गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 96 लंबित चालानों वाले एक स्कूटर को जब्त कर लिया। पुलिस जांच के दौरान स्कूटर पर कुल 10 लाख रुपये का भारी-भरकम ट्रैफिक जुर्माना बकाया पाया गया। स्कूटर चालक पर ज्यादातर चालान हेलमेट न पहनने, बीमा न कराने और पीयूसी नियम तोड़ने पर कटे थे। यातायात पुलिस द्वारा लगातार नियम तोड़ने वाले ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। चालान की राशि जमा न करने और नियमों की अनदेखी करने पर पुलिस ने वाहन को ज़ब्त कर लिया।
तिब्बती अधिकारी पर चीन की कार्रवाई: दूसरी ओर चीन ने पूर्वी तिब्बत के वरिष्ठ अधिकारी ड्रुक बुम ग्याल को पद से हटा दिया। ग्याल ने तिब्बती बौद्ध धार्मिक परंपराओं पर चीन द्वारा लगाए नए प्रतिबंधों को लागू करने से मना किया था। समाचार पोर्टल फयुल के मुताबिक ग्याल ड्रक्कार काउंटी में कम्युनिस्ट पार्टी सचिव और काउंटी प्रमुख थे। चीन ने ड्रक्कार, सेरचेन, त्रिका, मंगरा और बा काउंटी के अफसरों को धार्मिक प्रतिबंध लागू करने को कहा था। इन आदेशों में न्युंगने नामक पारंपरिक बौद्ध उपवास के सार्वजनिक आयोजन पर तुरंत रोक लगाना शामिल था।
आदेशों का विरोध और ग्याल का सुझाव: चीन के निर्देशों में धार्मिक गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रार्थना झंडों को हटाने के आदेश थे। इसके अलावा प्रत्येक घर के बाहर चीन का राष्ट्रीय ध्वज अनिवार्य रूप से फहराने का निर्देश दिया गया था। ग्याल का मानना था कि अचानक ऐसे फैसले थोपने से आम जनता के बीच गहरा असंतोष फैल सकता है। इसलिए उन्होंने चीनी प्रशासन को सलाह दी थी कि इन सभी कदमों को धीरे-धीरे लागू किया जाना चाहिए। उनके इस सुझाव को चीन की सरकार ने अनुशासनहीनता माना और उन्हें तुरंत कम महत्व वाले पद पर भेज दिया।
स्थानीय समुदाय में ग्याल की सराहना: पद से हटाए जाने के बावजूद स्थानीय तिब्बती नागरिकों के बीच ग्याल का सम्मान काफी बढ़ गया। लोगों का मानना है कि उन्होंने तिब्बती धार्मिक मान्यताओं को तत्काल सरकारी हस्तक्षेप से बचाने का प्रयास किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हान चीनी अधिकारी श्योंग युआनलाई के आने के बाद दमन का यह अभियान तेज़ हुआ। त्सोल्हो प्रीफेक्चर के कम्युनिस्ट पार्टी सचिव बनने के बाद श्योंग युआनलाई ने धार्मिक गतिविधियों पर शिकंजा कसा। इसके बाद तिब्बती संस्कृति और परंपराओं को निशाना बनाने की कार्रवाइयों में काफी तेजी देखी गई।
तिब्बत में सांस्कृतिक दमन और दलाई लामा: चीन के इस अभियान के तहत बौद्ध मंत्र लिखे मणि पत्थरों को तोड़ा और बैनरों को जलाया गया। सरकारी नौकरियों में तिब्बतियों की संख्या अधिक बताकर कई तिब्बती कर्मचारियों को पदों से हटा दिया गया। इन लगातार बढ़ती ज्यादतियों के कारण तिब्बती समुदाय पर गहरा मानसिक और सामाजिक दबाव बन रहा है। इन्हीं दमनकारी नीतियों के कारण तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को भी अपने समय में भारत में शरण लेनी पड़ी थी। यह पूरी दंडात्मक व्यवस्था चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कठोर शासन और राजनीतिक अभियानों से जुड़ी हुई है।
ग्याल की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव: ड्रुक बुम ग्याल का जन्म वर्ष 1973 में तिब्बत की मंगरा काउंटी में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा छिंगहाई यूनिवर्सिटी से पूरी की और उसके बाद प्रशासनिक सेवा में लंबा समय बिताया। उन्होंने अपने करियर में कई वरिष्ठ जिला स्तरीय प्रशासनिक पदों पर मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दी थीं। बाद में उन्हें ड्रक्कार काउंटी का कम्युनिस्ट पार्टी सचिव और काउंटी प्रमुख नियुक्त किया गया था। सरकार के प्रति पूर्ण वैचारिक वफादारी न दिखाने पर अब उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।


























































