Badrinath मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में BKTC ने एक बहुत ही सख्त कदम उठाया है। समिति ने इस गंभीर मामले में अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में समिति में तैनात निजी सहायक Pramod Nautiyal के खिलाफ एक बहुत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। BKTC ने कड़ा रुख अपनाते हुए Pramod Nautiyal को तत्काल प्रभाव से उनके पद से निलंबित कर दिया है। इस निलंबन के बाद मंदिर समिति के अन्य सभी कर्मचारियों में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
कारण बताओ नोटिस जारी: निलंबित किए गए कर्मचारी Pramod Nautiyal पर मंदिर समिति की तरफ से कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। निलंबन से पहले उन्हें समिति के उच्चाधिकारियों द्वारा 3 जुलाई को एक आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में उन पर अपने दैनिक कर्तव्यों के निर्वहन में बहुत ही गंभीर अनियिमितता बरतने का आरोप लगा है। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने और मामले की गंभीरता को देखते हुए अंततः उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि समिति किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
सोशल मीडिया से उठा विवाद: Badrinath धाम जैसे पवित्र तीर्थ स्थल के चढ़ावे में गड़बड़ी का यह मामला काफी तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। बीते दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दान की गिनती में हेराफेरी की खबरें बहुत तेजी से फैली थीं। इन खबरों के वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय संगठनों में भारी रोष और आक्रोश देखने को मिला था। इसी आक्रोश के परिणामस्वरूप भैरव सेना जैसे संगठनों को आगे आकर इसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करानी पड़ी। जनता के बढ़ते दबाव के कारण ही प्रशासन को इस दिशा में त्वरित और सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
विशेष जांच समिति का गठन: सोशल मीडिया पर उपजे भारी विवाद और भैरव सेना की शिकायत के बाद राज्य सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई। इस संवेदनशील मामले पर बढ़ते विवाद को देखते हुए बीते हफ्ते सरकार ने एक उच्च स्तरीय फैसला लिया। सरकार ने दान चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यों की एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। इस SIT टीम में अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि सच जल्द से जल्द सामने आ सके। टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है और लगातार मंदिर से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों को खंगाल रही है।
पंद्रह दिन में रिपोर्ट तलब: सरकार ने इस मामले की जांच को किसी भी तरह से लंबा न खींचने का बहुत सख्त निर्देश दिया है। नवगठित SIT की टीम को अपनी पूरी जांच एक निर्धारित और बहुत ही सीमित समय सीमा के भीतर खत्म करनी होगी। आधिकारिक आदेश के अनुसार जांच दल को केवल 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समय सीमा के कारण जांच अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई की गति को पहले से बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। पूरी उम्मीद की जा रही है कि इस निर्धारित समय में दोषियों की पहचान कर ली जाएगी और सच सामने आ जाएगा।
दस्तावेजों की गहन पड़ताल: SIT की टीम मंदिर से जुड़े हर एक छोटे-बड़े सबूत को बारीकी से इकट्ठा करने में जुटी हुई है। टीम ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी की फुटेज को कब्जे में लेकर उसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा मंदिर के आय-व्यय और चढ़ावे से जुड़े अन्य सभी जरूरी दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। BKTC के सदस्यों के बयानों का मिलान इन सभी अहम दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के साथ किया जाएगा। यदि दस्तावेजों और बयानों में कोई भी विसंगति पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय है।


























































