हिंसा के पीछे गहरी संगठित साजिश का पर्दाफाश गौतम बुद्ध नगर पुलिस की मुखिया लक्ष्मी सिंह ने नोएडा हिंसा के संदर्भ में एक विस्तृत प्रेस वार्ता करते हुए बताया कि यह पूरी घटना एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने इसे ‘ऑर्गेनाइज्ड एक्टिविटी’ करार दिया, जिसका एकमात्र उद्देश्य औद्योगिक शांति को भंग करना था। इस मामले के मुख्य किरदार मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद बताए जा रहे हैं। जांच से पता चला है कि रूपेश राय साल 2018 से और आदित्य आनंद साल 2020 से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। ये पेशेवर आंदोलनकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं और इनका उद्देश्य केवल भीड़ को उग्र करना होता है।
सीमा पार से सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ प्रोपेगेंडा जांच का सबसे गंभीर पहलू यह है कि हिंसा को हवा देने के लिए दो ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट का उपयोग किया गया जो पाकिस्तान से संचालित थे। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, ये अकाउंट्स पिछले तीन महीनों से वीपीएन (VPN) के माध्यम से पाकिस्तान से सक्रिय थे। इन्होंने औद्योगिक डेटाबेस का लाभ उठाते हुए स्थानीय मजदूरों के बीच फेक न्यूज का प्रचार किया। इन विदेशी हैंडल का उद्देश्य भारत के विकास इंजन कहे जाने वाले नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में डर और हिंसा का माहौल पैदा करना था। पुलिस ने इन अकाउंट्स सहित कुल 13 मुकदमे दर्ज किए हैं ताकि डिजिटल साजिश की जड़ों तक पहुंचा जा सके।
भय का माहौल बनाने के लिए फैलाया गया झूठ 13 अप्रैल को जब पुलिस बल मदरसन कंपनी के सामने स्थिति को संभालने में सफल रहा था, तभी इन विदेशी तत्वों और स्थानीय साजिशकर्ताओं ने नया पैंतरा चला। उन्होंने डिजिटल माध्यमों से यह अफवाह उड़ा दी कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कई निर्दोष मजदूरों की मौत हो गई है। इस निराधार सूचना ने भीड़ को दोबारा उत्तेजित कर दिया। कमिश्नर ने बताया कि जांच में यह पाया गया कि मजदूर इन झूठी पोस्टों को देखकर उग्र हो रहे थे। हिंसा के बाद मुख्य आरोपी आदित्य आनंद ने अपना हुलिया बदला और मौके से फरार हो गया, जबकि मनीषा और रूपेश पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
उपद्रवियों पर नकेल और कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा हिंसा के मामले में प्रशासन का रुख अत्यंत कड़ा है। कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने खुलासा किया कि गिरफ्तार किए गए 62 आरोपियों में से ज्यादातर लोग पेशेवर श्रमिक नहीं हैं। ये वे बाहरी तत्व हैं जिन्हें हिंसा करने के उद्देश्य से बुलाया गया था। आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल 9 मुख्य उपद्रवियों की पहचान हो चुकी है जिन्होंने सीधे पुलिस कर्मियों पर हमला किया था। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्दोष मजदूर को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन जो लोग हिंसा के लिए बाहर से आए थे, उन पर एनएसए (NSA) लगाया जाएगा। पुलिस अब इन बाहरी तत्वों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच कर रही है।
साजिश की पूरी रूपरेखा और व्हाट्सएप ग्रुप का खेल हिंसा की तैयारी काफी पहले से शुरू हो गई थी। पुलिस की जांच के अनुसार, 31 मार्च से ही रूपेश और आदित्य की संदिग्ध गतिविधियां नोएडा में देखी गई थीं। 9 और 10 अप्रैल को क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से व्हाट्सएप समूहों का जाल बिछाया गया ताकि एक साथ हजारों लोगों को संदेश भेजा जा सके। 11 अप्रैल को जब प्रशासन और मजदूरों के बीच एक सम्मानजनक समझौता हो गया था, तब इन आरोपियों ने भड़काऊ भाषण देकर शांति प्रक्रिया को बाधित कर दिया। इन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को एक हिंसक दंगे में बदलने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया।
शांति बहाली और सुरक्षा का पुख्ता आश्वासन नोएडा में अब शांति का माहौल है और औद्योगिक गतिविधियां पटरी पर लौट आई हैं। पुलिस कमिश्नर ने जनता और श्रमिकों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। पुलिस की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और अराजक तत्वों पर पैनी नजर रखी जा रही है। क्यूआर कोड के जरिए जो डिजिटल जाल बुना गया था, उसे भी डिकोड किया जा रहा है। लक्ष्मी सिंह ने अंत में दोहराया कि बाहरी तत्वों और विदेशी साजिशकर्ताओं के गठजोड़ को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा। प्रशासन अब डिजिटल मॉनिटरिंग को और अधिक मजबूत कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी ‘फेक न्यूज’ का त्वरित मुकाबला किया जा सके।



































