अपराध जगत में हड़कंप और अभियुक्तों की गिरफ्तारी गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नरेट ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए उस गिरोह को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिसने एक स्थानीय बिल्डर से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। इंदिरापुरम पुलिस और स्वॉट टीम की मुस्तैदी से इस मामले में संलिप्त एक महिला और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया गया है। इन अभियुक्तों ने अपराध जगत के कुख्यात ‘सुंदर भाटी गैंग’ के नाम का सहारा लेकर पीड़ित को भयभीत किया था। पुलिस की इस प्रभावी कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों और बिल्डरों में सुरक्षा की भावना जगी है, क्योंकि पुलिस ने अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं।
खौफनाक संदेश और रंगदारी की बड़ी मांग घटना का विवरण देते हुए पीड़ित अर्पित गुप्ता ने बताया कि उन्हें 11 अप्रैल 2026 से ही लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। उनके मोबाइल पर आने वाले संदेशों में 10 करोड़ रुपये की मांग की गई थी और पैसे न मिलने की स्थिति में उनके परिवार के खात्मे की चेतावनी दी गई थी। अपराधी व्हाट्सऐप का उपयोग कर रहे थे ताकि वे सीधे पकड़े न जा सकें। अर्पित गुप्ता की शिकायत पर जब स्वॉट टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की, तो धमकी की सत्यता प्रमाणित हुई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी।
भरोसे का कत्ल और आपसी रंजिश का परिणाम जांच प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य आरोपी रविंद्र उर्फ रोबिन बिल्डर अर्पित गुप्ता का बेहद करीबी रहा था और उनके व्यावसायिक कार्यों में शामिल था। रोबिन ने ही अपनी मित्र सविता को अर्पित के दफ्तर में काम पर लगवाया था। नौकरी से निकाले जाने के बाद सविता ने प्रतिशोध की भावना और धन के लालच में रोबिन को उकसाया। इसके बाद इन दोनों ने अपने एक अन्य सहयोगी तुषार बैसौया के साथ मिलकर बिल्डर को लूटने की योजना बनाई। यह मामला दर्शाता है कि कैसे आपसी विश्वास का लाभ उठाकर करीबी लोग ही जघन्य अपराधों को अंजाम देने की साजिश रचते हैं।
गिरफ्तारी से बचने के लिए शातिराना चालें पकड़े गए अभियुक्तों ने पुलिस की जांच को भटकाने के लिए काफी प्रयास किए थे। उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मोबाइल सिम का उपयोग किया था ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके। वे किसी एक स्थान से कॉल करने के बजाय निरंतर अपनी जगह बदलते रहते थे। रोबिन को अर्पित के घर और बच्चों की पूरी जानकारी थी, इसलिए वह उन्हें ऐसी बातें बोलकर डराता था जिससे उन्हें यकीन हो जाए कि उन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। हालांकि, आधुनिक तकनीक और पुलिस की सूझबूझ के आगे उनकी यह तमाम चालाकियां धरी की धरी रह गईं।
गहन अन्वेषण और इनाम की घोषणा वेव सिटी क्षेत्र से हुई इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस कमिश्नरेट अब सुंदर भाटी गैंग के साथ इन अपराधियों के संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है। इसके अतिरिक्त, अंश मित्तल नामक व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिसने आरोपियों को अवैध रूप से सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। इस जटिल केस को सुलझाने वाली टीम के मनोबल को बढ़ाने के लिए अपर पुलिस आयुक्त ने 50,000 रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है, जिससे पुलिस बल में उत्साह का संचार हुआ है।
पुलिस प्रशासन की सतर्कता और जनता को संदेश डीसीपी धवल जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अपराधियों ने बिल्डर को डराकर मोटी रकम वसूलने की कोशिश की थी, लेकिन क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम की सक्रियता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजियाबाद पुलिस अपराधियों के विरुद्ध निरंतर अभियान चला रही है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। डीसीपी ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी धमकी भरे कॉल से न डरें और तुरंत कानून की मदद लें। पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों को उनके किए की सजा दिलाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।



































