उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों में अप्रत्याशित झटके मिलने के बाद से भारतीय जनता पार्टी बेहद सतर्क हो गई है। पार्टी ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक बेहद मजबूत और ठोस रिकवरी प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव महज भाषणों से नहीं बल्कि पूरी तरह डेटा और स्प्रेडशीट के जरिए लड़ा जाएगा। पार्टी ने अपनी कार्यशैली को बदलते हुए पूरी तरह से ‘हाइपर-लोकल’ मोड में आने का बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत बूथ दर बूथ और वोट दर वोट जाकर पार्टी अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने में जुटी है।
18,900 बूथों की पहचान पार्टी ने इस बार केवल व्यापक राजनीतिक उलटफेर मानकर मामले को नहीं छोड़ा बल्कि गहराई से डेटा का विश्लेषण किया है। आंतरिक सर्वे के जरिए उन सटीक मतदान केंद्रों की पहचान की गई है जहां 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा के बीच समर्थन घटा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार लगभग 18,900 ऐसे बूथ सामने आए हैं जिन पर 2022 में जीत मिली थी लेकिन 2024 में वे हार गए। यह विशेष संख्या अब पार्टी की पूरी संगठनात्मक कार्ययोजना का मुख्य और केंद्रीय बिंदु बन चुकी है। इस आंतरिक अभ्यास का मुख्य संदेश पहले गणित को समझना और फिर कमजोरियों को पूरी ताकत से दूर करना है।
अवध और पूर्वांचल पर फोकस अवध से लेकर पूर्वांचल तक पार्टी इस बात की मैपिंग कर रही है कि उसका समर्थन किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा फिसला है। पार्टी यह भी बारीकी से परख रही है कि कौन से समुदाय पिछले चुनावों में पार्टी से दूर छिटक कर चले गए थे। उन नाराज वोटों को वापस पार्टी के पक्ष में लाने के लिए किस तरह के प्रयासों की जरूरत है, इसकी रूपरेखा बन चुकी है। ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ को दोबारा मजबूत करने के लिए पार्टी संगठन ने जमीनी स्तर पर कसरत तेज कर दी है। सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी का यह बूथ-स्तरीय अभियान अब धरातल पर उतर चुका है।
डेटा और जमीन का तालमेल भारतीय जनता पार्टी इस बार किसी भी मोर्चे पर कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती है और पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। पार्टी का मानना है कि जब तक बूथ मजबूत नहीं होगा, तब तक बड़े राजनीतिक अभियानों का पूरा लाभ हासिल नहीं किया जा सकता है। जिन 18,900 बूथों पर पार्टी को शिकस्त मिली थी, वहां के स्थानीय मुद्दों और समीकरणों का अध्ययन किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं की नई टोलियों को इन कमजोर बूथों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है ताकि समय रहते सारी कमियों को सुधारा जा सके। डेटा आधारित इस रिकवरी प्लान से पार्टी विपक्ष को मात देने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रही है।
संगठन और जनता का संवाद सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाते हुए पार्टी जनता के बीच अपनी पैठ को और अधिक गहरा करने में लगी है। पिछले चुनावों में जिन इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था, वहां विशेष संवाद स्थापित किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इन कमजोर बूथों पर लगातार समय बिताने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। पार्टी का यह मानना है कि जनता की नाराजगी को केवल घर-घर संपर्क और संवाद के जरिए ही दूर किया जा सकता है। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी ने अपनी पूरी ताकत इन चिह्नित बूथों के प्रबंधन में झोंक दी है।
2027 की अंतिम तैयारी आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा का यह रिकवरी प्लान बेहद अहम साबित होने वाला है। पार्टी के रणनीतिकारों का पूरा जोर इस बात पर है कि चुनाव से पहले हर एक कमजोर कड़ी को मजबूत कर लिया जाए। हारी हुई सीटों और कमजोर बूथों पर विजय हासिल करने के लिए यह हाइपर-लोकल प्लान गेमचेंजर साबित हो सकता है। पार्टी नेतृत्व की सीधी निगरानी में चल रहा यह अभियान आने वाले दिनों में और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है। तमाम चुनौतियों के बावजूद भाजपा इस पुख्ता रणनीति के साथ एक बार फिर से सत्ता में वापसी का ताना-बाना बुन रही है।













































