आज शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है, जिसे देश के कई हिस्सों में कुशोत्पाटिनी अमावस्या, कुशाग्रहणी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के रूप में भी मनाया जाता है। सनातन संस्कृति में इस तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है क्योंकि इस दिन पूरे वर्ष के धार्मिक, मांगलिक और अनुष्ठानिक कार्यों के लिए आवश्यक ‘कुशा घास’ को सुरक्षित रूप से तोड़ा और एकत्रित किया जाता है। इसके साथ ही, पितृ तर्पण, स्नान-दान और पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं आज के विस्तृत पंचांग, सभी शुभ-अशुभ मुहूर्तों और देश के प्रमुख राज्यों के सटीक राहुकाल समय के बारे में।
आज का मुख्य पंचांग और खगोलीय स्थितियाँ
वैदिक पंचांग के अनुसार आज के दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और तिथियों का क्रम इस प्रकार रहेगा:
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी संवत्सर)
- मास व पक्ष: भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष
- तिथि: अमावस्या तिथि आज सुबह 08:57 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ हो जाएगा।
- नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 01:17 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके पश्चात उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रवेश होगा।
- योग: साध्य योग शाम 05:02 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शुभ योग की शुरुआत होगी।
- सूर्य व चंद्रमा की स्थिति: सूर्य देव सिंह राशि में विराजमान रहेंगे। चंद्रमा भी सिंह राशि में शाम 07:08 बजे तक गोचर करेंगे, तत्पश्चात कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय: सुबह 06:03 बजे से 06:04 बजे के मध्य।
- सूर्यास्त: शाम 06:31 बजे।
- चन्द्रोदय: अमावस्या तिथि के कारण चंद्रमा सूर्य के साथ ही उदित होता है और शाम लगभग 06:08 बजे तक दृश्य होता है।
- चन्द्रास्त: अगले दिन की समयानुसार चंद्र दर्शन प्रतिपदा तिथि के नियमों के अंतर्गत होगे।
आज के विशेष शुभ मुहूर्त
किसी भी नए कार्य की शुरुआत, अनुष्ठान या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:17 AM से 06:09 AM तक
- प्रातः संध्या: सुबह 05:43 AM से 07:01 AM तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 PM से 12:54 PM तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 PM से 03:06 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:59 PM से 06:26 PM तक
- सायाह्न संध्या: शाम 06:02 PM से 07:20 PM तक
आज के अशुभ काल और दिशा शूल
शुभ कार्यों को आरंभ करने से पहले अशुभ समय और दिशा शूल का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- राहुकाल (सामान्य माध्यम मान): सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
- यमगण्ड काल: दोपहर 03:24 बजे से शाम 04:58 बजे तक
- कुलिक काल: सुबह 07:37 बजे से सुबह 09:11 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:33 बजे से 09:23 बजे तक, तथा दोपहर 12:42 बजे से 01:32 बजे तक
- दिशा शूल: आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना आवश्यक हो, तो घर से निकलते समय जौ का सेवन करके निकलें।
भारत के विभिन्न राज्यों एवं राजधानियों में राहुकाल का सटीक समय
स्थानीय सूर्योदय और भौगोलिक स्थिति के अंतर के कारण देश के विभिन्न राज्यों में राहुकाल के समय में आंशिक भिन्नता होती है। 11 सितंबर 2026 के लिए प्रमुख राज्यों की राजधानियों का राहुकाल समय निम्नलिखित है:
| क्र.सं. | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी / मुख्य शहर | राहुकाल का समय (11.09.2026) |
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 2 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक |
| 3 | दिल्ली (NCR) | नई दिल्ली | सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक |
| 4 | बिहार | पटना | सुबह 10:14 बजे से सुबह 11:48 बजे तक |
| 5 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक |
| 6 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक |
| 7 | महाराष्ट्र | मुंबई | दोपहर 11:03 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक |
| 8 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 09:47 बजे से सुबह 11:20 बजे तक |
| 9 | झारखंड | रांची | सुबह 10:11 बजे से सुबह 11:44 बजे तक |
| 10 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक |
| 12 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 10:48 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक |
| 13 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक |
| 14 | गुजरात | गांधीनगर | दोपहर 11:06 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक |
| 15 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 10:25 बजे से सुबह 11:58 बजे तक |
| 16 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 10:09 बजे से सुबह 11:42 बजे तक |
| 17 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक |
| 18 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 10:37 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक |
| 19 | कर्नाटक | बंगलुरु | सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक |
| 20 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 21 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक |
| 22 | गोवा | पणजी | दोपहर 11:00 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक |
| 23 | असम | दिसपुर / गुवाहाटी | सुबह 09:23 बजे से सुबह 10:56 बजे तक |
| 24 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 09:14 बजे से सुबह 10:47 बजे तक |
| 25 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 09:16 बजे से सुबह 10:49 बजे तक |
| 26 | मणिपुर | इम्फाल | सुबह 09:18 बजे से सुबह 10:51 बजे तक |
| 27 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 09:22 बजे से सुबह 10:55 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 09:28 बजे से सुबह 11:01 बजे तक |
| 29 | मेघालय | शिलांग | सुबह 09:25 बजे से सुबह 10:58 बजे तक |
| 30 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 09:39 बजे से सुबह 11:12 बजे तक |
कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पितृ पूजन का महत्व
भाद्रपद अमावस्या को ‘कुशोत्पाटिनी अमावस्या’ कहा जाता है क्योंकि इस दिन शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार कुशा (विशेष पवित्र घास) को उखाड़कर पूरे वर्ष के लिए एकत्रित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन काटा गया कुशा एक साल तक शुद्ध रहता है और सभी प्रकार के श्राद्ध, तर्पण, हवन तथा यज्ञ कर्मों में उपयोग किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, इस अमावस्या पर पितरों की शांति और उनकी तृप्ति के लिए पिंडदान, तर्पण तथा ब्राह्मण भोजन का विशेष विधान है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है और उसके नीचे सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित किया जाता है। इस पावन तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से जाने-अनजाने हुए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।













































