लखनऊ। हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (Cardiovascular Diseases) वर्तमान में विश्वभर में असमय मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। भारतीयों में इसके बढ़ते खतरे के बीच समय पर पहचान, रोकथाम और सजगता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। विश्व हृदय दिवस 2026 के अवसर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ के हृदय रोग विभाग ने वैश्विक अभियान “Don’t Miss a Beat” के साथ जुड़कर एक भव्य वॉकथॉन एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस वॉकथॉन में 100 से अधिक चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश था—हृदय रोग हमेशा किसी बड़े या अचानक दिखने वाले लक्षण के साथ नहीं आता, इसलिए शरीर के सूक्ष्म संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।
दिल की सेहत सामाजिक ज़िम्मेदारी भी: पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन
कार्यक्रम के दौरान एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने कार्डियोलॉजी विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दिल की सेहत केवल एक चिकित्सीय विषय नहीं, बल्कि समाज की भी साझा ज़िम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि एक स्वस्थ हृदय की शुरुआत दैनिक जीवनशैली की अच्छी आदतों से होती है—जैसे नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, तनाव का सही प्रबंधन और तंबाकू से पूर्ण परहेज। उन्होंने संस्थान की ओर से हृदय रोगों की रोकथाम और समय पर उपचार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई।
शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी: प्रो. आदित्य कपूर
हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर ने कहा कि ‘Don’t Miss a Beat’ मात्र एक नारा नहीं, बल्कि शरीर की चेतावनियों को गंभीरता से सुनने का संदेश है। असामान्य थकान, सांस फूलना, सीने में असहजता, दिल की धड़कन का अनियमित होना, चक्कर आना या स्टैमिना घटना जैसे लक्षणों को लोग अक्सर उम्र, कमजोरी या तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने आगाह किया कि हृदय की देखभाल दिल के दौरे से बहुत पहले शुरू होनी चाहिए, जिसके लिए रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल का समय पर नियंत्रण आवश्यक है।
महिलाओं, बच्चों और युवाओं के दिल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
- महिलाओं में अलग हो सकते हैं लक्षण: प्रो. रूपाली खन्ना ने रेखांकित किया कि महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण पुरुषों की तुलना में अलग तरह से सामने आ सकते हैं, जिस कारण वे अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता और प्राथमिकता से लिया जाना आवश्यक है।
- कम उम्र में भी बढ़ता जोखिम: प्रो. अंकित साहू ने चेताया कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रहा। गतिहीन जीवनशैली, मोटापा, जंक फूड और तंबाकू के सेवन के कारण युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली की नींव बचपन से ही रखी जानी चाहिए।
- समय पर जांच ही बचाव: कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट प्रो. सत्येंद्र तिवारी एवं प्रो. नवीन गर्ग ने कहा कि दैनिक शारीरिक गतिविधि और समय पर डॉक्टरी सलाह ही सामान्य स्थिति और आपातकाल के बीच सबसे बड़ा फर्क तय करती है।
‘Keep the Beat’: रोजाना 20 मिनट शारीरिक गतिविधि का संकल्प
विश्व हृदय महासंघ (WHF) की 2026 की “Keep the Beat” पहल के तहत विशेषज्ञों ने अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट तेज चलने (वॉक) या किसी भी शारीरिक व्यायाम के लिए अवश्य निकाले










































