15-09-2026, मंगलवार: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की उदया तिथि चतुर्थी है। चतुर्थी तिथि मंगलवार सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। पंचमी तिथि के साथ आज ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। 15 सितंबर को विनायक गणेश चतुर्थी व्रत भी है। आज दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक इंद्र योग रहेगा, जबकि स्वाती नक्षत्र दोपहर बाद 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र का आरंभ होगा।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार आज चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य सिंह राशि में रहेंगे। धार्मिक दृष्टि से ऋषि पंचमी और विनायक गणेश चतुर्थी व्रत के कारण आज का दिन विशेष महत्व रखता है।
15 सितंबर 2026 का पंचांग
- वार: मंगलवार
- विक्रम संवत: 2083
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: चतुर्थी सुबह 7:45 बजे तक, इसके बाद पंचमी
- नक्षत्र: स्वाती दोपहर 3:21 बजे तक, फिर विशाखा
- योग: इंद्र/ऐन्द्र दोपहर 12:20 बजे तक, इसके बाद वैधृति योग
- करण: विष्टि (भद्रा) सुबह 7:45 बजे तक, इसके बाद बव करण
- चंद्र राशि: तुला
- सूर्य राशि: सिंह
- विशेष: ऋषि पंचमी, विनायक गणेश चतुर्थी व्रत
उपलब्ध दोनों पंचांग विवरणों में चतुर्थी समाप्त होने का समय 7:44 और 7:45 बजे तथा इंद्र/ऐन्द्र योग की समाप्ति 12:18 और 12:20 बजे है। यह अंतर पंचांग गणना में स्थानीय समय अथवा गणना पद्धति के कारण दी गई है।
15 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
आज पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए कई महत्वपूर्ण समय बताए गए हैं। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी और दोपहर में अभिजित तथा विजय मुहूर्त भी रहेगा।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:39 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:16 बजे से 6:26 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:36 बजे से 3:25 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:41 बजे से 7:05 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 6:41 बजे से 7:52 बजे तक
- रवि योग: सुबह 6:26 बजे से दोपहर 3:21 बजे तक
15 सितंबर 2026 का अशुभ मुहूर्त
आज कुछ ऐसे समय भी रहेंगे जिन्हें धार्मिक पंचांग में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। किसी महत्वपूर्ण शुभ कार्य की शुरुआत करते समय इन अवधियों का ध्यान रखना उचित रहेगा।
- राहुकाल: दोपहर 3:21 बजे से शाम 4:54 बजे तक
- यमगंड काल: सुबह 9:11 बजे से 10:44 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 12:16 बजे से 1:49 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 9:58 बजे से 10:49 बजे तक
इनमें राहुकाल के साथ यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त को भी अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
15 सितंबर 2026 को सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय
आज सूर्य और चंद्रमा से संबंधित समय इस प्रकार हैं:
- सूर्योदय: सुबह 6:05 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:26 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 10:07 बजे
- चंद्रास्त: अगले दिन सुबह 8:40 बजे
दिए गए स्रोतों में सूर्यास्त का समय एक जगह 6:26 बजे और दूसरी जगह 6:27 बजे बताया गया है। स्थानीय गणना के अनुसार इसमें एक मिनट का अंतर संभव है।
15 सितंबर 2026 को अलग-अलग राज्यों में राहुकाल
राहुकाल का समय प्रत्येक स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर बदल सकता है। इसलिए अलग-अलग राज्यों की राजधानियों में इसके समय में अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार 15 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राहुकाल दोपहर 3:08 बजे से शाम 4:41 बजे तक रहेगा।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ | दोपहर 3:08 से शाम 4:41 बजे तक |
| जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | दोपहर 3:25 से शाम 4:59 बजे तक |
| आंध्र प्रदेश | अमरावती | दोपहर 3:07 से शाम 4:38 बजे तक |
| अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | दोपहर 2:07 से 3:38 बजे तक |
| असम | दिसपुर | दोपहर 2:14 से 3:45 बजे तक |
| बिहार | पटना | दोपहर 2:49 से शाम 4:21 बजे तक |
| छत्तीसगढ़ | रायपुर | दोपहर 3:01 से शाम 4:33 बजे तक |
| गोवा | पणजी | दोपहर 3:27 से शाम 4:58 बजे तक |
| गुजरात | गांधीनगर | दोपहर 3:42 से शाम 5:14 बजे तक |
| हरियाणा | चंडीगढ़ | दोपहर 3:24 से शाम 4:57 बजे तक |
| हिमाचल प्रदेश | शिमला | दोपहर 3:22 से शाम 4:55 बजे तक |
| झारखंड | रांची | दोपहर 2:51 से शाम 4:23 बजे तक |
| कर्नाटक | बेंगलुरु | दोपहर 3:14 से शाम 4:45 बजे तक |
| केरल | तिरुवनंतपुरम | दोपहर 3:16 से शाम 4:46 बजे तक |
| मध्य प्रदेश | भोपाल | दोपहर 3:19 से शाम 4:51 बजे तक |
| महाराष्ट्र | मुंबई | दोपहर 3:36 से शाम 5:08 बजे तक |
| मणिपुर | इम्फाल | दोपहर 2:05 से 3:36 बजे तक |
| मेघालय | शिलांग | दोपहर 2:15 से 3:46 बजे तक |
| मिजोरम | आइजोल | दोपहर 2:07 से 3:38 बजे तक |
| नागालैंड | कोहिमा | दोपहर 2:04 से 3:35 बजे तक |
| ओडिशा | भुवनेश्वर | दोपहर 2:46 से शाम 4:17 बजे तक |
| पंजाब | चंडीगढ़ | दोपहर 3:24 से शाम 4:57 बजे तक |
| राजस्थान | जयपुर | दोपहर 3:31 से शाम 5:03 बजे तक |
| सिक्किम | गंगटोक | दोपहर 2:35 से शाम 4:07 बजे तक |
| तमिलनाडु | चेन्नई | दोपहर 3:03 से शाम 4:34 बजे तक |
| तेलंगाना | हैदराबाद | दोपहर 3:10 से शाम 4:41 बजे तक |
| त्रिपुरा | अगरतला | दोपहर 2:12 से 3:43 बजे तक |
| उत्तराखंड | देहरादून | दोपहर 3:19 से शाम 4:52 बजे तक |
| पश्चिम बंगाल | कोलकाता | दोपहर 2:38 से शाम 4:09 बजे तक |
नोट: स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त में अंतर के कारण राहुकाल का समय शहर-दर-शहर थोड़ा अलग हो सकता है। ऊपर दिए गए समय उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार हैं।
ऋषि पंचमी 2026 का महत्व
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। 15 सितंबर को चतुर्थी तिथि सुबह समाप्त होने के बाद पंचमी शुरू होगी, इसलिए आज ऋषि पंचमी का पर्व रहेगा। ओडिशा में इस दिन को गुरु पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।
ऋषि पंचमी के दिन दोपहर के समय सप्तऋषियों की पूजा करने की परंपरा बताई गई है। इस अवसर पर मरीचि, वशिष्ठ, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु का स्मरण एवं पूजन किया जाता है।
शास्त्रों में ऋषि पंचमी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धालुओं को सप्तऋषियों की पूजा कर उनसे क्षमा याचना करनी चाहिए। पूजा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आत्मशुद्धि का भाव रखने को महत्वपूर्ण माना जाता है।
15 सितंबर 2026 को विनायक गणेश चतुर्थी व्रत
आज विनायक गणेश चतुर्थी व्रत भी है। चतुर्थी तिथि सुबह 7:45 बजे तक रहेगी और इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। भक्त भगवान गणेश से बुद्धि, सुख-समृद्धि और जीवन के विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
इस तरह 15 सितंबर का दिन धार्मिक रूप से विशेष बन जाता है। एक ओर चतुर्थी तिथि और विनायक गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व है, वहीं इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होने पर ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
15 सितंबर 2026 पंचांग का सार
15 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी सुबह 7:45 बजे तक रहेगी और उसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। आज ऋषि पंचमी तथा विनायक गणेश चतुर्थी व्रत के कारण धार्मिक दृष्टि से दिन खास है। स्वाती नक्षत्र दोपहर 3:21 बजे तक रहेगा, जिसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। इसी तरह इंद्र/ऐन्द्र योग दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा और उसके बाद वैधृति योग प्रभावी होगा।
दिन में ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, विजय मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त जैसे शुभ समय रहेंगे। वहीं राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त को आज के अशुभ मुहूर्त के रूप में ध्यान में रखा जा सकता है।
ऋषि पंचमी के अवसर पर दोपहर में सप्तऋषियों की पूजा और क्षमा प्रार्थना का विधान बताया गया है। वहीं गणेश चतुर्थी व्रत के कारण भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में मामूली अंतर संभव है, इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर का पंचांग देखना उचित रहेगा।














































