‘इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत’ (ICT) में अनुसंधान एवं निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने अमेरिकी संसद से दोनों दलों के समर्थन वाले ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ (AFTA) को पारित करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर अधिक वैधता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में तिब्बत के मुद्दे को हमेशा से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।
AFTA कानून की महत्ता और उद्देश्य तनावपूर्ण हालातों के बीच भुचुंग त्सेरिंग ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी संसद में ‘अश्योरिंग द Future of Tibet Act’ पेश किया गया है, जिसे अभी मंजूरी मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा, ”अमेरिकी संसद को दोनों दलों द्वारा समर्थित ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ को पारित करना चाहिए। यह सीटीए को तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देकर उसे अधिक वैधता प्रदान करता है।” यह कानून तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक नई ताकत और मान्यता प्रदान कर सकता है।
India की भूमिका पर विशेष वक्तव्य त्सेरिंग ने भारत की ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा, ”भारत तिब्बतियों को वह आधार उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपनी इच्छानुसार काम कर सकें। इसी वजह से हम वहां यह आधार तैयार कर पाए हैं और उसका यहां इस्तेमाल कर रहे हैं।” भारत में रहकर ही तिब्बती समुदाय अपनी संस्कृति और लोकतंत्र की रक्षा करने में सफल हो पाया है। धर्मशाला स्थित मुख्यालय से ही तिब्बती निर्वासित सरकार अपनी सभी वैश्विक गतिविधियों और नीतियों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने में सक्षम रही है।
CTA और धर्मशाला का केंद्रीय केंद्र सीटीए तिब्बत की निर्वासित सरकार है और इसका मुख्यालय भारत के Dharamshala में है। यह दुनिया भर में तिब्बती प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करती है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और संस्कृति के संरक्षण जैसी सामुदायिक सेवाओं का संचालन करती है। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा हैं, जबकि सिक्योंग (राष्ट्रपति) सीटीए के राजनीतिक प्रमुख होते हैं। भारत द्वारा दी गई इस आजादी और भूमि के कारण ही तिब्बती समुदाय विश्व पटल पर अपनी आवाज पूरी मजबूती से उठाने में सफल रहा है।
वित्तीय मदद बहाल करने की अपील ICT ने अमेरिकी संसद से मांग की है कि वह भारत और नेपाल में रह रहे तिब्बती समुदायों के लिए मानवीय सहायता और अन्य सहयोग का पूरा वित्त पोषण तुरंत बहाल करे। इसके साथ ही संगठन ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की कार्यक्षमता और संसाधनों को बढ़ाने के प्रयासों का पूर्ण समर्थन करने की पुरजोर अपील की है। वित्तीय मदद मिलने से शरणार्थी शिविरों में रहने वाले तिब्बतियों को बुनियादी सुविधाएं और बेहतर शिक्षा मिल सकेगी, जिससे वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रख सकेंगे।
भविष्य के कूटनीतिक प्रभाव अमेरिकी संसद में अगर यह कानून पारित होता है तो इससे चीन पर कूटनीतिक दबाव काफी हद तक बढ़ जाएगा। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को मान्यता मिलने से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बत की आवाज और अधिक आधिकारिक मानी जाएगी। यह कदम भारत और अमेरिका में रह रहे तिब्बती प्रवासियों के मनोबल को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगा। अब देखना यह है कि अमेरिकी संसद इस विधेयक को मंजूरी देने में कितना समय लेती है और इसके क्या नतीजे निकलते हैं।

















































