अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नफरत फैलाने वाली सामग्री को लेकर 105 सांसदों ने संघीय जांच एजेंसी के निदेशक काश पटेल से जवाब मांगा है। सांसदों ने 20 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा कि नस्लीय और धार्मिक पूर्वाग्रह से जुड़ी धमकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। पत्र का नेतृत्व कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने किया और इस पर चार सीनेटरों समेत कांग्रेस के 105 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। सांसदों ने विशेष रूप से शिकागो के पास इलिनोइस के ऑरोरा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 19 वर्षीय युवक द्वारा कथित गोलीबारी की कोशिश का उल्लेख किया। बंदूक जाम होने के कारण आरोपी अपनी कथित योजना को अंजाम नहीं दे सका। सांसदों ने इस मामले की नफरत से प्रेरित अपराध के रूप में जांच करने और यह पता लगाने की मांग की कि क्या ऑनलाइन धमकियों या अन्य व्यक्तियों ने कथित साजिश को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी।
एक रिपोर्ट में पांच लाख 42 हजार से अधिक नफरत भरी पोस्ट का उल्लेख: सांसदों ने सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच सामाजिक माध्यम एक्स पर दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली पांच लाख 42 हजार से अधिक पोस्ट की पहचान की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जनवरी 2024 से जून 2026 तक ऐसी पोस्ट की मासिक संख्या में करीब 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन आंकड़ों को सांसदों ने ऑनलाइन नफरत के बढ़ते दायरे को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इंटरनेट पर समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाली सामग्री को केवल ऑनलाइन बहस मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसी गतिविधियों के साथ धमकियों और वास्तविक दुनिया में हिंसा की आशंका भी जुड़ सकती है। हालांकि, पत्र में उद्धृत आंकड़े पोस्ट की पहचान और उनकी संख्या से संबंधित हैं; इनके आधार पर किसी एक पोस्ट को मंदिर पर हमले की कथित साजिश से सीधे जोड़ने का निष्कर्ष नहीं दिया गया है। सांसद चाहते हैं कि संघीय जांच एजेंसी ऑनलाइन गतिविधियों और मंदिर पर हमले के मामले के बीच संभावित संबंधों की जांच करे।
सर्वेक्षण में भारतीय-अमेरिकियों के अनुभव भी आए सामने: कार्नेगी एंडोमेंट के एक सर्वेक्षण में भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं के अनुभवों को लेकर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए। सर्वेक्षण के अनुसार, 48 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि 2025 की शुरुआत के बाद से उन्होंने अपने समुदाय को निशाना बनाने वाली नस्लवादी पोस्ट का अक्सर या कुछ हद तक अक्सर सामना किया। वहीं, हर चार में से एक उत्तरदाता ने कहा कि उसे अपशब्द कहे गए थे। इन नतीजों का उल्लेख करते हुए सांसदों ने समुदाय के खिलाफ नफरत और भेदभाव से निपटने की जरूरत पर जोर दिया। सर्वेक्षण के आंकड़े यह बताते हैं कि कई भारतीय-अमेरिकी लोगों ने ऑनलाइन नस्लवादी सामग्री या व्यक्तिगत अपमान का अनुभव किया है। सांसदों की चिंता केवल ऐसी सामग्री की मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि प्रशासन और संघीय एजेंसियां इन घटनाओं को रोकने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कर रही हैं। इसी कारण उन्होंने ऑनलाइन धमकियों और संभावित हिंसक साजिशों की जांच से जुड़े कदमों की जानकारी मांगी है।
हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश बनी जांच का अहम आधार: ऑनलाइन नफरत को लेकर उठाए गए सवालों के बीच इलिनोइस के ऑरोरा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में गोलीबारी की कोशिश का मामला सांसदों की मांग का प्रमुख आधार बना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 19 वर्षीय युवक ने मंदिर में गोलीबारी करने की कथित कोशिश की थी, लेकिन उसकी बंदूक जाम हो गई और वह अपनी योजना पूरी नहीं कर सका। इस घटना के बाद सांसदों ने आग्रह किया कि जांच में संभावित नस्लीय, जातीय और धार्मिक पूर्वाग्रह को शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों में ऐसे संकेत मिले हैं, जो कथित साजिश को समझने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही यह जानने की मांग की गई कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने हमले को बढ़ावा दिया था और क्या पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। सांसदों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं की जांच में संभावित मकसद और संबंधित संपर्कों की पड़ताल महत्वपूर्ण है, ताकि खतरे की प्रकृति को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
सरकारी विभागों की पोस्ट पर भी उठे सवाल: सांसदों ने अपने पत्र में ट्रंप प्रशासन से जुड़े बयानों और कुछ सरकारी विभागों की सामाजिक माध्यम पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने गृह सुरक्षा विभाग की एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ उसे सड़कों से हटने और गाड़ी चलाना न आने जैसी टिप्पणी की गई थी। पत्र में शिक्षा विभाग की एक अन्य पोस्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें महाविद्यालयीन फुटबॉल को फिर महान बनाने का नारा था। यह पोस्ट उस समय आई थी, जब टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता ने टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैच में दक्षिण एशियाई लोगों की मौजूदगी पर शिकायत की थी। सांसदों का कहना है कि प्रशासन के संदेशों ने नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियों को कम करने के बजाय उन्हें बढ़ावा देने की चिंता पैदा की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक संस्थानों के संदेशों का असर समुदायों के प्रति सामाजिक रवैये पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे संदेशों और नफरत से जुड़ी घटनाओं के व्यापक संदर्भ को गंभीरता से देखने की जरूरत है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों से कार्रवाई और सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब की मांग: राजा कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में सांसदों ने संघीय जांच एजेंसी से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें यह शामिल है कि क्या ऑरोरा मंदिर मामले में नस्लीय, जातीय और धार्मिक पूर्वाग्रह की जांच की जा रही है, क्या किसी ऑनलाइन मंच या अन्य व्यक्ति ने कथित साजिश को बढ़ावा दिया और पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। सांसदों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन धमकियों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है। पत्र में नस्लीय नफरत, धार्मिक पूर्वाग्रह और बड़े पैमाने पर हिंसा की तैयारी के संभावित मेल को व्यापक संघीय प्रतिक्रिया की जरूरत से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में उद्धृत ऑनलाइन पोस्ट के आंकड़े और सर्वेक्षण के निष्कर्ष इस चिंता की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हैं, जबकि मंदिर पर हमले की कथित साजिश ने सुरक्षा से जुड़े सवालों को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सांसदों की मांग है कि जांच एजेंसी इन मुद्दों पर जवाब दे और बताए कि समुदाय तथा पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।














































