टमाटर की खासियत और भारतीय रसोई में बढ़ती लोकप्रियता टमाटर आज दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सब्जियों में शामिल है। इसका पुराना वानस्पतिक नाम लाइकोपोर्सिकान एस्कुलेंटम मिल बताया जाता है, जबकि वर्तमान में इसे सोलेनम लाइकोपोर्सिकान के नाम से जाना जाता है। स्वाद और रंग के कारण टमाटर भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसका इस्तेमाल सब्जियों के अलावा सलाद, चटनी, सूप, सॉस और कई दूसरे व्यंजनों में किया जाता है। टमाटर का इतिहास भी काफी पुराना है। माना जाता है कि 15वीं सदी में अमेरिका के रोलको द्वीप पर पहली बार इसे देखा गया था और इसकी खोज का श्रेय सर वाल्टर रेले को दिया जाता है। शुरुआती समय में लोगों को यह जहरीला फल लगता था, इसलिए इसे खाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता था। यूरोप में भी लंबे समय तक इसे बागवानी और सजावट के लिए उगाया गया। कुछ स्थानों पर इसे ‘लव एपल’ कहा गया, जबकि अमेरिका में ‘टोमेटो’ नाम प्रचलित हुआ। भारत में इसके पहुंचने का श्रेय मैक्सिकोवासियों को दिया जाता है। यहां शुरुआत में इसे ‘विलायती बैंगन’ कहा गया और कुछ लोग इसके गुणों से अनजान होने के कारण इसे ‘अनजान फल’ भी कहते थे। समय के साथ इसके पोषण और उपयोगिता की जानकारी बढ़ी और आज यही टमाटर भारतीय रसोई की सबसे आम और लोकप्रिय खाद्य सामग्री में शामिल है।
टमाटर में पाए जाने वाले पोषक और चिकित्सीय गुण टमाटर में कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन सी और विटामिन ए सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका खट्टा स्वाद मुख्य रूप से साइट्रिक एसिड और मैलिक एसिड की मौजूदगी के कारण होता है। यही कारण है कि टमाटर को पाचन के लिए उपयोगी और भूख बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में इसे पाचक, शक्तिवर्द्धक और रुचिवर्द्धक बताया गया है। नियमित और संतुलित मात्रा में टमाटर खाने से कब्ज, पाचन संबंधी परेशानी और पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं में लाभ मिलने की बात कही जाती है। इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। टमाटर में लौह तत्व भी पाया जाता है और इसमें कैल्शियम, गंधक तथा अन्य पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। कम कैलोरी और अपेक्षाकृत कम कार्बोहाइड्रेट के कारण इसे वजन नियंत्रित करने वाले आहार में भी शामिल किया जाता है। टमाटर का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर रखने में भी सहायक माना जाता है। हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।
वजन घटाने से लेकर पाचन और शरीर की कार्यक्षमता तक फायदा टमाटर को वजन प्रबंधन के लिए उपयोगी खाद्य पदार्थ माना जाता है। एक मध्यम आकार के टमाटर में लगभग 12 कैलोरी होने की बात कही जाती है, जबकि इसमें फाइबर भी पाया जाता है। यही वजह है कि कम कैलोरी वाले आहार में इसे सलाद या अन्य व्यंजनों के साथ शामिल किया जा सकता है। टमाटर पाचन शक्ति को बेहतर रखने, पेट साफ रखने और गैस जैसी समस्या में मददगार माना जाता है। इसके नियमित सेवन को जिगर के बेहतर कामकाज से भी जोड़ा जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में खांसी, बलगम और श्वास नली से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी टमाटर के सेवन का उल्लेख मिलता है। टमाटर को शरीर के छोटे-मोटे विकारों से बचाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने वाला खाद्य पदार्थ भी माना जाता है। सलाद के रूप में टमाटर खाना खास तौर पर लोकप्रिय है, जबकि इसका सूप और चटनी भी आसानी से भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। टमाटर में प्रोटीन, विटामिन और वसा के साथ कई दूसरे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं और इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
लाइकोपीन और कैंसर से बचाव को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन टमाटर के स्वास्थ्य लाभों में लाइकोपीन को विशेष महत्व दिया जाता है। यही प्राकृतिक तत्व पके टमाटर को लाल रंग प्रदान करता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में लाइकोपीन को प्रोस्टेट कैंसर सहित कुछ कैंसर के जोखिम से जुड़े पहलुओं पर जांचा गया है। एक अध्ययन में टमाटर में मौजूद लाइकोपीन के प्रभावों को प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं के संदर्भ में देखा गया था। कुछ शोधों में नियमित रूप से टमाटर खाने और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम के बीच संबंध भी पाया गया है। एक अध्ययन में सप्ताह में 10 से अधिक हिस्से टमाटर खाने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम 18 प्रतिशत कम पाए जाने का उल्लेख किया गया। इस अध्ययन में 50 से 69 वर्ष की उम्र के प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित 1,806 लोगों की खुराक और जीवनशैली की तुलना 12,005 कैंसर-मुक्त लोगों से की गई थी। शोध में सेलेनियम, कैल्शियम और लाइकोपीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को भी आहार संबंधी विश्लेषण में शामिल किया गया। टमाटर, टमाटर का जूस और पकाए हुए बीन्स को उपयोगी खाद्य पदार्थों में शामिल किया गया। टमाटर में मौजूद बीटा-कैरोटिन और लाइकोपीन त्वचा, बाल, हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से जुड़े हैं। लाइकोपीन को त्वचा पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से बचाव में भी उपयोगी माना जाता है। पके लाल टमाटर में लाइकोपीन और बीटा-कैरोटिन की मात्रा अधिक होने के कारण इन्हें हरे टमाटर की तुलना में अधिक लाभकारी माना जाता है।
टमाटर के चिकित्सीय उपयोग और पारंपरिक घरेलू नुस्खे टमाटर का इस्तेमाल केवल भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई पारंपरिक घरेलू नुस्खों में भी किया जाता रहा है। बच्चों में सूखा रोग की स्थिति में आधा गिलास टमाटर का रस देने, बच्चों के विकास के लिए दो-तीन पके टमाटर नियमित रूप से खिलाने और वजन घटाने के लिए सुबह-शाम टमाटर का रस लेने का उल्लेख मिलता है। गठिया में एक गिलास टमाटर के रस में सोंठ और अजवायन का चूर्ण मिलाकर लेने की पारंपरिक विधि भी बताई जाती है। गर्भावस्था के दौरान सुबह टमाटर का रस लेने, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं में टमाटर को भोजन में शामिल करने की बात कही गई है। पेट में कीड़े होने पर खाली पेट टमाटर में काली मिर्च लगाकर खाने का घरेलू उपाय बताया जाता है। भोजन से पहले पके टमाटर में काली मिर्च, सेंधा नमक और हरा धनिया मिलाकर खाने को भूख और पाचन के लिए उपयोगी माना गया है। चेहरे की चमक के लिए टमाटर के गूदे में कच्चा दूध और नींबू का रस मिलाकर लगाने का घरेलू नुस्खा भी प्रचलित है। आंखों और पेशाब संबंधी समस्याओं, पुरानी कब्ज, त्वचा संबंधी परेशानी और पाचन शक्ति के लिए भी टमाटर के नियमित सेवन को लाभकारी माना गया है। साइट्रिक और मैलिक एसिड की मौजूदगी के कारण इसे अम्लता से जुड़ी परेशानी में भी उपयोगी माना जाता है।
डायबिटीज, लीवर, किडनी और गठिया में टमाटर का उपयोग टमाटर में कार्बोहाइड्रेट कम होने और कैलोरी अपेक्षाकृत कम होने के कारण इसे संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है। मधुमेह से जुड़े खानपान में टमाटर को उपयोगी खाद्य पदार्थ माना जाता है और खीरे के साथ इसका सेवन करने का भी उल्लेख मिलता है। आंखों और पेशाब संबंधी समस्याओं में भी इसके सेवन को लाभकारी बताया गया है। लीवर और किडनी की कार्यक्षमता के लिए टमाटर का सूप लेने की बात कही जाती है। गठिया की स्थिति में टमाटर के रस के साथ सोंठ और अजवायन का पारंपरिक प्रयोग भी बताया गया है। पेट में कीड़ों की समस्या के लिए टमाटर में काली मिर्च या हींग का उपयोग करने जैसे घरेलू उपाय भी प्रचलित हैं। टमाटर भूख बढ़ाने और पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। त्वचा के लिए भी इसमें मौजूद लाइकोपीन और बीटा-कैरोटिन महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन पोषक तत्वों के कारण टमाटर को संतुलित आहार में शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी हो सकता है। हालांकि केवल टमाटर के सेवन से किसी बीमारी का उपचार होने का दावा नहीं किया जा सकता।
लाल टमाटर क्यों माना जाता है खास और सेवन में क्या रखें ध्यान पके लाल टमाटर में लाइकोपीन और बीटा-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। टमाटर को पकाकर या थोड़ी मात्रा में तेल के साथ इस्तेमाल करने पर लाइकोपीन के उपयोग को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है और पकाने से इसके सभी पोषक तत्व खत्म नहीं हो जाते। इसमें पोटैशियम, नियासिन, विटामिन बी6 और फोलेट जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर और हृदय के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। टमाटर का इस्तेमाल सलाद, सूप, सब्जी, चटनी या अन्य संतुलित भोजन के रूप में किया जा सकता है। हालांकि अत्यधिक मात्रा में किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन नुकसानदेह हो सकता है। कुछ लोगों में टमाटर से एसिडिटी या अन्य व्यक्तिगत परेशानी हो सकती है, इसलिए शरीर की स्थिति के अनुसार मात्रा तय करना जरूरी है। जरूरी चिकित्सकीय सलाह: टमाटर में कई पोषक और संभावित स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा या निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए। कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, किडनी, लीवर, गठिया, पेट या किसी अन्य बड़ी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति टमाटर या टमाटर से जुड़े घरेलू नुस्खों को उपचार के रूप में अपनाने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को भी किसी चिकित्सीय समस्या में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही आहार या घरेलू उपाय अपनाने चाहिए।













































