सरकारी जमीन पर संभल कोतवाली पुलिस का अभियान उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में प्रशासन का पीला पंजा एक बार फिर गरज उठा है। संभल कोतवाली क्षेत्र के बिछोली गांव में गुरुवार तड़के से ही भारी हलचल देखी गई, जहाँ जिला प्रशासन ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए ईदगाह और इमामबाड़े के अवैध ढांचों को गिराने की शुरुआत कर दी। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों की मौजूदगी में बुलडोजर ने सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू किया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
लेखपाल की शिकायत और कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने पाया कि गांव की चारागाह के लिए निर्धारित सात बीघा जमीन पर अवैध रूप से ईदगाह का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त, खाद डालने के लिए सुरक्षित रखे गए गड्ढों की भूमि पर इमामबाड़े का ढांचा खड़ा कर दिया गया था। ग्रामीणों की बार-बार की शिकायतों के बाद, लेखपाल ने 18 जनवरी को तहसीलदार की अदालत में अपील दायर की। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को निजी या धार्मिक उद्देश्यों के लिए हथियाना कानूनन अपराध है और इसी आधार पर ध्वस्तीकरण की नींव रखी गई।
समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक सूचना का प्रवाह न्यायालय में मामला चलने के दौरान प्रशासन ने पारदर्शिता बरतते हुए 31 जनवरी को स्थानीय समाचार पत्रों में एक विज्ञापन जारी किया था। इस नोटिस के माध्यम से कब्जेदार पक्षों को यह अंतिम अवसर दिया गया था कि वे कोर्ट में आकर अपनी संपत्तियों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करें। नोटिस में साफ लिखा था कि यदि कोई अपना पक्ष नहीं रखता है, तो यह मान लिया जाएगा कि निर्माण पूरी तरह अवैध है। प्रशासन के अनुसार, विज्ञापन और नोटिस के बावजूद किसी भी व्यक्ति ने अपना पक्ष रखने की जहमत नहीं उठाई, जिसके बाद न्यायालय ने ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया।
एसडीएम और नायब तहसीलदार के नेतृत्व में कार्रवाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में गुरुवार सुबह एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने पहले अवैध कब्जेदारों को स्वयं हटने का मौका दिया था, लेकिन निर्देशों की अनदेखी होने पर बुलडोजर चलाने का आदेश दिया गया। देखते ही देखते सरकारी जमीन पर खड़ी दीवारें और गुंबद मिट्टी में मिला दिए गए। इस दौरान प्रशासन ने किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी और पूरी इमारत को जमींदोज कर दिया गया, जिससे सरकारी जमीन एक बार फिर खाली हो गई।
स्थानीय विरोध और प्रशासनिक अधिकारियों की दलीलें कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने अंतिम समय में खुद ही निर्माण सामग्री हटाने की कोशिश की, ताकि बुलडोजर की कार्रवाई को रोका जा सके। हालांकि, मौके पर तैनात अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। अधिकारियों का स्पष्ट तर्क था कि नोटिस जारी होने के बाद भी अतिक्रमणकर्ताओं ने स्वयं इसे क्यों नहीं हटाया। प्रशासन ने कहा कि जब सरकारी आदेशों की अवहेलना की जाती है, तब मजबूरन प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। अब इस कार्रवाई के बाद चारागाह और खाद के गड्ढों की भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त घोषित कर दिया गया है।
शांति व्यवस्था और भविष्य के लिए कड़ा संदेश संभल के बिछोली गांव में हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में प्रशासन के सख्त रुख की चर्चा हो रही है। पुलिस और पीएसी की तैनाती ने यह सुनिश्चित किया कि कानून व्यवस्था भंग न हो। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि चारागाह, कब्रिस्तान या अन्य सार्वजनिक उपयोग की सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के समापन के बाद राजस्व विभाग ने उक्त सात बीघा जमीन की तारबंदी करने की योजना बनाई है ताकि भविष्य में दोबारा कोई इस पर कब्जा न कर सके।



































