यूपी में तबाही की योजना बनाने वाले आतंकियों को मिली जेल की सजा उत्तर प्रदेश में शांति और सुरक्षा को भंग करने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का अंत एनआईए कोर्ट के फैसले के साथ हुआ है। अलकायदा के साथ साठगांठ कर उत्तर प्रदेश के महानगरों में बम विस्फोटों की योजना बनाने वाले तीन आतंकवादियों को न्यायालय ने जेल की कालकोठरी में भेज दिया है। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती था, क्योंकि इसमें स्थानीय मॉड्यूल के साथ-साथ सीमा पार और कश्मीर के आतंकी कनेक्शन भी शामिल थे। लखनऊ की एनआईए विशेष अदालत ने साक्ष्यों की मजबूती को देखते हुए दोषियों को उम्रकैद तक की सजा सुनाई है, जो यह स्पष्ट करता है कि भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
अपराधियों का जाल और उन पर लगाए गए आर्थिक दंड अदालत द्वारा सजा पाए गए अपराधियों की सूची में लखनऊ के रहने वाले मुशीरुद्दीन और मिन्हाज अहमद के साथ जम्मू-कश्मीर के बडगाम का तौहीद अहमद शाह प्रमुख हैं। इन तीनों को आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण, साजिश रचने और देश के खिलाफ युद्ध की तैयारी करने का दोषी पाया गया है। एनआईए कोर्ट ने सोमवार को आदेश जारी करते हुए उन्हें आजीवन कारावास और कठोर जेल की अलग-अलग अवधि के लिए दंडित किया। साथ ही, इन सभी पर 20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। इसी प्रकरण से जुड़े तीन अन्य आरोपी शकील, मुस्तकीम और मोईद पहले ही अपना गुनाह कबूल कर चुके थे, जिसके कारण उन्हें शस्त्र अधिनियम के तहत सजा दी जा चुकी है।
अंसार गजवातुल हिंद की स्थापना और भर्ती अभियान जुलाई 2021 में उत्तर प्रदेश एटीएस की सक्रियता से इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था, जिसके बाद एनआईए ने जांच की कमान संभाली थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मिन्हाज और मुशीरुद्दीन लखनऊ को केंद्र बनाकर ‘अंसार गजवातुल हिंद’ (AGH) नामक संगठन का विस्तार कर रहे थे, जो कि ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) की एक शाखा है। इन अपराधियों ने स्थानीय स्तर पर भोले-भाले युवाओं को गुमराह कर उनका ब्रेनवाश करने का जिम्मा उठाया था। उनका उद्देश्य एक ऐसी आतंकी सेना तैयार करना था जो उत्तर प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर सके और बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि पहुंचा सके।
स्वतंत्रता दिवस को निशाना बनाने का घिनौना मंसूबा एनआईए के जांचकर्ताओं ने दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह साबित किया कि ये आतंकी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के पावन अवसर पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों को खून से रंगना चाहते थे। इस साजिश के पीछे मिन्हाज अहमद मास्टरमाइंड था, जिसे कश्मीर के तौहीद अहमद और आदिल नबी तेली उर्फ मूसा ने आतंकी ट्रेनिंग और विचारधारा के लिए तैयार किया था। मिन्हाज ने ही मुसीरुद्दीन को इस आतंकी राह पर चलने के लिए प्रेरित किया और उसे संगठन के प्रति वफादारी की शपथ दिलाई। इनकी योजना में केवल बम धमाके ही नहीं, बल्कि प्रमुख हस्तियों को निशाना बनाना भी शामिल था।
हथियारों की आपूर्ति और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का समन्वय भारत सरकार की सत्ता को चुनौती देने के उद्देश्य से इन आतंकियों ने अवैध रूप से भारी मात्रा में असलहे और विस्फोटक जुटाए थे। इस काम में शकील, मुस्तकीम और मोईद ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया था। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि इन अपराधियों ने न केवल रसद और हथियारों की व्यवस्था की, बल्कि छिपने के ठिकानों और संचार के सुरक्षित माध्यमों का भी प्रबंध किया था। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में बताया कि किस प्रकार यह पूरा नेटवर्क एक मशीन की तरह काम कर रहा था, जिसका एकमात्र लक्ष्य भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करना और राज्य में अराजकता फैलाना था।
लश्कर कनेक्शन और जांच की अंतिम सफलता इस केस का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जांच में लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन टीआरएफ के आतंकी मूसा की भूमिका सामने आई। मूसा, तौहीद के माध्यम से मिन्हाज को फंड भेज रहा था, जो आतंकी फंडिंग के एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा था। मार्च 2022 में मूसा का एक मुठभेड़ में खात्मा हो गया, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अपनी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। अगस्त 2022 के संशोधित चार्जशीट के बाद यह मामला अपने मुकाम पर पहुंचा। अंततः, लखनऊ की विशेष अदालत ने इन आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए उन्हें कड़ी सजा दी है, जो सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।



































