रफ्तार का नया युग और यात्रा समय में कमी: राजधानी दिल्ली और देहरादून के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए आज एक सुखद सवेरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया है, जिससे अब 6 घंटे का उबाऊ सफर महज 150 मिनट (ढाई घंटे) में सिमट गया है। उद्घाटन के गौरवमयी क्षणों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी प्रधानमंत्री के साथ मंच की शोभा बढ़ा रहे थे। इस परियोजना के चालू होने से न केवल आम मुसाफिरों को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तर भारत के परिवहन तंत्र में भी एक क्रांतिकारी सुधार आएगा। यह एक्सप्रेस-वे अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं और तीव्र गति के लिए जाना जाएगा।
सामाजिक समरसता और लाइफलाइन का संगम: मुख्यमंत्री धामी ने इस मौके पर जनता को संबोधित करते हुए आज के दिन को दोहरे उत्सव का दिन बताया। एक ओर जहाँ उत्तराखंड को विकास की नई ‘लाइफलाइन’ मिली है, वहीं दूसरी ओर आज पूरा देश महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती मना रहा है। मुख्यमंत्री ने बाबासाहेब को अपनी भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके दिखाए गए समतामूलक समाज के स्वप्न को आज की विकास योजनाएं मूर्त रूप दे रही हैं। उन्होंने इस कॉरिडोर को केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक ‘आर्थिक गलियारा’ कहा, जो समाज के हर वर्ग को उन्नति के समान अवसर प्रदान करेगा और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएगा।
विकसित भारत का संकल्प और नेतृत्व की सराहना: अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश की विकास की गाड़ी पटरी से उतर चुकी थी और चारों ओर निराशा का वातावरण था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसे पथ-प्रदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्होंने राष्ट्र की बागडोर संभालकर महिलाओं, युवाओं और सेना के मनोबल को पुनः जाग्रत किया। सीएम धामी ने इसे अपना सौभाग्य बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री के बार-बार होने वाले आगमन का साक्षी बनने का मौका मिला है। उन्होंने रेखांकित किया कि देवभूमि के प्रति मोदी जी का विशेष लगाव ही है कि आज उत्तराखंड विकास के मानचित्र पर इतनी तेजी से उभर रहा है।
प्रधानमंत्री के विजन से बदलती उत्तराखंड की तस्वीर: उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री के योगदान को गिनाते हुए धामी जी ने कहा कि ‘माणा’ जैसे दूरस्थ गांव को देश का पहला गांव घोषित करना उनकी सूक्ष्म सोच का परिणाम है। केदारनाथ धाम के पुनरुद्धार और उत्तराखंड को खेलों की नई पहचान दिलाने जैसे कार्यों ने राज्य के गौरव को वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर समिट के माध्यम से जो निवेश की राह खुली है, वह एक्सप्रेस-वे जैसी अवसंरचनाओं के कारण ही संभव हो पाई है। प्रधानमंत्री का हर आगमन उत्तराखंड के लिए केवल शुभ ही नहीं, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं का अंबार लेकर आता है, जिससे राज्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और एलिवेटेड वाइल्डलाइफ वे: Expressway की सबसे बड़ी खूबी इसका पर्यावरण-अनुकूल होना है। राजाजी नेशनल पार्क के वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यहाँ एशिया का सबसे विशाल एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है। लगभग 12 किलोमीटर के इस ऊंचे हाईवे के नीचे से जंगली जीव, विशेषकर हाथी, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपनी प्राकृतिक चर्या जारी रख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मार्ग विकास और प्रकृति के सह-अस्तित्व का अद्भुत नमूना है। 12 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक भारत वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति भी उतना ही गंभीर है जितना विकास के प्रति।
पर्यटन को पंख और ईंधन की प्रभावी बचत: भौगोलिक दृष्टि से यह नया रास्ता दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए देहरादून पहुँचता है। दूरी में 23 किलोमीटर की कमी आने से समय के साथ-साथ करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होने का अनुमान है। उत्तराखंड जैसे पर्यटन प्रधान राज्य के लिए यह एक्सप्रेस-वे एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। अब वीकेंड पर दिल्ली-एनसीआर से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय होटलों, होमस्टे और छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होगी। यह कॉरिडोर न केवल शहरों को जोड़ रहा है, बल्कि उत्तराखंड के सपनों को रफ्तार देकर एक स्वर्णिम भविष्य की नींव भी रख रहा है।





































