सम्राट चौधरी का ऐतिहासिक शपथ ग्रहण और पटना में उमड़ा राजनीतिक सैलाब बिहार के राजनीतिक इतिहास में 15 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। पटना के लोकभवन में आयोजित एक गौरवशाली समारोह में सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ली। यह बिहार भाजपा के लिए एक युगांतरकारी क्षण है, क्योंकि दशकों के संघर्ष और गठबंधन की राजनीति के बाद आखिरकार भाजपा ने राज्य की कमान अपने हाथ में ली है। सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू के कद्दावर नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि अब बिहार में ‘सम्राट’ का युग शुरू होने जा रहा है। इस समारोह ने न केवल सत्ता का हस्तांतरण किया, बल्कि बिहार के विकास के लिए एक नए विजन की नींव भी रखी।
विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफर और भाजपा का बढ़ता वर्चस्व सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री पद तक पहुँचना उनके निरंतर संघर्ष और मुखर नेतृत्व का प्रमाण है। 26 साल पहले पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघने वाले सम्राट ने अपनी राजनीतिक पारी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। भाजपा में शामिल होने के मात्र 9 साल के भीतर उन्होंने अपनी आक्रामक छवि और सांगठनिक कौशल से प्रदेश अध्यक्ष और अब मुख्यमंत्री तक का रास्ता तय किया। भाजपा के 46 साल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है कि पार्टी ने अपना मुख्यमंत्री बनाया है। इससे पहले भाजपा ने हमेशा नीतीश कुमार के पीछे रहकर काम किया, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और सीटों के गणित ने सम्राट चौधरी को बिहार का निर्विवाद नेता बना दिया। अब उनके कंधों पर न केवल शासन चलाने की, बल्कि 2025 की प्रचंड जीत के बाद जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने की भी जिम्मेदारी है।
डिप्टी सीएम की जोड़ी: जेडीयू के दो अनुभवी स्तंभों का साथ नई सरकार के दो मजबूत स्तंभों के रूप में विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने जिम्मेदारी संभाली है। बिजेंद्र यादव, जिन्हें सुपौल की जनता ‘कोसी का विश्वकर्मा’ मानती है, 1990 से अपराजेय रहे हैं। नौ बार के विधायक और बिजली से लेकर वित्त मंत्रालय तक का अनुभव रखने वाले बिजेंद्र यादव गठबंधन की स्थिरता के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। वहीं, विजय चौधरी नीतीश कुमार के ‘थिंक टैंक’ के प्रमुख सदस्य रहे हैं। सरायरंजन से चुनाव जीतने वाले विजय चौधरी की छवि एक साफ-सुथरे और कुशल प्रशासक की रही है। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी निष्पक्षता की चर्चा आज भी होती है। इन दोनों नेताओं की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि नई सरकार में भाजपा की आक्रामकता और जेडीयू का प्रशासनिक अनुभव मिलकर बिहार को एक नई दिशा प्रदान करेंगे।
राष्ट्रीय नेताओं का जमावड़ा और चिराग पासवान की शुभेच्छा शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर पटना का लोकभवन राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गजों का केंद्र बन गया। रविशंकर प्रसाद, जीतन राम मांझी, और नित्यानंद राय जैसे नेताओं ने समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शपथ से पूर्व सम्राट चौधरी से भेंट की और उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई दी। चिराग ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सुशासन और खुशहाली के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आवास पर जेपी नड्डा की मौजूदगी और रणनीतिक चर्चाओं ने यह संकेत दिया कि केंद्रीय नेतृत्व बिहार की इस नई सरकार को पूर्ण समर्थन और मार्गदर्शन देने के लिए तैयार है।
जातिगत संतुलन और विपक्ष के सवालों का प्रशासनिक उत्तर बिहार की राजनीति में जाति एक कड़वी हकीकत है और नई सरकार ने इसे बखूबी समझा है। मुख्यमंत्री का पद कुशवाहा समाज को देकर भाजपा ने एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, जो बिहार में यादवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी समूह है। उपमुख्यमंत्री पदों पर भूमिहार समाज से आने वाले विजय चौधरी और ओबीसी वर्ग के बिजेंद्र यादव की नियुक्ति ने ‘सर्वजन’ की भागीदारी सुनिश्चित की है। इस रणनीतिक संतुलन पर विपक्ष ने निशाना साधा है, लेकिन भाजपा नेता रामकृपाल यादव ने इसे खारिज करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव केवल हताशा में बयानबाजी कर रहे हैं। संजय सरावगी और शाहनवाज हुसैन जैसे भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ने विकास की जो राह दिखाई थी, सम्राट चौधरी उसे और अधिक तीव्रता से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
हनुमान मंदिर में पूजन और बिहार के विकास का नया संकल्प शपथ ग्रहण से ठीक पहले सम्राट चौधरी ने राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर में मत्था टेककर अपने नए दायित्व के लिए आशीर्वाद लिया। यह धार्मिक अनुष्ठान उनके संकल्प की गंभीरता को दर्शाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मौके पर कहा कि जहाँ नीतीश कुमार के जाने की संवेदना है, वहीं सम्राट चौधरी के आने का उत्साह भी है। अब सम्राट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपराध पर लगाम लगाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की है। राजीव प्रताप रूडी ने इसे बिहार के लिए एक साहसिक कदम बताया और कहा कि भाजपा अब ड्राइविंग सीट पर है, इसलिए जिम्मेदारी भी बड़ी है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की यह नई एनडीए सरकार विकास के पथ पर कितनी तेजी से दौड़ती है, इस पर पूरे देश की नजर रहेगी।



































