12 अक्टूबर 2026, सोमवार को शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन है। इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी, जो रात 10 बजकर 14 मिनट तक प्रभावी है। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। सोमवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन रात 8 बजकर 32 मिनट तक विष्कुंभ योग और रात 11 बजकर 53 मिनट तक स्वाती नक्षत्र रहेगा। इसके बाद प्रीति योग और विशाखा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। ग्रहों की स्थिति के अनुसार, शाम 6 बजकर 49 मिनट पर बुध विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं सोमवार का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, चौघड़िया और विभिन्न राज्यों में राहुकाल का समय।
मुख्य पंचांग विवरण
वार: सोमवार
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
संक्रांति: नहीं
मास: आश्विन मास
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वितीया रात 10:14 बजे तक, इसके बाद तृतीया
नक्षत्र: स्वाती रात 11:53 बजे तक, इसके बाद विशाखा
योग: विष्कुंभ रात 8:32 बजे तक, इसके बाद प्रीति
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: तुला
विशेष: शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन
बुध का नक्षत्र परिवर्तन: शाम 6:49 बजे विशाखा नक्षत्र में प्रवेश
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 बजे से 5:30 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:05 बजे से 6:19 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:04 बजे से 2:50 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:56 बजे से 6:21 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 5:56 बजे से 7:10 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 3:55 बजे से शाम 5:34 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:43 बजे से अगले दिन रात 12:33 बजे तक
द्विपुष्कर योग: रात 9:30 बजे से 10:32 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली): सुबह 7:46 बजे से 9:13 बजे तक
यमगण्ड काल: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 1:33 बजे से 2:59 बजे तक
दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:30 बजे से 1:16 बजे तक तथा दोपहर 2:47 बजे से 3:33 बजे तक
वर्ज्य: सुबह 5:54 बजे से 7:37 बजे तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्योदय: सुबह 6:20 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:55 बजे
चन्द्रोदय: दिए गए विवरण में सुबह 7:51 बजे का
चन्द्रास्त: दिए गए विवरण में शाम 6:36 बजे का
दिन की चौघड़िया
अमृत (शुभ): सुबह 6:20 बजे से 7:46 बजे तक
काल (अशुभ): सुबह 7:46 बजे से 9:13 बजे तक
शुभ (शुभ): सुबह 9:13 बजे से 10:40 बजे तक
रोग (अशुभ): सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): दोपहर 12:07 बजे से 1:34 बजे तक
चर (सामान्य): दोपहर 1:34 बजे से 3:01 बजे तक
लाभ (शुभ): दोपहर 3:01 बजे से शाम 4:28 बजे तक
अमृत (शुभ): शाम 4:28 बजे से 5:55 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
चल (सामान्य): शाम 5:55 बजे से 7:28 बजे तक
रोग (अशुभ): शाम 7:28 बजे से रात 9:02 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): रात 9:02 बजे से 10:35 बजे तक
शुभ (शुभ): रात 10:35 बजे से अगले दिन रात 12:09 बजे तक
अमृत (शुभ): रात 12:09 बजे से 1:42 बजे तक, 13 अक्टूबर
चर (सामान्य): रात 1:42 बजे से 3:16 बजे तक, 13 अक्टूबर
रोग (अशुभ): रात 3:16 बजे से 4:49 बजे तक, 13 अक्टूबर
काल (अशुभ): सुबह 4:49 बजे से 6:21 बजे तक, 13 अक्टूबर
राज्यवार राहुकाल
स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार राहुकाल के समय में अंतर हो सकता है। नीचे दिए गए समय उपलब्ध विवरण के आधार पर प्रस्तुत हैं। उत्तर प्रदेश को प्राथमिकता देते हुए सूची तैयार की गई है।
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 7:32–8:59 बजे |
| 2 | दिल्ली | नई दिल्ली | सुबह 7:46–9:13 बजे |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | सुबह 7:56–9:22 बजे |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 7:33–9:02 बजे |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 6:42–8:09 बजे |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 6:51–8:18 बजे |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 7:13–8:40 बजे |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 7:31–8:58 बजे |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 7:54–9:23 बजे |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | सुबह 8:06–9:34 बजे |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 7:49–9:16 बजे |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 7:47–9:14 बजे |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 7:16–8:43 बजे |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 7:44–9:13 बजे |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 7:47–9:17 बजे |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 7:48–9:16 बजे |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 8:00–9:29 बजे |
| 18 | मणिपुर | इम्फाल | सुबह 6:42–8:09 बजे |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 6:52–8:19 बजे |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 6:45–8:12 बजे |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 6:41–8:08 बजे |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 7:18–8:46 बजे |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 7:50–9:17 बजे |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 7:56–9:23 बजे |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 7:01–8:28 बजे |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 7:34–9:03 बजे |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 7:39–9:07 बजे |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 6:49–8:16 बजे |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 7:44–9:11 बजे |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 7:04–8:32 बजे |
नवरात्र के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, साधना और दृढ़ संकल्प की प्रतीक मानी जाती हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करने से साधक को कठिन परिस्थितियों का सामना करने और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। इस दिन भक्त मां के मंत्र का जाप करके उनसे साहस, धैर्य और सफलता की प्रार्थना कर सकते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी का प्रमुख मंत्र है—‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।’ श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित मंत्र जाप से मन एकाग्र होता है और साधना के प्रति समर्पण बढ़ता है।












































