पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी आजादी की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए एक विवादित बयान दिया है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में अपनी उपलब्धियां बताने के बजाय शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद करने में व्यस्त दिखे। उन्होंने दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर का पूरा श्रेय ट्रंप को दे दिया, जिससे उनकी काफी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि यह वाकया पाकिस्तान की पुरानी गुलामी की मानसिकता को उजागर करता है। देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह का बयान देना कूटनीतिक रूप से बचकाना माना जा रहा है।
सीजफायर के लिए ट्रंप को श्रेय: शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कहा कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विशेष रूप से शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। उनका मानना था कि ट्रंप ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के मध्य सीजफायर करवाकर लाखों मासूम जिंदगियों को बचाने का काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध लगातार प्रगति की ओर अग्रसर हैं। शहबाज ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के रणनीतिक रिश्ते और अधिक प्रगाढ़ होंगे। इस बयान के सामने आने के बाद से ही कूटनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
विदेश नीति और संप्रभुता पर सवाल: स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर जहां पाकिस्तान को अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और देश के उज्जवल भविष्य की बात करनी चाहिए थी, वहां ट्रंप की तारीफ की गई। शहबाज शरीफ द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति का गुणगान किए जाने से पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना यह दर्शाती है कि पाकिस्तान आज भी वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति के लिए शक्तिशाली देशों के समर्थन की तलाश करता रहता है। इस तरह के आचरण से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान की स्वायत्तता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
सिंधु जल समझौते पर घेराबंदी: शहबाज शरीफ ने अपने इसी भाषण में भारत को घेरने की नीयत से सिंधु जल समझौते का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते को पाकिस्तान के अस्तित्व से जोड़ते हुए इसे देश के लिए एक ‘रेड लाइन’ घोषित किया। आजादी के जश्न के माहौल में भारत विरोधी बयानबाजी और अमेरिका के प्रति आभार जताने के इस अनोखे मिश्रण ने सभी का ध्यान खींचा। शहबाज का यह प्रयास उनके देश की आंतरिक राजनीति को संतुष्ट करने का एक जरिया मात्र नजर आया, जिसे वैश्विक कूटनीति में ज्यादा तवज्जो नहीं मिल सकी।
तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार: सीजफायर को लेकर पाकिस्तान के दावों के विपरीत भारत सरकार ने अपना रुख पूरी तरह से हमेशा साफ और स्पष्ट रखा है। भारत ने कई बार दोहराया है कि मई 2025 में सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के सैन्य महानिदेशकों (DGMO) की सीधी वार्ता का परिणाम था। भारत ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर समझौते में डोनाल्ड ट्रंप या किसी भी अन्य तीसरे देश की कोई मध्यस्थता या भूमिका बिल्कुल नहीं थी। इसके बावजूद शहबाज शरीफ द्वारा ट्रंप को श्रेय देना पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी की आदत को उजागर करता है।
मानसिकता पर उठे गंभीर सवाल: शहबाज शरीफ के इस ताजा बयान ने पाकिस्तान के भीतर और बाहर उसकी वैश्विक छवि को गहरा झटका दिया है। अपनी आजादी की सालगिरह पर एक विदेशी नेता का आभार व्यक्त करने को पाकिस्तान की मानसिक गुलामी से जोड़कर देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान साबित करता है कि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय नीतियों के लिए अब भी अमेरिका के सहारे की उम्मीद रखता है। इस भाषण ने यह सवाल भी छोड़ दिया है कि क्या पाकिस्तान कभी अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति का निर्माण कर पाएगा।
















































