मथुरा जिले में बंदरों के हिंसक होने की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है। इन बंदरों के हमले से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। मथुरा के फरह क्षेत्र में हुई नवीनतम घटना ने एक बार फिर वन्यजीव प्रबंधन और जन सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिंगारी की घटना: पिंगारी गांव के निवासी 48 वर्षीय अमर सिंह उर्फ भोलू शुक्रवार को अपने घर के काम में व्यस्त थे। बारिश में भीगे हुए गेहूं को सुखाने के लिए वे छत पर गए थे, तभी अचानक बंदरों ने उन्हें घेर लिया। बंदरों के हिंसक रवैये से घबराकर अमर सिंह ने वहां से भागने की कोशिश की, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुई।
गंभीर रूप से घायल: बचाव की मुद्रा में भागते समय अमर सिंह अनियंत्रित होकर छत से नीचे गिर गए। इस गिरावट के कारण वे मौके पर ही अचेत हो गए। परिवार के सदस्य उन्हें बेहोशी की हालत में तुरंत आगरा ले गए ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके, क्योंकि उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी।
चिकित्सा के प्रयास: भतीजे केदार सिंह के अनुसार, अमर सिंह की पसलियां टूट गई थीं और सिर में भी गहरी चोट लगी थी। आगरा के तीन निजी अस्पतालों में इलाज के बावजूद जब उनकी सेहत नहीं सुधरी, तो उन्हें सरकारी एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां डॉक्टरों के काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और देर रात उनकी मृत्यु हो गई।
परिवार पर आघात: अमर सिंह की मृत्यु से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। विशेष रूप से 10 मई को होने वाली उनकी बेटी की शादी को लेकर परिवार में जो उत्साह था, वह अब गहरे दुख में तब्दील हो गया है। बेटी की विदाई से पहले पिता के इस तरह चले जाने से हर कोई स्तब्ध और दुखी है।
प्रशासनिक प्रक्रिया: स्थानीय पुलिस ने इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की है। फरह थाना के प्रभारी छोटे लाल ने पुष्टि की कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और उसे अंतिम संस्कार के लिए अमर सिंह के परिवार को दे दिया गया है। क्षेत्र के लोग अब प्रशासन से हिंसक बंदरों की समस्या का स्थाई समाधान मांग रहे हैं।



































