संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वर्तमान स्थिति को कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे बड़ी Supply Chain Obstacle करार दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने मानवीय सहायता अभियानों को उनकी सीमा से परे धकेल दिया है।
अधर में फंसी जीवनरक्षक खेप (Stuck Shipments): इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी (IRC) और अन्य वैश्विक एजेंसियों ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं:
- Sudan Crisis: युद्धग्रस्त सूडान के लिए भेजी जा रही 1,30,000 डॉलर की दवाइयां दुबई के बंदरगाहों पर फंसी हुई हैं।
- India Connection: सोमालिया के कुपोषित बच्चों के लिए भेजे जाने वाले ‘थेरेप्यूटिक फूड’ के 670 बॉक्स भारत में ही अटके पड़े हैं क्योंकि शिपिंग मार्ग असुरक्षित हैं।
- UNFPA Action: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने 16 देशों में भेजे जाने वाले चिकित्सा उपकरणों को फिलहाल टाल दिया है।
विस्थापन और भविष्य का खतरा: युद्ध केवल ईरान तक सीमित नहीं है; लेबनान में भी 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित (Displaced) हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आज युद्ध रुक भी जाए, तो भी सप्लाई चेन को सामान्य होने में कई महीने लगेंगे। Foreign Aid में अमेरिका द्वारा पहले की गई कटौती और अब इस युद्ध ने सहायता संगठनों की कमर तोड़ दी है। मदीहा रजा (IRC) के अनुसार, यह स्थिति मानवीय सहायता के इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक है।
निष्कर्ष: यह संघर्ष अब केवल सीमाओं की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि एक वैश्विक Life-Threatening संकट बन चुका है। परिवहन के वैकल्पिक रास्ते महंगे और समय लेने वाले हैं, जिसका सीधा असर उन बच्चों और मरीजों पर पड़ रहा है जिनकी जान दवाओं और भोजन पर टिकी है।





































