सनातन धर्म में देवी देवताओं की पूजा आराधना को सर्वोत्तम माना गया है। शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा को समर्पित कालाष्टमी का व्रत पूजन बेहद महत्वपूर्ण होता है इस दिन हर कोई अपने कष्टों से मुक्ति के लिए भगवान की विधिवत पूजा करता है और व्रत आदि भी रखता है।
पंचांग के अनुसार हर मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत पूजन किया जाता है, जो कि इस बार 14 मार्च को पड़ रही है, तो आज हम आपको भैरव बाबा की पूजा विधि बता रहे है जो आपके तमाम कष्टों को दूर कर देगी, तो आइए जानते है।

तारीख और मुहूर्त-
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि इस बार 14 मार्च की रात्रि 8 बजकर 22 मिनट पर आरंभ हो रही है और इसका समापन 15 मार्च को शाम 6 बजकर 45 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में इस बार कालाष्टमी व्रत और पूजन 14 मार्च को करना उत्तम होगा। कालाष्टमी के दिन तामसिक पूजा के लिए पूरी रात्रि शुभ है।

कालाष्टमी पर करें ये उपाय-
अगर आप परेशानियों से घिर चुके है और इससे बाहर निकलने का कोई मार्ग नजर नहीं आ रहा है तो ऐसे में कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी जरूर खिलाएं। मान्यता है कि इस उपाय को करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। कालाष्टमी पर रात्रि के समय भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। अगर हो सके तो मंदिर जाकर शिव के सक्षम इस उपाय को करे। इसके बाद कालभैरवाष्टक का पाठ करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से सभी प्रकार की बाधा दूर हो जाती है।




































