प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के आगामी सत्र और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए एनडीए का दायरा बढ़ाने में पूरी तरह जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने एनडीए के नए और पुराने 45 सांसदों को अपने आवास पर नाश्ते पर आमंत्रित किया। इस बैठक में एनसीपीआई, शिवसेना (शिंदे गुट), आरपीआई (अठावले), राष्ट्रीय लोकमोर्चा, एआईएडीएमके और यूपीपीएल के सांसद उपस्थित रहे। बैठक में सबसे प्रमुख रूप से एनसीपीआई के वे 20 सांसद शामिल थे, जिन्होंने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनडीए का दामन थामा है।
मुस्लिम सांसदों की भागीदारी: एनसीपीआई के 20 सांसदों में से तीन मुस्लिम सांसद खलील-उर-रहमान, अबु ताहेर खान और यूसुफ पठान भी पीएम आवास पहुंचे। पूर्व में एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण इनके असहज होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। परंतु इस बैठक में शामिल होकर यूसुफ पठान ने स्पष्ट किया कि वे देशहित के हर बिल का पूरा समर्थन करेंगे। इसके अतिरिक्त उन्होंने एसआईआर के लंबित मतदाताओं के नाम जोड़ने तथा पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने से जुड़ी शिकायतों पर भी केंद्र से सकारात्मक चर्चा की।
सदन में बहुमत की रणनीति: सरकार का यह प्रयास संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को हासिल करने की व्यापक रणनीति का मुख्य हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के दौरान सरकार को आवश्यक 360 के मुकाबले केवल 298 सांसदों का ही समर्थन मिल सका था। परंतु टीएमसी के 20 और शिवसेना के 6 बागी सांसदों के जुड़ने से अब यह संख्या 324 तक पहुंच चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में डीएमके और वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन मिला, तो यह आंकड़ा 350 के पार पहुंच जाएगा।
शिंदे की पीएम से चर्चा: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी दिल्ली पहुंचकर अपनी पार्टी के सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सांसदों की बातचीत के उपरांत शिंदे ने प्रधानमंत्री के साथ अलग से भी एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान शिंदे ने राज्य के विकास, आगामी विधेयकों तथा अपनी पार्टी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। शिंदे ने परिसीमन का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि 25 से 30 लाख मतदाताओं वाले विशाल क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों के लिए कार्य करना अत्यंत कठिन होता है।
सियासी गठबंधन की सुगबुगाहट: अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ने देश के राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। हालांकि बादल ने इस बैठक को पंजाब की कानून-व्यवस्था पर केंद्रित बताया, लेकिन दोनों दलों के पुनः साथ आने के कयास लग रहे हैं। यदि यह गठबंधन आकार लेता है तो अकाली दल एनडीए में वापसी करते हुए परिसीमन बिल का समर्थन करेगा। साथ ही दोनों पार्टियां पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ सकती हैं।
केजरीवाल का तीखा हमला: इस उच्च स्तरीय मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीखा राजनीतिक तंज कसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी और अकाली दल एक बार फिर से अपना पुराना गठबंधन दोहराने जा रहे हैं। वहीं, जानकारों के अनुसार नए संसद भवन में सीटों की क्षमता विस्तार को देखते हुए सरकार सही समय पर परिसीमन बिल लाने की पूरी तैयारी कर रही है। यही कारण है कि सरकार सभी संभावित सहयोगियों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रही है।


























































