लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के करोड़ों यूजर्स को बहुत जल्द ही एक नया और बेहद शानदार फीचर मिलने की संभावना है। यह नया फीचर यूजर्स को उनके फोन में सेव किए गए सभी कॉन्टैक्ट्स के जन्मदिन सही समय पर रिमाइंड कराने का काम करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस दिलचस्प फीचर को फिलहाल बर्थ्डेज नाम से टेस्ट कर रही है ताकि यूजर का अनुभव बेहतर हो सके। Facebook और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तर्ज पर इसमें भी जन्मदिन के लिए एक बिल्कुल अलग और डेडिकेटेड सेक्शन दिया जाएगा। इस विशेष सेक्शन में यूजर्स अपने सभी दोस्तों और रिश्तेदारों के अपकमिंग बर्थडे की पूरी लिस्ट आसानी से देख पाएंगे।
डेवलपमेंट फेज में है यह नया अपडेट: WABetaInfo ने हाल ही में इस अपकमिंग फीचर को ऐप के बीटा वर्जन में स्पॉट करके इसकी जानकारी सार्वजनिक की है। रिपोर्ट के अनुसार यह नया फीचर अभी पूरी तरह से डेवलपमेंट फेज में है और इसे Android Beta वर्जन 2.26.27.3 में देखा गया है। अभी कंपनी ने इसकी आधिकारिक बीटा टेस्टिंग भी शुरू नहीं की है, इसलिए कोई भी टेस्टर इसका एक्सेस प्राप्त नहीं कर सका है। इस फीचर के पूरी तरह से रोलआउट होने के बाद ही इसकी कार्यप्रणाली के बारे में ज्यादा सटीक जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसमें स्टेटस अपडेट की तरह ही एक सूची नजर आएगी जो यूजर्स को जन्मदिन भूलने की परेशानी से हमेशा के लिए बचा लेगी।
डेटा और प्राइवेसी पर मंडराता खतरा: इस नए फीचर के आने से India समेत कई बड़े देशों में यूजरनेम फीचर की तरह ही एक नया रेगुलेटरी पेंच भी फंस सकता है। दरअसल, संपर्कों का डेट ऑफ बर्थ दिखाने के लिए ऐप को रेगुलेटरी डेटा का सीधे तौर पर इस्तेमाल करना ही पड़ेगा। US जैसे कुछ चुनिंदा देशों में यह प्लेटफॉर्म यूजर के डेट ऑफ बर्थ को एज वेरिफिकेशन के लिए पहले से कलेक्ट करता है। कलेक्ट किए गए इस निजी डेटा का किसी अन्य फीचर में इस्तेमाल करना कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी कर सकता है। हालांकि कंपनी बार-बार यह दावा करती है कि उसका पूरा प्लेटफॉर्म एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड है और दो लोगों की बातचीत पूरी तरह प्राइवेट होती है।
सोशल मीडिया पर उम्र की सख्त जांच: सोशल मीडिया पर उम्र के वेरिफिकेशन का यह मुद्दा इन दिनों पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ी बहस का विषय बन चुका है। इसी कड़ी में Australia दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन कर दिया है। सरकार ने Facebook, Instagram, TikTok और Snapchat को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे कम उम्र के यूजर्स की कड़ाई से जांच करें। यह नियम पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में बच्चों के अकाउंट्स पर तत्काल रोक लगा दी गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की वजह से बच्चों के कोमल मन पर बहुत ही गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने की नियमों की तारीफ: Melbourne में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के प्रधानमंत्री PM Modi ने इस नए सोशल मीडिया कानून की जमकर तारीफ की है। उन्होंने Australia के प्रधानमंत्री Anthony Albanese की मौजूदगी में कहा कि समाज की सुरक्षा के लिए उठाए गए ये कदम बहुत प्रेरणादायक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन खतरों से बचाने की इन कोशिशों से India और दुनिया के बाकी देश बहुत कुछ सीख रहे हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि देश में भी जल्द ही आईटी कानूनों में बड़े बदलाव हो सकते हैं। उम्र सत्यापन के यही नियम भविष्य में मैसेंजिंग ऐप्स के नए फीचर्स के लिए भी कड़े दिशानिर्देश तय करने का काम करेंगे।
राज्यों में भी सोशल मीडिया बैन की तैयारी: केंद्र सरकार के साथ-साथ India की कई राज्य सरकारें भी अब बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। Andhra Pradesh, Bihar और Karnataka समेत कई राज्य सरकारों ने हाल ही में सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की घोषणा की है। इन राज्यों का स्पष्ट मानना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के नुकसान से बचाने के लिए ऐसे सख्त कानून बनाना अब अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा दुनिया के अन्य देश जैसे UK ने भी हाल ही में बच्चों के लिए सोशल मीडिया और गेमिंग लाइव-स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने का ऐलान किया है। यह वैश्विक मुहीम दर्शाती है कि भविष्य में सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की सुरक्षा के लिए अपने नियम पूरी तरह बदलने होंगे।
























































