घर के मुख्य दरवाजे पर लगी नेमप्लेट सिर्फ घर में रहने वाले व्यक्ति या परिवार की पहचान नहीं बताती, बल्कि यह घर के प्रवेश द्वार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी होती है। आजकल बाजार में लकड़ी, धातु, पत्थर और कई दूसरे मैटेरियल की आकर्षक नेमप्लेट उपलब्ध हैं। लोग अपनी पसंद, घर की डिजाइन और बजट के हिसाब से इनका चुनाव करते हैं।
हालांकि, वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में नेमप्लेट को केवल सजावट या पहचान का साधन नहीं माना जाता। इसके लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसे लगाने की दिशा को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। मान्यता है कि सही मैटेरियल और उचित दिशा का चुनाव घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा दे सकता है।
ऐसे में अगर आप घर के मुख्य दरवाजे के लिए नई नेमप्लेट लगवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो लकड़ी, मेटल या पत्थर में से चुनाव करने के साथ उसकी दिशा का भी ध्यान रखा जा सकता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार किस प्रकार की नेमप्लेट किस दिशा के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
लकड़ी की नेमप्लेट क्यों मानी जाती है शुभ?
वास्तु में लकड़ी को विकास, स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि लकड़ी से बनी नेमप्लेट को घर के लिए शुभ माना जाता है। खासतौर पर प्राकृतिक और मजबूत लकड़ी से तैयार नेमप्लेट घर के प्रवेश द्वार को आकर्षक रूप देने के साथ वास्तु की दृष्टि से भी बेहतर मानी जाती है।
नेमप्लेट तैयार करने के लिए सागवान, शीशम, महोगनी और आम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये लकड़ियां मजबूत होने के साथ लंबे समय तक टिकाऊ भी मानी जाती हैं।
वहीं ऐसी नेमप्लेट से बचने की सलाह दी जाती है जो वास्तविक लकड़ी से बनी होने के बजाय केवल लकड़ी जैसी दिखाई देती हैं। उदाहरण के तौर पर प्लाइबोर्ड, एमडीएफ या प्लास्टिक से बनी लकड़ी के डिजाइन वाली नेमप्लेट को प्राकृतिक लकड़ी का विकल्प नहीं माना जाता।
लकड़ी की नेमप्लेट किस दिशा में लगाएं?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूर्व और दक्षिण दिशा लकड़ी की नेमप्लेट के लिए शुभ मानी जाती है। इसलिए यदि आपके घर के प्रवेश द्वार की दिशा इन दोनों में से किसी दिशा से संबंधित है, तो लकड़ी की नेमप्लेट का विकल्प चुना जा सकता है।
लकड़ी की नेमप्लेट में प्राकृतिक रंग और लकड़ी की बनावट को बनाए रखना घर के प्रवेश द्वार को एक सादा और आकर्षक रूप भी देता है।
मेटल की नेमप्लेट से जुड़ी वास्तु मान्यता
अगर आपको आधुनिक डिजाइन वाली नेमप्लेट पसंद है, तो मेटल यानी धातु से बनी नेमप्लेट एक अच्छा विकल्प हो सकती है। वास्तु मान्यताओं में धातु की नेमप्लेट को धन और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है।
मेटल नेमप्लेट के लिए पीतल, तांबा, स्टील और लोहा जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें खासतौर पर पीतल की नेमप्लेट को घर के लिए शुभ माना गया है।
पीतल की नेमप्लेट पारंपरिक और आधुनिक, दोनों तरह के घरों के मुख्य द्वार पर अच्छी लग सकती है। इसके अलावा तांबे की नेमप्लेट भी अपने अलग लुक के कारण प्रवेश द्वार को आकर्षक बना सकती है।
मेटल की नेमप्लेट के लिए कौन सी दिशा बेहतर?
वास्तु के अनुसार उत्तर और पश्चिम दिशा को धातु की नेमप्लेट के लिए बेहतर माना जाता है। खासतौर पर उत्तर दिशा का संबंध कुबेर से माना गया है। इसी कारण उत्तर दिशा में पीतल की नेमप्लेट लगाना धन और समृद्धि की दृष्टि से शुभ माना जाता है।
यदि घर के मुख्य द्वार पर मेटल की नेमप्लेट लगानी हो, तो उसकी सामग्री के साथ दिशा का संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
पत्थर की नेमप्लेट किस दिशा में लगाना शुभ?
नेमप्लेट के लिए तीसरा लोकप्रिय विकल्प प्राकृतिक पत्थर है। संगमरमर और ग्रेनाइट जैसे पत्थरों से बनी नेमप्लेट मजबूत, टिकाऊ और देखने में काफी प्रभावशाली होती है।
वास्तु मान्यताओं में पत्थर का संबंध पृथ्वी तत्व से माना जाता है। पृथ्वी तत्व को मजबूती, स्थिरता और ठहराव का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पत्थर की नेमप्लेट को घर की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है।
मुख्य द्वार पर संगमरमर, ग्रेनाइट या अन्य प्राकृतिक पत्थर से बनी नेमप्लेट लगाई जा सकती है। वास्तु मान्यताओं में ऐसी नेमप्लेट को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव से भी जोड़ा जाता है।
पत्थर की नेमप्लेट के लिए दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम
वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा पत्थर की नेमप्लेट के लिए शुभ मानी जाती है।
दक्षिण-पश्चिम दिशा को विशेष रूप से स्थिरता से संबंधित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में पत्थर की नेमप्लेट लगाने से घर के मुखिया की प्रतिष्ठा, प्रभाव और स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।
वहीं उत्तर-पश्चिम दिशा भी पत्थर की नेमप्लेट के लिए उपयुक्त मानी गई है।
नेमप्लेट चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
वास्तु मान्यताओं के अनुसार नेमप्लेट का चुनाव करते समय केवल उसका डिजाइन देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। उसकी सामग्री और लगाने की दिशा को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
- लकड़ी की नेमप्लेट: पूर्व और दक्षिण दिशा के लिए शुभ मानी जाती है।
- मेटल की नेमप्लेट: उत्तर और पश्चिम दिशा में लगाना बेहतर माना जाता है।
- पीतल की नेमप्लेट: उत्तर दिशा में धन-समृद्धि के लिहाज से शुभ मानी जाती है।
- पत्थर की नेमप्लेट: दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
- लकड़ी की नेमप्लेट में सागवान, शीशम, महोगनी और आम जैसी मजबूत लकड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- केवल लकड़ी जैसी दिखने वाली प्लाइबोर्ड, एमडीएफ या प्लास्टिक की नेमप्लेट से बचने की सलाह दी जाती है।
- पत्थर की नेमप्लेट के लिए संगमरमर और ग्रेनाइट जैसे प्राकृतिक पत्थरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या नेमप्लेट घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करती है?
वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में घर का मुख्य प्रवेश द्वार ऊर्जा के आवागमन का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसी कारण दरवाजे से जुड़ी चीजों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। नेमप्लेट उसी प्रवेश क्षेत्र का हिस्सा होती है और इसके मैटेरियल तथा दिशा को लेकर भी अलग-अलग वास्तु मान्यताएं प्रचलित हैं।
हालांकि, इन बातों को वास्तु संबंधी मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए। नेमप्लेट घर की पहचान और सजावट का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसका चुनाव करते समय मजबूती, मौसम का प्रभाव, रखरखाव और घर के डिजाइन को ध्यान में रखना भी उतना ही जरूरी है।
कुल मिलाकर, यदि आप वास्तु के अनुसार नेमप्लेट लगाना चाहते हैं तो लकड़ी, मेटल और प्राकृतिक पत्थर में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं और उसके अनुरूप दिशा का ध्यान रख सकते हैं। मान्यता के अनुसार सही मैटेरियल और दिशा का संयोजन घर में सकारात्मकता, स्थिरता और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।














































