ओडिशा के विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। रायगड़ा के ग्रामीण विकास विभाग में तैनात एक्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रसन्न कुमार पटनायक को घूस लेते गिरफ्तार किया गया है। यह भ्रष्ट अधिकारी महज कुछ ही दिनों बाद तीस जून को अपने पद से रिटायर होने वाला था। रिटायरमेंट की खुशी मनाने से पहले ही वह विजिलेंस की एक गुप्त और सख्त कार्रवाई का शिकार हो गया। उनकी इस गिरफ्तारी ने सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लाखों के बिल अटकाने का आरोप: इस भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ एक स्थानीय ठेकेदार ने अपनी लिखित शिकायत विजिलेंस को दी थी। शिकायतकर्ता ठेकेदार का कहना था कि उसने विभाग के कई सरकारी काम पूरी निष्ठा के साथ खत्म किए थे। इन पूर्ण हो चुके कार्यों के बदले ठेकेदार के लगभग पचास लाख रुपये के कई बिल विभाग में अटके पड़े थे। इन रुके हुए पैसों के अलावा उसे आगे के टेंडर में शामिल होने के लिए कार्य अनुभव प्रमाणपत्र की भी आवश्यकता थी। अपने जायज हकों के लिए जब वह अधिकारी से मिला तो उसे रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया।
घूस की रकम पर बातचीत: एक्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रसन्न कुमार ने ठेकेदार के बिल पास करने के लिए ढाई लाख रुपये की भारी मांग रख दी। पीड़ित ठेकेदार ने शुरुआत में इतनी बड़ी अवैध धनराशि चुकाने में पूरी तरह से अपनी असमर्थता जाहिर कर दी थी। इसके बाद दोनों के बीच इस मुद्दे पर काफी देर तक मोलभाव और गुप्त बातचीत होती रही। अंत में यह पूरा सौदा दो लाख रुपये की नकद रिश्वत देने की शर्त पर जाकर पक्का हो गया। रिश्वत की यह अनुचित मांग सुनकर परेशान ठेकेदार ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की शरण लेने का पक्का मन बना लिया।
विजिलेंस का अचूक जाल: पीड़ित ठेकेदार की पुख्ता शिकायत के आधार पर विजिलेंस विभाग ने तुरंत अपना एक खुफिया जाल बिछाया। टीम ने पूरी योजनाबद्ध तरीके से घूसखोर इंजीनियर को पकड़ने के लिए अपनी विशेष तैयारी पूरी कर ली। जैसे ही आरोपी ने अपने हाथों में दो लाख रुपये की घूस की रकम पकड़ी, वैसे ही टीम ने धावा बोल दिया। विजिलेंस के अधिकारियों ने प्रसन्न कुमार पटनायक को मौके पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही रिश्वत में दिए गए उन दो लाख रुपयों को भी सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया।
छापेमारी में बेनामी संपत्ति का भंडाफोड़: इस अहम गिरफ्तारी के तुरंत बाद जांच एजेंसी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की। भुवनेश्वर के नंदन विहार स्थित बसुंधरा कॉलोनी में आरोपी इंजीनियर का एक बेहद ही आलीशान घर सामने आया है। जांच करने पहुंचे अधिकारी इस बहुमंजिला और आधुनिक सुख-सुविधाओं वाले घर को देखकर पूरी तरह अचंभित रह गए। इस भव्य इमारत की सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात इसकी छत पर बना हुआ एक बड़ा स्विमिंग पूल था। फिलहाल यह पूरी महंगी संपत्ति विजिलेंस की पैनी जांच के दायरे में पूरी तरह से आ चुकी है।
सघन जांच और आगे की कार्रवाई: घर के अलावा विजिलेंस की विशेष टीम ने नयागढ़ स्थित आरोपी के पैतृक आवास का भी बारीकी से कोना-कोना छाना। रायगड़ा स्थित उनके सरकारी दफ्तर और आवास पर भी सघन तलाशी अभियान को अंजाम दिया गया। सरकारी आवास की तलाशी के दौरान अधिकारियों को तीन लाख उनतालीस हजार रुपये की अतिरिक्त नकद राशि बरामद हुई। कोरापुट विजिलेंस थाने में इस आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक मजबूत मामला दर्ज किया गया है। अब इस दागी अधिकारी की तमाम चल-अचल संपत्तियों और आय के अन्य स्रोतों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।





































