अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इजरायल को करीब 40 हजार बम देने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्तावित सैन्य समझौते की कीमत लगभग 2.8 अरब डॉलर बताई गई है और इसमें 2 हजार पाउंड वजन वाले बेहद ताकतवर बम भी शामिल हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों ने बीते मंगलवार को नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर इस योजना की जानकारी दी। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार अभी सौदे को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अमेरिकी कांग्रेस को प्रस्तावित डील के बारे में अनौपचारिक तौर पर सूचित किया जा चुका है।
पहले बमों की आपूर्ति रोक चुके थे बाइडन: इस प्रस्ताव की खास बात यह है कि इसमें शामिल 2 हजार पाउंड वाले बमों की सप्लाई पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने रोक दी थी। गाजा में इन हथियारों के इस्तेमाल से भीषण तबाही और बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका के चलते उस समय इनकी आपूर्ति रोकने का फैसला किया गया था। अब ट्रंप प्रशासन के तहत इन बमों को इजरायल को देने की योजना सामने आई है। प्रस्तावित हथियार सौदा ऐसे समय में सामने आया है, जब गाजा में हुए युद्ध और उससे हुई तबाही को लेकर इजरायल को बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ रहा है।
वित्त पोषण का बड़ा हिस्सा: प्रस्तावित 2.8 अरब डॉलर के हथियार पैकेज में ज्यादातर राशि विदेशी सैन्य वित्त पोषण के माध्यम से चुकाए जाने की योजना है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस पैकेज में 40 हजार बम देने की योजना बनाई गई है। अमेरिकी कांग्रेस को इस डील की जानकारी अनौपचारिक रूप से दी जा चुकी है, लेकिन प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी के स्तर पर नहीं पहुंचा है। इस वित्तीय व्यवस्था को लेकर अमेरिका में विपक्ष की ओर से आपत्ति भी सामने आई है। दावा किया जाता है कि विदेशी सैन्य वित्त पोषण के तहत अमेरिकी करदाताओं का पैसा इजरायल को दिया जाता है और इजरायल उस राशि का इस्तेमाल अमेरिका से हथियार खरीदने में करता है।
ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति: इजरायल को हथियारों की यह प्रस्तावित बिक्री ट्रंप प्रशासन की ओर से उसकी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की श्रृंखला का नवीनतम हिस्सा बताई जा रही है। इस आर्म्स सेल्स प्लान की जानकारी सबसे पहले ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में सामने आई। प्रस्तावित सौदे में बड़ी संख्या में बम शामिल हैं और इनमें 2 हजार पाउंड वजन वाले हथियार भी हैं। योजना के अंतिम रूप लेने से पहले ही अमेरिकी कांग्रेस को इसकी अनौपचारिक जानकारी दी जा चुकी है। ऐसे में यह प्रस्ताव अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।
सीजफायर के बाद भी हिंसा: हथियार सौदे की तैयारी उस समय हो रही है जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास के घातक हमले के जवाब में गाजा में शुरू हुए युद्ध का असर अब भी चर्चा में है। अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और हमास के बीच सीजफायर हुआ था, लेकिन इसके बावजूद हिंसा हुई। इजरायल-गाजा संघर्ष में सैकड़ों इजरायली और हजारों फिलीस्तीनी मारे गए हैं तथा इलाके में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। इस संघर्ष के चलते इजरायल को बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले अगस्त में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत के दौरान उन्हें बताया था कि उनके अनुसार हमास हथियार डालने के बजाय गाजा में दोबारा पैर जमाने की तैयारी कर रहा है।
क्षेत्रीय हालात के बीच प्रस्ताव: प्रस्तावित अमेरिकी हथियार सौदे को गाजा युद्ध और इजरायल-हमास के बीच बने सीजफायर के बाद के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन इजरायल की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हथियारों की बिक्री की योजना बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ गाजा संघर्ष से हुई भारी जनहानि और तबाही के कारण यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बना हुआ है। 2.8 अरब डॉलर के पैकेज में 40 हजार बम देने की योजना है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। प्रस्तावित डील की ज्यादातर राशि विदेशी सैन्य वित्त पोषण से चुकाने की योजना है और इस व्यवस्था को लेकर अमेरिका में विपक्ष की आपत्ति भी सामने आई है।














































