उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वीपीडीओ परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय सक्रिय हो गया है। ईडी के देहरादून सब-जोनल ऑफिस ने दस सितंबर को राजधानी में कई प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। मामला वर्ष 2016 की वीपीडीओ परीक्षा में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ का बेहद गंभीर है। आरोप है कि पैसे लेकर परीक्षा के परिणामों को बड़े स्तर पर प्रभावित किया गया था।
चंदन सिंह जीना पर कार्रवाई जांच एजेंसी ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के निजी सहायक चंदन सिंह जीना के घर की तलाशी ली। चंदन सिंह जीना वर्तमान में उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश सिंह रावत के निजी सहायक के रूप में कार्यरत हैं। वह पूर्व में रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान दो हजार नौ से सत्रह के बीच ओएसडी भी रह चुके हैं। ईडी की जांच में सामने आया कि परीक्षा की ओएमआर शीट को सुरक्षित जगह से सचिव के घर ले जाया गया था। इसी कड़ी में एजेंसी ने उनके घर पर दबिश देकर अहम दस्तावेज और सबूत जुटाने का प्रयास किया है।
लाखों रुपये और महंगी घड़ियां छापेमारी के दौरान एजेंसी को चंदन सिंह जीना के घर से बत्तीस लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी मिली। इसके अलावा तलाशी में करीब दो सौ दशमलव पांच ग्राम सोना भी बरामद किया गया है। इस सोने में तेरह सिक्के और सात सोने की चेन शामिल हैं जिन्हें जब्त कर लिया गया है। मौके से रोलेक्स और राडो जैसे बारह अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की बेहद महंगी घड़ियां भी बरामद हुई हैं। इन सभी महंगी घड़ियों की कुल अनुमानित कीमत लगभग एक करोड़ अट्ठारह लाख रुपये बताई जा रही है।
खाते सीज और मोबाइल जब्त कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए ईडी ने पीएमएलए के तहत चंदन और उनके परिवार के खाते सीज किए हैं। इन फ्रीज किए गए बैंक खातों में कुल बावन लाख सोलह हजार रुपये की राशि जमा पाई गई है। मामले में आगे की तकनीकी और वित्तीय जांच के लिए उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है। एजेंसी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जीना ने बड़ी मात्रा में नकदी का खर्च किया था। बरामद की गई संपत्ति और नकदी का कोई भी स्पष्ट और वैध आय का स्रोत नहीं मिल पाया है।
कैसे हुआ था खेल इस बड़े भर्ती घोटाले को अंजाम देने के पीछे एक बहुत ही सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा गया था। आरोप है कि उन ओएमआर शीट के रोल नंबर अलग किए गए जिनमें कम प्रश्न हल किए गए थे। ये रोल नंबर बाद में एक निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को काम पूरा करने के लिए दिए गए थे। कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों ने पैसे लेकर ओएमआर शीट में दोबारा गोले भरकर उन्हें बदल दिया था। हेरफेर करने के बाद उन सभी प्रभावित ओएमआर शीट को पूरी सफाई से दोबारा सील कर दिया गया था।
बिचौलियों की भूमिका जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों से इस बात के पुख्ता प्रमाण भी मिलने शुरू हो गए हैं। इस गैरकानूनी काम के बदले में भारी मात्रा में अवैध रकम बिचौलियों के माध्यम से ट्रांसफर की गई थी। ईडी अब इस पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क और मनी ट्रेल को खंगालने का काम तेजी से कर रही है। घोटाले में शामिल अन्य बड़े चेहरों और भ्रष्ट अधिकारियों के नाम भी जल्द सामने आ सकते हैं। राज्य के इस बहुचर्चित परीक्षा घोटाले की जांच का दायरा अब और अधिक व्यापक कर दिया गया है।












































