार का इरादा इसे शीघ्र लागू करने का है, तो पिछली जनगणना के आधार पर आगे बढ़ना व्यावहारिक हो सकता है। उन्होंने विपक्ष के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि कांग्रेस भी भाजपा की तरह ही रणनीति अपनाती यदि वह सत्ता में होती। मायावती का दृष्टिकोण यह है कि प्रक्रिया जो भी हो, पिछड़ों और दलितों का वास्तविक हित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में जो भी संवैधानिक लाभ मिल रहा है, उसे बिना किसी बहकावे में आए स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है।
भविष्य के लिए समाज को सशक्त बनाने का आह्वान लेख के अंत में मायावती ने एक संरक्षक की भूमिका निभाते हुए शोषित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। उन्होंने दुख जताया कि देश के किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के भविष्य को संवारने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई है। उन्होंने आह्वान किया कि इन वर्गों को दूसरों के इशारों पर नाचने के बजाय अपनी ताकत खुद पहचाननी चाहिए। मायावती ने विश्वास दिलाया कि आने वाला समय इन वर्गों के लिए बेहतर होगा, बशर्ते वे जागरूक रहें और किसी भी राजनीतिक झांसे का शिकार न हों। उनका संदेश स्पष्ट है—अपनी मजबूती और आत्मनिर्भरता ही सफलता की कुंजी है।



































