अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की चेतावनियों और अपीलों को दरकिनार करते हुए, इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के Isfahan Nuclear Plant पर पांचवीं बार हमला किया है। यह हमला न केवल सैन्य दृष्टिकोण से गंभीर है, बल्कि इसके पर्यावरणीय परिणाम पूरे मध्य-पूर्व के लिए घातक हो सकते हैं।
C-130 विमान का विनाश (Destruction of C-130): ईरान की समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, दक्षिणी इस्फहान में पुलिस विशेष बलों (Faraza) की भारी गोलीबारी में अमेरिका का एक C-130 Support Aircraft नष्ट हो गया है। इससे ठीक पहले इसी क्षेत्र में एक MQ-9 Drone को भी ढेर किया गया था। ईरान का कहना है कि उनकी रक्षा प्रणाली परमाणु केंद्रों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
रेडियोएक्टिव विकिरण की चेतावनी (Radioactive Radiation Threat): ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि परमाणु केंद्रों पर बार-बार हो रहे इन हमलों से क्षेत्र में Radioactive Leaks हो सकते हैं।
“अगर इस्फहान से विकिरण फैलता है, तो यह केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर जैसे पड़ोसी देशों में भी जनजीवन समाप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।”
निष्कर्ष: इजरायल और अमेरिका की रणनीति ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाने की है, लेकिन ईरान का कड़ा प्रतिरोध इस युद्ध को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है जहाँ पूरा Middle East बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह एक वैश्विक ऊर्जा संकट और मानवीय त्रासदी को जन्म दे सकता है।





































