समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को ढहाए जाने की प्रशासनिक कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते और अन्य संप्रदायों की धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें सच्चा सनातनी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की यह घटना कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह सरकार के उच्च स्तरीय इशारे और राजनीतिक शह पर अंजाम दिया गया है।
सनातन धर्म के मूल्यों और वसुधैव कुटुंबकम की व्याख्या अखिलेश यादव ने सनातन धर्म की मर्यादाओं का हवाला देते हुए कहा कि एक सच्चा सनातनी नागरिक कभी भी किसी दूसरे धर्म का न तो उपहास उड़ाता है और न ही उसका अनादर करता है। उन्होंने याद दिलाया कि हमारी सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के महान दर्शन पर आधारित है, जिसका संदेश है कि पूरी दुनिया एक ही परिवार का हिस्सा है। पूर्व सीएम ने कहा कि सच्चे सनातनी समाज में अमन-चैन और सौहार्द स्थापित करना पसंद करते हैं। ऐसे में समाज के भीतर शांति और आपसी सौहार्द का माहौल बनाए रखना मौजूदा सरकार की सबसे पहली और नैतिक जिम्मेदारी बनती है।
न्यायालय जाने का मौका न देने पर जताई कड़ी आपत्ति विधिक अधिकारों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने पूछा कि क्या इस मामले में संबंधित पक्ष को उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) से न्याय मिलने की गुंजाइश नहीं बची थी? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या प्रभावित पक्ष को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं था? सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने केवल सरकार को खुश करने के उद्देश्य से इतनी तेजी में कार्रवाई की ताकि संबंधित लोगों को अगली ऊपरी अदालत में जाकर अपनी बात रखने और न्याय पाने का समय व अवसर ही न मिल सके।
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर घेरा सपा प्रमुख ने इस पूरे घटनाक्रम को अयोध्या में हुए हालिया विवाद से जोड़ते हुए कहा कि सरकार की यह जल्दबाजी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर में आने वाले चढ़ावे के धन में चोरी करते हुए ये लोग बेनकाब हो चुके हैं। चढ़ावे की चोरी में पकड़े जाने के बाद जब एसआईटी गठित कर दोषियों को जेल भेजने की बातें होने लगीं, तो इन लोगों का राजनीतिक आधार हिल गया। अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटना से सत्ता में बैठे लोगों का सब कुछ छिन गया है और वे बैकफुट पर आ गए हैं।
सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश का लगाया आरोप अखिलेश यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि अयोध्या मंदिर के चढ़ावे की चोरी का सच अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है, जिससे सरकार की छवि खराब हुई है। इसी सच्चाई से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अब प्रदेश के माहौल को सांप्रदायिक रंग देने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में मस्जिद पर की गई जल्दबाजी भरी कार्रवाई इसी ध्यान भटकाने की राजनीति का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि लोग मुख्य मुद्दों और भ्रष्टाचार पर चर्चा करने के बजाय धार्मिक विवादों में उलझे रहें, जिससे उनका राजनीतिक फायदा हो सके।
संवैधानिक मर्यादा और धार्मिक स्थलों के सम्मान की मांग अपने वक्तव्य के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार को स्पष्ट सलाह दी कि उसे बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों के मानने वालों की आस्था का आदर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के संविधान ने हर नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने का अधिकार दिया है, इसलिए सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सपा चीफ ने पुरजोर मांग की कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई करते समय देश के कानून और संवैधानिक सीमाओं का पूरी तरह से पालन होना अनिवार्य है, ताकि किसी के अधिकारों का हनन न हो।













































