उत्तर प्रदेश में भारी मानसूनी बारिश के कारण प्रमुख नदियां खतरे के निशान को पार कर प्रचंड रूप दिखा रही हैं। वाराणसी और प्रयागराज में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कछारी बस्तियां और घाट पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। वाराणसी में गंगा नदी चेतावनी के स्तर 70.29 मीटर को पार कर गई है, जिससे ऐतिहासिक घाटों का आपसी संपर्क कट गया है। उधर बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में सरयू नदी खतरे के निशान से 21 सेमी ऊपर बह रही है। सरयू के इस उच्चतम जलस्तर के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों पर बाढ़ का खतरा और अधिक गहरा गया है।
26 जिलों की 3.53 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय से 5 सितंबर 2026 को मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 26 जिले बाढ़ की गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा के चलते राज्य भर में लगभग 3.53 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। लखीमपुर खीरी, बदायूं, आज़मगढ़, अयोध्या, बलिया, चित्रकूट, मिर्जापुर, गोरखपुर और शाहजहाँपुर जैसे जिलों में स्थिति बेहद विकट बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रही बारिश के कारण रिहाइशी इलाकों और खेतों में पानी भर गया है। इससे लोगों का सामान्य जनजीवन ठप हो गया है और ग्रामीण इलाकों में सड़कें कट जाने से आवागमन बाधित हुआ है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का आज़मगढ़ और वाराणसी सर्वेक्षण बाढ़ के लगातार बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने आज आज़मगढ़ और वाराणसी सहित कई बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत सामग्री के वितरण में कोई देरी न की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना और उन्हें भोजन व चिकित्सा सुविधा देना सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत आयुक्त कार्यालय चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है।
बचाव कार्य, राहत शिविर और राशन सामग्री का वितरण आपदा प्रबंधन के लिए NDRF और SDRF की टीमों को बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात कर दिया गया है। अब तक 17,544 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राज्य भर में बनाए गए 1,312 बाढ़ आश्रयों में पहुँचाया गया है। पीड़ित परिवारों की मदद के लिए 72,897 से अधिक राशन किट और 3.67 लाख से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। राहत शिविरों में शरण लिए लोगों के लिए रहने, खाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। त्वरित और मुस्तैद प्रशासनिक कार्रवाई के कारण राज्य में अब तक किसी प्रकार की जनहानि या पशुधन हानि की खबर नहीं है।
महामारी से बचाव के लिए क्लोरीन और ओआरएस वितरण बाढ़ के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों और दूषित जल से होने वाले खतरों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में 55 लाख से अधिक क्लोरीन की गोलियां और 18 लाख से अधिक ORS पैकेट बांटे गए हैं। इसके अलावा बाढ़ से प्रभावित लगभग 45,000 मवेशियों की सुरक्षा और भोजन के लिए 5,000 क्विंटल से अधिक चारा उपलब्ध कराया गया है। पशुपालन विभाग की टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के इलाज और टीकाकरण के लिए भेजा जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की पशुधन हानि को रोका जा सके।
मौसम विभाग का 6 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 सितंबर 2026 तक पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और कौशाम्बी में भारी बारिश और बिजली गिरने का जोखिम बहुत अधिक बना हुआ है। इन जिलों के स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है और राहत टीमों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे उफनती नदियों, पुराने पुलों और जलभराव वाले निचले क्षेत्रों के पास जाने से बचें और सतर्कता बरतें।














































