दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर इमरान मसूद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलने की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? कांग्रेस सांसद ने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए पूरा विपक्ष लगातार आवाज उठा रहा है। केंद्र सरकार को इस पुलिस कार्रवाई पर स्थिति साफ करनी चाहिए।
छात्र आंदोलन पर भाजपा को घेरा: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर इमरान मसूद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस पूरे मुद्दे को जानबूझकर भटकाने की कोशिश कर रही है। इमरान मसूद ने दावा किया कि झारखंड सरकार छात्रों की सभी जायज मांगों को ध्यान से सुनेगी और उचित समाधान निकालने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर की गई दमनकारी कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।
विरोध दबाने का लगाया आरोप: इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जनता और युवाओं के विरोध की आवाज को दबाने का काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को बेहद गंभीरता के साथ सुना जाना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने सचेत करते हुए कहा कि अगर कोई बाहरी ताकत आंदोलन को प्रभावित करने का प्रयास करती है, तो इससे छात्रों के मुख्य और असली मुद्दे कमजोर हो सकते हैं। इसलिए छात्रों को सतर्क रहकर अपनी मांगों को उठाना चाहिए।
गोमूत्र खरीद योजना पर सवाल: उत्तर प्रदेश में गोमूत्र खरीद योजना को लेकर भी इमरान मसूद ने सरकार को घेरा है और तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। जनता इस समय महंगाई, बेरोजगारी और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं का स्थायी हल चाहती है। हालांकि सरकार का तर्क है कि इस योजना से पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। लेकिन विपक्ष इसे प्राथमिक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली योजना करार दे रहा है।
चारा घोटाले से की तुलना: कांग्रेस सांसद ने गोमूत्र खरीद के फैसले पर तीखा कटाक्ष करते हुए इसे बहुत बड़ा घोटाला बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस योजना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए क्योंकि यह चारा घोटाले से भी बड़ा स्कैम है। इमरान मसूद का कहना है कि सरकार को असली समस्याओं की ओर देखना चाहिए। युवाओं को नौकरियां देना, किसानों की समस्याओं को सुलझाना और महंगाई से राहत दिलाना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। गैर-जरूरी योजनाओं पर सरकारी खजाना खर्च करने का विरोध किया जाएगा।
राजनीतिक तापमान में आई तेजी: इमरान मसूद के इन बयानों के सामने आने के बाद राज्य और देश का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। गोमूत्र खरीद योजना से लेकर छात्र आंदोलनों तक के मुद्दों पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सरकार अपने फैसलों का बचाव करने में लगी है। बयानों के इस दौर ने आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों को और दिलचस्प बना दिया है। सभी निगाहें अब सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।


























































