उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी ने विकास और जनसंपर्क के दोहरे फार्मूले पर अपनी रणनीति तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महीने के भीतर तीन बड़े दौरे कर राज्य के राजनीतिक मानचित्र को मथ दिया है। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य करोड़ों की परियोजनाओं के बहाने जनता के बीच यह संदेश देना है कि भाजपा विकास को अपनी मुख्य प्राथमिकता मानती है।
तीन क्षेत्रों पर सीधा फोकस: भाजपा की रणनीति राज्य को तीन हिस्सों—पश्चिम, पूर्वांचल और अवध—में बांटकर देखने की है। 28 मार्च को Jewar में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को संदेश दिया गया। इसके ठीक एक महीने बाद 28 अप्रैल को Varanasi के दौरे से पूर्वांचल और 29 अप्रैल को Hardoi की सभा से अवध क्षेत्र को साधने का प्रयास किया गया। इन क्षेत्रों में हुए शिलान्यास और लोकार्पण को भाजपा अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
पूर्वांचल में सपा की चुनौती: पूर्वांचल क्षेत्र भाजपा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यहां 31 सीटें जीतकर भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। लोकसभा चुनाव में तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही, जहां सपा गठबंधन ने 12 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा केवल Varanasi और भदोही में ही अपना ‘कमल’ खिला पाई। अब प्रधानमंत्री के दौरों के जरिए भाजपा इस क्षेत्र में अपने कमजोर पड़े संगठन और जनाधार को फिर से मजबूत करना चाहती है।
अवध क्षेत्र का चुनावी डेटा: अवध क्षेत्र ने भाजपा को मिश्रित परिणाम दिए हैं। जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 2017 की तुलना में अपनी सीटों में 17 का इजाफा किया था, वहीं 2024 के लोकसभा चुनावों में उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी 20 में से मात्र 8 सीटों पर सिमट गई, जबकि 12 सीटें सपा-कांग्रेस गठबंधन के खाते में चली गईं। फैजाबाद, सुल्तानपुर और रायबरेली जैसी अहम सीटों पर हुई हार ने भाजपा को अवध में अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
पश्चिमी यूपी के राजनीतिक हालात: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को तगड़ा झटका लगा था। क्षेत्र की 136 सीटों में से भाजपा 2017 में 110 सीटें जीती थी, जो 2022 में घटकर 93 रह गईं। इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी ने यहां अपनी ताकत दिखाते हुए 20 से उछलकर 43 सीटों पर जीत दर्ज की। जेवर हवाई अड्डे जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन इसी क्षेत्र में अपना खोया हुआ वर्चस्व वापस पाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अखिलेश यादव की घेराबंदी: भाजपा की इस आक्रामक शैली के बीच विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। अखिलेश यादव भाजपा के हर कदम का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की Jewar सभा के तत्काल बाद उन्होंने Dadri में अपनी रैली कर पश्चिम में अपनी पकड़ दिखाने की कोशिश की। अखिलेश यादव लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं और जल्द ही गाजीपुर का दौरा करने वाले हैं। दोनों ही दल 2027 के अंतिम परिणाम को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।


































