दिल्ली के ‘नजफगढ़’ इलाके का नाम सामने आते ही ‘मुल्तान के सुल्तान’ वीरेंद्र सहवाग की याद बरबस आ जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पहलवान सुशील कुमार भी यहीं के रहने वाले हैं. साल 2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक और 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर हिन्दुस्तान का नाम पूरी दुनिया में रौशन करने वाले सुशील कुमार ने कुश्ती जैसे खेल को एक नई पहचान दी. उनकी प्रतिभा को देखकर भारत सरकार ने साल 2011 में पद्मश्री, साल 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न और साल 2005 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया. कभी देश के लिए हीरो रहे सुशील कुमार को आज दिल्ली पुलिस एक जूनियर पहलवान के मर्डर केस में बेकरारी से तलाश कर रही है. सुशील लापता हैं. उनका फोन तक बंद है.
दरअसल, दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में एक जूनियर नेशनल चैम्पियन सागर कुमार की हत्या कर दी गई. पहलवानों के दो गुटों में हुई हिंसक झड़प में कई लोग घायल हो गए. इसी मामले में ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान सुशील कुमार का नाम सामने आया है. बताया जा रहा है कि यह झगड़ा प्रॉपर्टी विवाद को लेकर हुआ. सागर और उसके दोस्त जिस घर में रहते थे, सुशील उसे खाली करने का दबाव बना रहे थे. इसी को लेकर देर रात स्टेडियम के अंदर पहलवानों के दो गुट आपस में भिड़ गए. इसमें 5 पहलवान जख्मी हो गए. इनमें 23 साल के सागर कुमार की अस्पताल में मौत हो गई. सागर ओलंपिक की तैयारी में लगा था. वह मूलरूप से हरियाणा के रोहतक के गांव बखेता का रहने वाला था. उसके पिता अशोक कुमार दिल्ली पुलिस में हवलदार हैं.
ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान सुशील कुमार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, मर्डर केस में आया अंतरराष्ट्रीय पहलवान का नाम.
आखिर पुलिस से बचकर क्यों भाग रहे हैं कुमार?
पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार और उनके साथियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है. लेकिन वो लापता हैं. इसी बीच सुशील कुमार की तरफ से एक बयान आया कि हिंसक झगड़े में शामिल पहलवान उनके साथी नहीं हैं. यह घटना देर रात हुई. उन्होंने खुद पुलिस अधिकारियों को सूचित किया था कि कुछ अज्ञात लोग उनके परिसर में घुसकर झगड़ा कर रहे हैं. इस घटना के साथ उनके स्टेडियम का कोई संबंध नहीं है. माना कि सुशील सही बोल रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इस घटना के बाद वो लापता क्यों हैं? क्या उनको आरोपी साथियों के साथ पुलिस के सामने आकर पूरे मामले पर बात नहीं करनी चाहिए? यदि वो सच बोल रहे हैं, तो कानून से डर क्यों रहे हैं?



































