अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं। इसी सिलसिले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी मंगलवार को ईरान पहुंचे। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, फरवरी में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद आसिम मुनीर की यह पांचवीं ईरान यात्रा है। इस दौरे में उनका उद्देश्य ईरानी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और अमेरिका के साथ तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा करना है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी मुनीर के साथ बातचीत की। हालांकि, इस कूटनीतिक पहल के बीच ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट कर दिया कि उनका देश एक ग्राम यूरेनियम भी बाहर नहीं भेजेगा। इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता के सामने परमाणु सामग्री का मुद्दा बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है।
ईरान ने यूरेनियम देश से बाहर भेजने से किया इनकार: ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान अपनी परमाणु सामग्री का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। ईरान के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, उन्होंने मंगलवार को हुई बातचीत में यह बात स्पष्ट रूप से रखी। रेजाई ने कहा कि परमाणु सामग्री ईरानी जनता की बड़ी संपत्ति और राष्ट्रीय धरोहर है, जिसका इस्तेमाल देश के भीतर ही होना चाहिए। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर साझा संदेश में भी अपने इसी रुख को दोहराया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान बातचीत का रास्ता तैयार करने की कोशिश कर रहा है। ईरान की ओर से दिया गया यह संदेश संकेत देता है कि परमाणु सामग्री को लेकर उसकी स्थिति फिलहाल सख्त बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी में इस मुद्दे पर किसी समझौते या नीति में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
मोहसिन रेजाई ने अमेरिका से बातचीत को शर्तों से जोड़ा: ईरान ने केवल यूरेनियम बाहर भेजने से इनकार ही नहीं किया, बल्कि अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। मोहसिन रेजाई के अनुसार, जब तक अमेरिका ईरान की मांगों को पूरा करने के लिए कदम नहीं उठाता, तब तक उसके साथ बातचीत आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा। उनका यह बयान पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बीच आया है और इससे स्पष्ट होता है कि तेहरान बातचीत की बहाली को अपनी शर्तों से जोड़कर देख रहा है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में रेजाई ने परमाणु सामग्री को राष्ट्रीय संपत्ति बताया और इसे देश के भीतर रखने पर जोर दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ईरान की सभी मांगों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इस कारण यह स्पष्ट नहीं है कि वार्ता बहाली के लिए दोनों पक्षों के बीच किन-किन मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। फिलहाल ईरान का संदेश यही है कि वह अपनी शर्तों और परमाणु सामग्री से जुड़े रुख में बदलाव किए बिना आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ भी हुई चर्चा: आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ बातचीत भी हुई। इस दौरे में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी उनके साथ मौजूद रहे। ईरानी अधिकारियों और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय परिस्थितियों और अमेरिका के साथ तनाव घटाने के कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा किए जाने की जानकारी दी गई है। पाकिस्तान की कोशिश है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू हो और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई कूटनीतिक रास्ता निकले। लेकिन ईरान की ओर से यूरेनियम देश से बाहर भेजने से इनकार और अमेरिकी मांगों पर शर्तें रखे जाने के कारण इस पहल का परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी में इस यात्रा के बाद किसी समझौते या वार्ता की औपचारिक बहाली की घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इस दौरे को कूटनीतिक संपर्क और बातचीत के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद पांचवीं बार पहुंचे ईरान: ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद आसिम मुनीर पांचवीं बार ईरान पहुंचे हैं। उनकी लगातार यात्राएं पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता के प्रयासों को दर्शाती हैं। इस बार भी चर्चा का केंद्र दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और अमेरिका के साथ ईरान के तनाव को कम करने की संभावनाएं हैं। पाकिस्तान का प्रयास है कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए दोनों पक्षों के बीच संपर्क कायम रहे। हालांकि, ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि देश अपनी परमाणु सामग्री बाहर नहीं भेजेगा और अमेरिका से बातचीत के लिए उसकी मांगें पूरी होना जरूरी है। इससे संकेत मिलता है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में केवल बातचीत शुरू कराना ही नहीं, बल्कि परमाणु कार्यक्रम और शर्तों से जुड़े मतभेदों को दूर करना भी महत्वपूर्ण होगा।
मध्यस्थता की सफलता के लिए परमाणु विवाद पर सहमति जरूरी: आसिम मुनीर की ताजा यात्रा और ईरानी नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत के बावजूद अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव कम होने की दिशा में किसी ठोस समझौते की जानकारी सामने नहीं आई है। ईरान ने परमाणु सामग्री को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए उसे देश से बाहर भेजने से इनकार किया है। साथ ही उसने अमेरिका के साथ बातचीत को अपनी मांगें पूरी किए जाने से जोड़ दिया है। पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर होने और वार्ता बहाल होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से संवाद आगे बढ़ता है या परमाणु सामग्री और शर्तों से जुड़े मुद्दे बातचीत में बाधा बने रहते हैं।














































