अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लंबे सैन्य अभियान के दौरान आठ नौसैनिकों ने आत्महत्या करने की कोशिश की। अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड को भेजे पत्र में इस घटना की पुष्टि की है। यह खुलासा युद्धपोत की लगभग नौ महीने लंबी तैनाती के समाप्त होने और उसके अमेरिका लौटने के समय सामने आया है। युद्धपोत पर तैनात सैनिकों की ड्यूटी लगातार बढ़ाई जाती रही थी और इसी वजह से उनके परिवारों ने उनकी मानसिक स्थिति तथा रहने की परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई थी।
मिशन बार-बार बढ़ाया गया: यूएसएस अब्राहम लिंकन पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया से अपने अभियान के लिए रवाना हुआ था। शुरुआत में इसकी वापसी मई में होनी थी, लेकिन मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान से जुड़े अभियानों के कारण इसकी तैनाती को कई बार आगे बढ़ाया गया। परिणामस्वरूप युद्धपोत पर तैनात सैनिकों को अपेक्षा से कहीं ज्यादा समय तक अपने मिशन पर रहना पड़ा। लंबे समय तक घर से दूर रहने और लगातार सैन्य जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति ने सैनिकों के परिवारों में चिंता पैदा की। परिवारों ने दावा किया कि लंबे मिशन का जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा था।
पानी और भोजन की समस्या: युद्धपोत पर लंबे समय तक चलने वाले अभियान के दौरान बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं। रिपोर्टों में साफ पीने के पानी की कमी, पाइपलाइन व्यवस्था में खराबी और ताजा भोजन की उपलब्धता कम होने की बात कही गई। ऐसे समय में जब सैनिक पहले से लंबे सैन्य अभियान में तैनात थे, इन समस्याओं ने उनकी परिस्थितियों को और कठिन बना दिया। हालांकि नौसेना ने इसे किसी बड़े संकट के रूप में स्वीकार नहीं किया। नौसेना का कहना है कि पाइपलाइन में कुछ समय के लिए खराबी आई थी और भोजन के विकल्पों में भी कुछ कटौती हुई थी, लेकिन फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए मौजूद थे विशेषज्ञ: अमेरिकी नौसेना ने बताया कि युद्धपोत पर सैनिकों को मानसिक और भावनात्मक सहायता देने के लिए व्यवस्था की गई थी। वहां पांच धार्मिक सलाहकार और कई मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद थे। नौसेना ने किसी बड़े मानसिक स्वास्थ्य संकट से इनकार करते हुए इन सहायता व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। इसके बावजूद आठ नौसैनिकों द्वारा आत्महत्या की कोशिश की पुष्टि ने लंबे सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। परिवारों की शिकायतों और सामने आई परिस्थितियों के बीच सैनिकों की भलाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कर्स्टन गिलिब्रैंड ने उठाए सवाल: अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने इस मामले को लेकर ट्रंप सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं को पहले फर्जी खबर बताकर खारिज किया जा रहा था, वे वास्तव में नौसैनिकों के लिए गंभीर थीं। उन्होंने सैनिकों के साथ इस तरह के व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उनके बयान से यह मुद्दा और प्रमुख हो गया है कि लंबे सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों को किस तरह की सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा उनकी शिकायतों को किस स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
अब अमेरिका लौट रहा युद्धपोत: करीब नौ महीने के लंबे और थकाऊ अभियान के बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन अब अमेरिका लौट रहा है। वापसी के दौरान युद्धपोत पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को थाईलैंड में कुछ समय रुकने और आराम करने का मौका मिला। यह विराम लंबे अभियान के बाद सैनिकों के लिए राहत का अवसर रहा। युद्धपोत की वापसी के साथ ही इस लंबे मिशन के दौरान सामने आई समस्याओं और सैनिकों की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। आठ नौसैनिकों द्वारा आत्महत्या की कोशिश की पुष्टि, लंबे समय तक बढ़ाई गई तैनाती और जहाज पर सुविधाओं को लेकर सामने आई शिकायतों ने इस अभियान से जुड़े मानवीय पहलू को प्रमुख बना दिया है।














































