ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वॉशिंगटन के साथ जून महीने में हुए बहुचर्चित समझौते का पुरजोर बचाव किया है। इस समझौते की ईरानी संसद में मौजूद कट्टरपंथी नेताओं द्वारा लगातार तीखी आलोचना की जा रही है। बीबीसी की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पेज़ेश्कियान को ईरानी राजनीतिक व्यवस्था में प्रमुख “सुधारवादी” नेताओं में से एक माना जाता है। आलोचकों के आरोपों का जवाब देते हुए पेज़ेश्कियान ने कहा कि समझौते के तहत तेहरान को अमेरिका के सामने घुटने टेकने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं पड़ी थी।
आलोचकों के आरोपों को किया खारिज पेज़ेश्कियान के राजनीतिक आलोचकों ने उनकी सरकार पर अमेरिका के सामने पूरी तरह झुकने और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का बड़ा आरोप लगाया है। पेज़ेश्कियान ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें सच्चाई का कोई अंश नहीं है। उन्होंने कहा कि आलोचकों को इस समझौते में एक भी ऐसी बात नहीं मिलेगी जिससे यह साबित हो कि हमने हार मान ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते में शामिल सभी वादे दूसरी पार्टी यानी अमेरिका से ही सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
Donald Trump का ईरानी नीयत पर संदेह दूसरी ओर वॉशिंगटन में, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ किसी स्थाई समझौते तक पहुंचने की इच्छा पर गहरा शक जताया है। जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य विकल्प सीमित हो गए हैं, तो उन्होंने इसका बेबाकी से जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि इसका बस यही मतलब है कि हम देख रहे हैं कि आगे क्या होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से यह साफ जाहिर होता है कि अमेरिका ईरान के बयानों और नियत को पूरी तरह शक की निगाह से देख रहा है।
Strait of Hormuz पर अमरीकी नियंत्रण राष्ट्रपति Donald Trump ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इलाके में अपनी मजबूत सैन्य मौजूदगी का बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz से जुड़े पूरे इलाके पर अमेरिका का पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि तटीय और ज़मीनी इलाकों पर भी अमेरिकी सेना की पकड़ बेहद मजबूत है। इस अहम समुद्री मार्ग पर अमेरिका का यह दावा ईरानी तेल निर्यात और क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान की डील करने की मंशा पर बयान ट्रंप ने कहा कि ईरान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए वे निश्चित रूप से एक डील तो करना चाहेंगे। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि मेरी निजी राय में, वे अभी सही और उचित डील करने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप का मानना है कि ईरान केवल अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहता है, जो अमेरिका को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। अमेरिकी प्रशासन का यह रुख दिखाता है कि दोनों देशों के बीच किसी सर्वमान्य समझौते पर पहुंचना फिलहाल इतना आसान नजर नहीं आ रहा है।
दोनों देशों के बीच बरकरार गतिरोध राष्ट्रपति Donald Trump के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मतभेद अभी भी काफी गहरे हैं। एक तरफ जहां ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान अपनी संसद को समझौते के फायदे समझा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमरीकी नेतृत्व इसे नाकाफी मान रहा है। Strait of Hormuz पर अमरीकी दावे ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक टेबल पर लौटते हैं या यह गतिरोध और लंबा खींचता है।

















































