साउथ कोरिया में 18 और 19 सितंबर को भारत और मेजबान टीम के बीच डेविस कप के दूसरे क्वालीफायर के मुकाबले खेले जाएंगे। इस मुकाबले में भारत को साउथ कोरिया के खिलाफ कोर्ट पर उतरना है और दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है। दोनों में से जो टीम जीत दर्ज करेगी, वह अंतिम-8 में अपनी जगह पक्की कर लेगी। ऐसे में दोनों देशों के खिलाड़ियों पर मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने और जीत हासिल करने का दबाव रहेगा। इसी अहम मुकाबले से पहले भारतीय दल के खिलाड़ी श्रीराम बालाजी ने टीम की तैयारी और अपने लक्ष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं।
टॉप-50 में पहुंचे बालाजी: श्रीराम बालाजी डेविस कप के दूसरे राउंड से ठीक पहले डबल्स में दुनिया के टॉप-50 खिलाड़ियों में शामिल हुए हैं और उनकी रैंकिंग 49वें स्थान पर पहुंच गई है। इस उपलब्धि को लेकर उन्होंने कहा कि वह इससे वास्तव में काफी खुश हैं, लेकिन अभी उनके सामने हासिल करने के लिए बहुत कुछ बाकी है। उन्होंने माना कि डेविस कप से ठीक पहले टॉप-50 में पहुंचना उनके लिए शानदार खबर है और वह कई वर्षों से इस उपलब्धि का इंतजार कर रहे थे। हालांकि बालाजी के लिए इस समय व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा जरूरी साउथ कोरिया के खिलाफ होने वाला मुकाबला है। उन्होंने साफ कहा कि इस सप्ताहांत होने वाले मुकाबले में उनका लक्ष्य डबल्स में टीम को जीत दिलाना है।
हालात और प्रदर्शन: साउथ कोरिया की परिस्थितियों को लेकर बालाजी ने कहा कि विदेशी परिस्थितियां घरेलू मुकाबलों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होती हैं। भारतीय खिलाड़ी विपक्षी टीम के खेल को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन किसी भी चीज की गारंटी नहीं होती और इसलिए टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। यूएस ओपन 2026 में अपने प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि वह अच्छा रहा, लेकिन उसे बहुत शानदार नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह दूसरे दौर में हार गए थे। हालांकि पहले दौर में टीम छह मैच प्वाइंट से पीछे होने के बावजूद वापसी करके मुकाबला जीतने में सफल रही, जिसे उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया। पिछले कुछ महीनों में अच्छे प्रदर्शन के कारण बालाजी ने अपने आत्मविश्वास को भी बेहतर बताया है।
नेट पर खेलना पसंद: अपने डबल्स गेम स्टाइल के बारे में बालाजी ने बताया कि मौजूदा समय में खिलाड़ियों की खेलने की शैली में काफी अंतर देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि कई दक्षिण अमेरिकी खिलाड़ी पीछे से खेलना पसंद करते हैं, जबकि कई एशियाई खिलाड़ी नेट पर आकर खेलने की शैली को पसंद करते हैं। उनके अनुसार आखिरकार यह इस बात पर निर्भर करता है कि खिलाड़ी के लिए कौन सी शैली सबसे ज्यादा उपयुक्त है। बालाजी ने अपने बारे में कहा कि उन्हें सर्व करना और जितना संभव हो उतना नेट पर जाना पसंद है। वहीं लिएंडर पेस और महेश भूपति से अपनी तुलना को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों खेल के दिग्गज हैं और उन्होंने उनके आसपास भी कुछ हासिल नहीं किया है, इसलिए वह अपनी खेल शैली को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं।
साउथ कोरिया की चुनौती: बालाजी ने बताया कि साउथ कोरिया में परिस्थितियां भारतीय खिलाड़ियों के लिए कुछ अलग हैं और टीम को इसके अनुसार खुद को ढालना पड़ रहा है। उन्हें उम्मीद थी कि परिस्थितियां कुछ तेज होंगी, लेकिन गेंद थोड़ी धीमी गति से आती है और कोर्ट पर उछाल भी थोड़ा कम है। इसी को वह भारतीय टीम के लिए मुकाबले की बड़ी चुनौती मानते हैं और इसी कारण टीम कुछ दिन पहले ही वहां पहुंच गई थी। खिलाड़ियों ने मुकाबले की परिस्थितियों को समझने के लिए हर दिन अभ्यास किया है और उम्मीद है कि मैच के समय टीम पूरी तरह तैयार होगी। चोट के कारण युकी भांबरी के टीम में नहीं होने को भी बालाजी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि टीम उन्हें काफी मिस करेगी, क्योंकि वह सबसे अनुभवी डबल्स खिलाड़ियों में रहे हैं।
टीम और मानसिक मजबूती: युकी भांबरी की अनुपस्थिति में अनिरुद्ध और निक्की जैसे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास कर टीम को बेहतर संयोजन तैयार करना होगा। बालाजी ने युवा खिलाड़ी दक्षिणेश्वर सुरेश की भी तारीफ करते हुए कहा कि वह दबाव वाली परिस्थितियों को संभालने और लगातार मैच खेलने के आदी हैं तथा कॉलेज टेनिस का अनुभव उनके लिए मददगार है। उन्होंने कहा कि डेविस कप में जीत से शुरुआत करना निश्चित रूप से अच्छा संकेत होगा, लेकिन आगे की तैयारी के लिए ड्रॉ और पहले खेलने वाले खिलाड़ियों को भी देखना होगा। बालाजी के अनुसार पूरे मुकाबले में मानसिक रूप से मजबूत रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी देर के लिए भी ध्यान भटकने पर मैच हाथ से निकल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि डेविस कप में देश के लिए खेलना अलग अनुभव है, राष्ट्रगान के समय हर बार रोमांच महसूस होता है, जबकि उनके पसंदीदा खिलाड़ी रोजर फेडरर हैं और मैच के बाद वह पार्टी के बजाय अपने रूटीन, कूल डाउन, स्ट्रेचिंग और परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं।














































