मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में अपने संबोधन के दौरान उस समय को याद किया, जब इंसेफेलाइटिस का मौसम आते ही परिवारों में बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। उन्होंने कहा कि सात-आठ साल पहले इसी मौसम में जागरूक मां-बाप परेशान रहते थे और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर की जो पहचान उस समय बनी हुई थी, वैसी ही परिस्थितियां पूरे उत्तर प्रदेश में भी थीं। उनके मुताबिक आज प्रदेश उस पुराने दौर से बाहर निकल चुका है और गोरखपुर के साथ पूरे उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। उन्होंने इसे नए गोरखपुर, नए उत्तर प्रदेश और नए भारत के रूप में सामने रखा।
अस्पतालों की पुरानी स्थिति: योगी आदित्यनाथ ने पुराने स्वास्थ्य ढांचे की स्थिति बताते हुए कहा कि उस समय स्वास्थ्य सुविधा का एकमात्र प्रमुख केंद्र था और वहां एक बेड पर चार-चार मरीजों को लेटाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि मरीजों के लिए तीसरी मंजिल पर भी ऐसी व्यवस्था थी, जहां पंखा और शौचालय तक उपलब्ध नहीं थे। अन्य जरूरी सुविधाओं का भी अभाव था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय मरीजों और उनके परिवारों को किस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने इसी पुराने स्वास्थ्य संकट की तुलना आज गोरखपुर में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं से की।
स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव: मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज की मौजूदा स्थिति को स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आज यह संस्थान सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के साथ इंसेफेलाइटिस समेत अलग-अलग बीमारियों के उपचार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि करीब नौ साल पहले जिस मेडिकल कॉलेज की स्थिति खुद बीमार और कमजोर थी, वह अब एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित होने में सफल हुआ है। उनके मुताबिक गोरखपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं का यह विस्तार पुराने दौर की तुलना में बड़ा बदलाव दिखाता है। इसी बदलाव को उन्होंने नए गोरखपुर की पहचान से जोड़ा।
मेडिकल कॉलेज और एम्स का विस्तार: योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश की पहचान पर माफिया का बदनुमा दाग था और हर जिले में दुर्दांत माफिया नेतृत्व करता था, जिससे पहचान का संकट खड़ा होता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब माफिया समाप्त हुए और प्रदेश को उनसे मुक्ति मिली है। स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि 75 जिलों वाले उत्तर प्रदेश में अब 85 मेडिकल कॉलेज हैं। इसके साथ ही दो एम्स भी प्रदेश में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
बचपन और बीमारी का पुराना संकट: मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के कारण बच्चों को तड़पते और असमय मौत का शिकार होते देखना बेहद कठिन था। उन्होंने इसे समाज और देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि जिस समाज का बचपन समय से पहले काल-कवलित हो जाए, उसके भविष्य के सुंदर और समृद्ध होने की कल्पना कठिन होती है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि करीब नौ साल पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में यही स्थिति देखने को मिलती थी। अब उन्होंने दावा किया कि इंसेफेलाइटिस का संकट समाप्त हो गया है और इसकी तुलना उन्होंने माफिया तथा मच्छर के समाप्त होने से की। स्वास्थ्य व्यवस्था में आए बदलाव को उन्होंने इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बताया।
सुरक्षा और डॉक्टरों की भूमिका: मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में पुराने समय के अपराध और डॉक्टरों से जुड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टरों के अपहरण, वसूली, धमकी भरे फोन और चैंबर में घुसकर मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं और इन मुद्दों को लेकर उन्हें लोगों के साथ सड़कों पर आंदोलन तक करना पड़ता था। उनके अनुसार अब गोरखपुर सुरक्षित है और पूरे उत्तर प्रदेश में डॉक्टर, व्यापारी तथा नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर के डॉक्टरों की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि उनमें पोटेंशियल है। इससे पहले वाराणसी की जनसभा में मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा था कि पहले ये केंद्र जर्जर थे, लेकिन अब उनकी स्थिति देखने लायक हो गई है।














































