दिल्ली के महरौली इलाके में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को रोकने के आदेश उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जारी कर दिेये हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) बीते शुक्रवार से यहां अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहा है।
लेकिन अब एलजी ने इसे रोकने का आदेश जारी कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि एलजी कार्यालय की तरफ से आदेश जारी हुआ है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने डीडीए को निर्देश दिया है कि महरौली और लडा सराय में चल रहे डेमोलिशन ड्राइव को रोक दें।
उपराज्यपाल के इस आदेश के बाद इलाके के उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो लगातार इस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। राज निवास की तरफ से कहा गया है कि इन गांवों के लोगों का एक प्रतिनिधिनंडल उपराज्यपाल से मिला था। इस प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से राहत देने की गुहार लगाई थी। जिसके बाद उपराज्यपाल ने डीडीए के उपाध्यक्ष और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया कि वो तुरंत बुलडोजर की कार्रवाई को रोक दें। इसके साथ ही एलजी ने इन लोगों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा सीमांकन को लेकर जो बात कही गई है उनपर भी वो गौर करेंगे।
महरौली इलाके के आर्किलॉजिकल पार्क एरिया में डीडीए का बुलडोजर पिछले कुछ दिनों से लगातार गरज रहा था। यहां बने अवैध निर्माण को बुलडोजर से गिराने का काम चल रहा था। कई स्थानीय लोग डीडीए की कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे थे। महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी भी मैदान में आ गई थी और डीडीए के बुलडोजर पर रोक लगाने की मांग कर रही थी।
आम आदमी पार्टी के विधायक सोमनाथ भारती ने एक दिन पहले ही दिल्ली के उपराज्यपाल को खत लिखकर डीडीए की कार्रवाई को रोकने की मांग की थी। दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत ने पहले ही फिर से सीमांकन कराए जाने की बात कह कर बुलडोजर को रोकने का आदेश भी दिया था।
डीडीए के अध्यक्ष उपराज्यपाल वीके सक्सेना हैं। इस कार्रवाई को लेकर बताया गया था कि साउथ दिल्ली में जी 20 में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मीटिंग हो सकती है। इसी को देखते हुए दिल्ली को व्यवस्थित नजर आने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस कार्रवाई के विरोध में कई लोगों का कहना था कि वो पिछले 30-40 सालों से यहां रह रहे हैं और प्रॉपर्टी टैक्स भी दे रहे हैं। बावजूद इसके उनके मकानों को तोड़ा जा रहा है। डीडीए की इस कार्रवाई को लेकर कुछ लोगों का यह भी दावा था कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं दी गई थी।
न्यायालय की चौखट पर पहुंचा मामला
इधर इस मामले को लेकर कुछ लोगों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का भी रूख किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक नई ‘सीमांकन रिपोर्ट’ तैयार किये जाने तक शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित महरौली पुरातत्व पार्क में मकानों और दुकानों को ढहाये जाने पर रोक लगाने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने फिलहाल तोड़फोड़ कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए महरौली माइनॉरीटीज रेजीडेंट एंड शॉप ओनर्स वेलफेयर की याचिका पर नोटिस जारी किया था। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिया कि विषय को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष रखा जाए, जहां इसी तरह का एक विषय पहले से लंबित है।
20 बहुमंजिला भवनों की हुई थी पहचान
डीडीए के अधिकारियों ने अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत महरौली पुरातत्व पार्क में करीब 20 बहुमंजिला भवन, बड़ी संख्या में दुकानों और मकान तथा एक निजी स्कूल भवन की पहचान ऐसे ढांचे के रूप में की है जो पिछले कुछ दशकों में अवैध रूप से निर्मित किये गये हैं।
अधिकारियों ने इन ढांचों को ढहाये जाने पर रोक लगाने के लिए कुछ पक्षकारों द्वारा अदालत का रुख किये जाने के बाद कहा था कि केवल उन ढांचों को हटाया जाएगा जो किसी वाद का हिस्सा नहीं हैं। डीडीए के मुताबिक, इस पुराने पार्क में करीब 55 स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण , राज्य पुरातत्व विभाग और शहरी निकाय के संरक्षण के तहत हैं।



































