विशेष सत्र और सियासी घमासान भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र बिंदु बन गया है। केंद्र सरकार द्वारा इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया को तेज करते हुए संसद का विशेष सत्र आहूत किया गया है। इस विधायी सक्रियता ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी को हमलावर होने का अवसर दे दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा की नीयत पर सवालिया निशान लगाते हुए इसे ‘पीडीए’ के हितों के विरुद्ध एक बड़ा षड्यंत्र करार दिया है। उनका तर्क है कि यह विधेयक केवल राजनीतिक लाभ के लिए लाया जा रहा है, न कि महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के उद्देश्य से।
सत्ता की विदाई और चुनावी स्टंट सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आरक्षण को लेकर दिखाई जा रही यह व्याकुलता प्रमाणित करती है कि भाजपा अब सत्ता से विदा होने वाली है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब भाजपा को अपने जनाधार के खिसकने का आभास होने लगता है, तब वे इस तरह के भावनात्मक कार्ड खेलते हैं। यादव ने जोर देकर कहा कि सच्चाई यह है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित और दुखी महसूस कर रही हैं। यह विधेयक केवल गिरती हुई साख को बचाने का एक निष्फल प्रयास मात्र है।
आरक्षण और जनगणना का अंतर्संबंध सपा प्रमुख ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार जनगणना की संवैधानिक प्रक्रिया को केवल इसलिए टाल रही है ताकि जातिगत जनगणना की आवश्यकता से बचा जा सके। जातिगत आंकड़े सामने आने पर आरक्षण की न्यायसंगत व्यवस्था की मांग उठेगी, जिसे भाजपा नेतृत्व कभी स्वीकार नहीं करना चाहता। उनके अनुसार, महिला आरक्षण बिल की आड़ में सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय की लड़ाई को कमजोर करना चाहती है। यह रणनीति पिछड़े वर्गों को सत्ता और संसाधनों में उनकी उचित हिस्सेदारी से वंचित रखने के लिए तैयार की गई है।
जनता की जागरूकता और निष्पक्ष चुनाव अखिलेश यादव ने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को एक व्यापक वैचारिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाएं भी शामिल हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना उनका प्राथमिक लक्ष्य है। यादव का मानना है कि अब जनता और ‘पीडीए प्रहरी’ भाजपा की चुनावी धांधलियों के प्रति पूरी तरह सतर्क हो चुके हैं। अब किसी भी प्रकार का चुनावी हेरफेर सफल नहीं होगा। देश की जागरूक जनता अब भाजपा के खोखले वादों को समझ चुकी है और आने वाले समय में निष्पक्ष मतदान के माध्यम से भाजपा के शासन का अंत सुनिश्चित करेगी।
महंगाई की मार और महिलाओं की पीड़ा आर्थिक विषमता और बढ़ती लागत पर चिंता व्यक्त करते हुए यादव ने कहा कि भाजपा की ‘चंदा वसूली’ वाली राजनीति ने सामान्य जनता की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से महिलाओं को अपनी रसोई चलाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। घरेलू गैस की कीमतों में हुई निरंतर वृद्धि ने मध्यम और निम्न वर्ग की महिलाओं के जीवन को कष्टकारी बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा हमेशा नए समूहों को अपने भ्रामक वादों में फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन इस बार उनका यह ‘महिला कार्ड’ सफल नहीं होगा क्योंकि महिलाएं महंगाई और कुशासन का दंश झेल रही हैं।
शिक्षा का अभाव और सार्वजनिक चुनौती लेख के समापन में अखिलेश यादव ने सामाजिक और शैक्षिक बुनियादी ढांचे की विफलता पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी शिक्षण संस्थानों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। मेरठ से लेकर नोएडा तक की मेहनतकश महिलाओं के संघर्ष और उनकी आंखों की नमी सरकार के दावों की पोल खोल रही है। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा को इस बिल की सार्थकता पर इतना ही विश्वास है, तो उन्हें वातानुकूलित कमरों के बजाय सड़कों पर काम करने वाली श्रमिक महिलाओं के बीच जाकर इसकी घोषणा करनी चाहिए।



































