राज्य के आबकारी विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत इस पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त पुलिस की एफआईआर को आधार बनाते हुए इस व्यापक छापेमारी अभियान को अंजाम दिया गया है। आबकारी विभाग के भीतर चल रहे इस बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए यह कदम उठाया गया। इस कार्रवाई से भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और उनके सहयोगियों के बीच भारी हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों के ठिकानों पर रेड: जांच टीम ने भ्रष्टाचार में लिप्त आबकारी विभाग के कई बड़े अधिकारियों के ठिकानों पर सीधी कार्रवाई की है। इस मामले में मुख्य रूप से अधिकारी JAGDISH NAYAK और K.M. THAMMANNA के परिसरों की तलाशी ली गई। इसके साथ ही एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी Y.D. MANJUNATH के ठिकानों पर भी जांच दल ने सघन छापेमारी की है। इन सभी अधिकारियों के परिवार वालों और करीबी सहयोगियों के घरों पर भी एक साथ दबिश दी गई। अधिकारियों के बिजनेस पार्टनर भी इस बड़ी जांच के दायरे में आ गए हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।
परिवार के नाम पर कारोबार: जांच में सामने आया है कि कई अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के पैसों का इस्तेमाल व्यापार में किया था। इन भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने परिवार वालों और रिश्तेदारों के नाम पर ही शराब के लाइसेंस ले रखे थे। इसी तरीके का इस्तेमाल करते हुए वे अपने करीबियों के जरिए इस अवैध कारोबार को खुलेआम चला रहे थे। सरकारी पद पर रहते हुए इस तरह का व्यापार करना पूरी तरह से गैरकानूनी और नियमों के खिलाफ है। अधिकारियों ने अपनी ताकत और रसूख का इस्तेमाल करके इस पूरे नेटवर्क को बहुत ही सुरक्षित बना रखा था।
काले धन को सफेद बनाने का खेल: अधिकारियों द्वारा रिश्वत से कमाई गई इस अवैध रकम को पूरी तरह से सफेद बनाने का खेल चल रहा था। शराब के इस कारोबार से होने वाली कमाई को कानूनी और वैध कमाई के रूप में दिखाया जा रहा था। इस तरह से बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद धन में बदलने का एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया था। जांच एजेंसी ने इस पूरे आर्थिक अपराध के नेटवर्क और इसके काम करने के तरीके का भंडाफोड़ किया है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में अधिकारियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मंजूनाथ के ठिकानों से बड़ी रिकवरी: जांच दल ने अधिकारी वाई.डी. मंजूनाथ और उनके करीबियों पर सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। उनके ड्राइवर और सहयोगियों के ठिकानों से करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की विशाल नकद राशि बरामद हुई है। इसके साथ ही इन ठिकानों से 7.8 करोड़ रुपये कीमत के बेशकीमती सोने के गहने भी जब्त किए गए हैं। अधिकारियों को यहां से करीब 3.3 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा भी नकद रूप में प्राप्त हुई है। इस तरह से इस पूरे मामले में अब तक 13.3 करोड़ रुपये से अधिक की कुल संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
अहम दस्तावेजों की हुई जब्ती: इस पूरी छापेमारी की प्रक्रिया के दौरान जांच दल को कई बहुत ही अहम और गुप्त दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारियों ने मौके से कई महत्वपूर्ण डिजिटल डिवाइस और प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात अपने कब्जे में लिए हैं। रिश्वत के अवैध लेन-देन का पूरा हिसाब रखने वाली एक कैश बुक भी इस दौरान बरामद कर ली गई है। इन सभी अहम सबूतों की मदद से इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। जांच एजेंसी की ओर से इस बड़े मामले में जल्द ही और भी कई सनसनीखेज खुलासे किए जा सकते हैं।





































