वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल, उनका नक्षत्र परिवर्तन और कुंडली में बनने वाले शुभ-अशुभ योग मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। आज 03 सितंबर 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक तरफ जहाँ सौरमंडल के सभी नौ ग्रह अपनी-अपनी राशियों में स्थित होकर विशिष्ट योग बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देवगुरु बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र में अपना पद परिवर्तन करने जा रहे हैं। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा से बनने वाले अशुभ ‘केमद्रुम योग’ की गणना और इसके निवारण के उपायों का विशेष महत्व है।
आइए, आज के सभी 9 ग्रहों की स्थिति, गुरु गोचर का 4 राशियों पर प्रभाव और केमद्रुम योग के संपूर्ण गणित व उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
सभी 9 ग्रहों की स्थिति (03 सितंबर 2026)
आज के दिन आकाशमंडल में नवग्रहों की स्थिति इस प्रकार है:
- चन्द्रमा (Moon): वृषभ राशि में (कृतिका नक्षत्र के प्रभाव में)
- सूर्य (Sun): अपनी स्वराशि सिंह राशि में विराजमान
- मंगल (Mars): मिथुन राशि में
- बुध (Mercury): सिंह राशि में (सूर्य के साथ)
- गुरु/बृहस्पति (Jupiter): कर्क राशि में (उच्च अवस्था में)
- शुक्र (Venus): अपनी स्वराशि तुला राशि में (मजबूत स्थिति)
- शनि (Saturn): मीन राशि में (वक्री अवस्था में)
- राहु (Rahu): कुंभ राशि में
- केतु (Ketu): सिंह राशि में
गुरु का अश्लेषा नक्षत्र गोचर: इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत
ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, समृद्धि, विवाह, संतान और सौभाग्य का कारक माना जाता है। आज 03 सितंबर 2026 की शाम 07:02 बजे गुरु ग्रह अश्लेषा नक्षत्र के प्रथम पद से निकलकर द्वितीय पद में गोचर करेंगे। कर्क राशि में गुरु का उच्च होकर नक्षत्र पद बदलना 4 विशेष राशियों के लिए अत्यंत मंगलकारी सिद्ध होने वाला है:
1. वृषभ राशि (Taurus)
- करियर व नौकरी: गुरु का यह गोचर आपके पराक्रम और आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि करेगा। नौकरीपेशा जातकों को उनकी मनचाही जगह पर स्थानांतरण (Transfer) या नई नौकरी का शानदार अवसर मिल सकता है। पदोन्नति (Promotion) के भी मजबूत योग हैं।
- आर्थिक स्थिति: धन के मामले में बंपर लाभ होगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत होगी। लंबे समय से रुका हुआ या फंसा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है।
2. कर्क राशि (Cancer)
- करियर व व्यापार: आपकी ही राशि में गुरु उच्च के हैं, जिससे कार्यस्थल पर आपका प्रभाव बढ़ेगा। वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा और आपको किसी बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। व्यापार में बंपर मुनाफा होने की उम्मीद है।
- आर्थिक व अन्य लाभ: अचानक धन लाभ के नए मार्ग खुलेंगे। यदि कोर्ट-कचहरी या संपत्ति को लेकर कोई पुराना विवाद चल रहा था, तो उसका आपके पक्ष में निपटारा हो सकता है।
3. कन्या राशि (Virgo)
- करियर व नौकरी: कन्या राशि वालों के लिए यह नक्षत्र गोचर किसी वरदान से कम नहीं है। मनचाही कंपनी में नए पद के साथ नौकरी मिलने के प्रबल आसार हैं।
- आर्थिक स्थिति: पुराने किए गए किसी निवेश (Investment) से आज बड़ा लाभ मिल सकता है। आय में लगातार वृद्धि के संकेत हैं और इस अवधि में आप भविष्य के लिए अच्छी खासी धन बचत (Savings) करने में सफल रहेंगे।
4. वृश्चिक राशि (Scorpio)
- करियर व विदेश योग: करियर में सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल होंगी। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। जो जातक विदेश में नौकरी करने या बसने का सपना देख रहे हैं, उनका यह सपना पूरा हो सकता है।
- व्यापार व संपत्ति: प्रॉपर्टी, रियल एस्टेट या पुराने शेयर बाजार के निवेश से बहुत अच्छा रिटर्न मिलेगा। माता-पिता का हर कदम पर पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और व्यापार में बड़ा मुनाफा कमाएंगे।
केमद्रुम योग: निर्माण, प्रभाव और अचूक उपाय
वैदिक ज्योतिष में केमद्रुम योग को एक अत्यंत प्रतिकूल और कष्टकारी योग माना गया है। यह योग मुख्य रूप से चंद्रमा की कमजोर या एकाकी स्थिति के कारण बनता है।
केमद्रुम योग कैसे बनता है?
जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में चंद्रमा बिल्कुल अकेला बैठा हो—अर्थात:
- चंद्रमा के ठीक एक घर आगे (द्वितीय भाव) में कोई ग्रह न हो।
- चंद्रमा के ठीक एक घर पीछे (द्वादश भाव) में कोई ग्रह न हो।
- चंद्रमा के साथ भी कोई अन्य ग्रह (सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि) न बैठा हो।
- चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो।
ऐसी स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह असहाय और अनियंत्रित हो जाता है, जिससे कुंडली में ‘केमद्रुम योग’ का निर्माण होता है।
केमद्रुम योग का जीवन पर प्रभाव
- मानसिक अस्थिरता: चंद्रमा मन, मस्तिष्क और भावनाओं का कारक है। अकेला पड़ने पर व्यक्ति का मन भटकता है, अत्यधिक नकारात्मक सोच (Overthinking) हावी होती है और डिप्रेशन या मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
- आर्थिक उतार-चढ़ाव: इस योग के कारण जातक को जीवन में बार-बार आर्थिक तंगी, व्यापार में घाटा और कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ता है।
- शुभ योगों का ह्रास: यदि कुंडली में अन्य कई शुभ योग भी मौजूद हों, तो केमद्रुम योग का प्रभाव उन शुभ फलों को काफी हद तक कम या निष्प्रभावी कर देता है।
केमद्रुम योग कब भंग होता है (कवच स्थिति)?
यदि अकेले पड़े चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह—जैसे बृहस्पति (गुरु), शुक्र या बुध की शुभ दृष्टि पड़ जाए, तो केमद्रुम योग का बुरा प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि चंद्रमा वृश्चिक राशि (नीच राशि) में भी हो, लेकिन गुरु की पंचम या नवम दृष्टि उस पर पड़ जाए, तो गुरु का शुभ प्रभाव चंद्रमा की नीचता और केमद्रुम दोष दोनों को संभाल लेता है तथा जातक को शुभ फल मिलने लगते हैं।
केमद्रुम योग के दुष्प्रभाव दूर करने के अचूक उपाय
यदि आपकी कुंडली में यह योग बन रहा है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। निम्नलिखित ज्योतिषीय उपायों से इसके बुरे प्रभावों को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है:
- भगवान शिव की आराधना: चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। नियमित रूप से शिवलिंग पर जल व दूध चढ़ाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
- विशेष तिथियों पर महामृत्युंजय जप: सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि और नाग पंचमी के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से केमद्रुम योग का दोष समाप्त हो जाता है।
- चंद्र बीज मंत्र का जप: प्रतिदिन संध्या काल में चंद्रमा के बीज मंत्र का 108 बार जप करें:मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥
- रुद्राक्ष धारण: किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य की सलाह लेकर दो मुखी (2-Mukhi) या दो रुद्राक्षों का संयोजन धारण करें।
- ध्यान और प्राणायाम: प्रतिदिन 15-20 मिनट ध्यान (Meditation) और अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है और चंद्रमा मजबूत होता है।














































