यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। विद्रोही हवाई अड्डों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं। राजधानी रियाद पर भी कई बार मिसाइल हमले हुए हैं, जबकि यह यमन में हूती-नियंत्रित क्षेत्र से सैकड़ों मील दूर स्थित है। इस बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ने की खबर है। 41 वर्षीय क्राउन प्रिंस, जिन्हें एमबीएस के नाम से जाना जाता है, मंगलवार के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और कथित तौर पर बंकरों से लैस सुरक्षित महलों में रह रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर लगातार हुए हमलों के बाद हूती विद्रोहियों की आलोचना की है। बढ़ते खतरे ने सऊदी अरब की सुरक्षा क्षमता और नागरिकों को समय पर सतर्क करने की व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मिसाइल का मलबा चिकित्सा केंद्र और बालवाड़ी पर गिरा: हमलों की गंभीरता का अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है कि पिछले गुरुवार को हवा में रोकी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा बालवाड़ी और चिकित्सा केंद्र के परिसर में गिरा था। हालांकि मिसाइल को रोक लिया गया, लेकिन उसके मलबे का नागरिक सुविधाओं के पास गिरना जोखिम की गंभीरता को दर्शाता है। हूती विद्रोहियों के निशाने पर केवल शहरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकाने भी हैं। हवाई अड्डों और तेल शोधन केंद्रों के साथ देश की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना कच्चे तेल के निर्यात के लिए अहम रास्ता है। ऐसे प्रतिष्ठानों पर हमले सऊदी अरब के सामने सुरक्षा की चुनौती को और जटिल बनाते हैं, क्योंकि इनकी रक्षा करना देश की आर्थिक गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मिसाइल अवरोधकों की कमी ने बढ़ाई चिंता: सऊदी अरब अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणालियों को देशभर में अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर रहा है। इसमें सुरक्षित महलों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी शामिल है। लेकिन सऊदी अधिकारियों ने चिंता जताई है कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए जरूरी मिसाइल अवरोधकों की उपलब्धता कम पड़ रही है। देश के पास सभी हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और अन्य संवेदनशील स्थानों को एक साथ सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त पैट्रियट प्रणालियां, मिसाइल अवरोधक और मिसाइल बैटरियां नहीं हैं। इसी वजह से सऊदी अरब ने पाकिस्तान और अन्य सहयोगी देशों से अतिरिक्त सैन्य सहायता मांगी है। साथ ही, वह कूटनीतिक रास्तों पर भी विचार कर रहा है। अमेरिका ने सैन्य सलाहकार भेजे हैं, लेकिन हूती विद्रोहियों की बढ़त रोकने में सीधे सहयोग देने की सऊदी मांग पर अब तक सहमति नहीं जताई है। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने भी जोखिमों को स्वीकार करते हुए चिंता व्यक्त की है।
राष्ट्रीय चेतावनी प्रणाली बंद होने पर उठे सवाल: सऊदी अरब ने मई में एक राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शुरू की थी, जिसके तहत संभावित खतरे की सूचना मोबाइल फोन और सामाजिक माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचाई जाती थी। हालांकि, पिछले सप्ताह हुए हमलों से पहले हूती विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ने के बावजूद इस प्रणाली से सार्वजनिक सुरक्षा चेतावनियां जारी नहीं की गईं। खास बात यह है कि रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई जानलेवा हमलों से कुछ दिन पहले ही चेतावनियां बंद कर दी गई थीं। दो अधिकारियों के अनुसार, एक पश्चिमी देश की सरकार ने सऊदी अधिकारियों से पूछा था कि अलर्ट जारी करना क्यों रोक दिया गया। बताया गया कि अधिकारियों को शिकायतें मिली थीं कि बार-बार आने वाली चेतावनियों से लोगों को परेशानी होती है और कुछ निवासियों की रात में नींद खुल जाती है। लेकिन हमलों के बढ़ते खतरे के बीच चेतावनी व्यवस्था बंद करने के फैसले ने नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल पैदा कर दिए हैं।
माइकल रैटनी ने बताया चेतावनी बंद करने का उलटा असर: सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी ने कहा कि लोगों को खतरे की जानकारी देने के तरीके से वही घबराहट पैदा होने का जोखिम है, जिसे अधिकारी रोकना चाहते हैं। उनके आकलन के अनुसार, सऊदी नेतृत्व एक ओर हूती हमलों का जवाब देना चाहता है, जबकि दूसरी ओर समाज में अस्थिरता नहीं फैलने देना चाहता। मगर समय रहते चेतावनी न मिलने से लोगों में भ्रम और चिंता बढ़ सकती है। सुरक्षा संकट का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। कतर एयरवेज ने रियाद और दम्मम के लिए उड़ानें रोक दी हैं, जबकि सऊदी अरब ने किंग खालिद हवाई अड्डे पर कामकाज बंद रखने की अवधि शनिवार तक बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हमलों को लेकर हूती विद्रोहियों की आलोचना कर चुके हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सुरक्षा संबंधी फैसलों का असर केवल सैन्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों और आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर भी पड़ रहा है।
Israel और भारत की प्रतिक्रिया से बढ़ी कूटनीतिक हलचल: हूती विद्रोहियों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर बातचीत जारी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के विरुद्ध सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए सऊदी अरब की मंजूरी चाहते हैं और अमेरिका दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा है। इसी बीच, सऊदी अरब पर हुए हालिया हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत ने नागरिकों और महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की। भारत ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर बार-बार किए जा रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। ऐसे में सैन्य सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयास भी इस संकट से निपटने के लिए महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।














































