प्यार का त्योहार यानी वैलेंटाइन वीक दुनिया भर में छाया हुआ है इन दिनों हवाओं में भी प्यार का एहसास होता है। ये पर्व पूरे एक सप्ताह तक मनाया जाता है जिसका आरंभ हर साल 7 फरवरी से होकर अंत 14 फरवरी को होता है इस दौरान प्रेमी जोड़ो पर प्यार की खुमारी छाई रहती है।

लोग इस पर्व में एक दूसरे को अपने दिल का हाल सुनाते है लेकिन प्रेमी की प्रथा की नहीं बलिक सदियों पुरानी है, प्रेमी की इस श्रख्ला में भगवान भी अछूते नहीं है , आज हम इस सृष्टि के सबसे पवित्र प्रेम की बात कर रहे है जिसमें प्रेमी भगवान श्रीकृष्ण है तो प्रेमिका देवी राधा है।

आमतौर पर ये दोनों कभी एक साथ नहीं हुए लेकिन प्रेम कहानियों में ये हमेशा साथ होते है और आज भी इनके प्यार की चर्चा लोगों के बीच होती रहती है तो प्यार भरे इस मौसम में आज हम आपको राधा कृष्ण के प्रेम की अनोखी गाथा बता रहे है।

राधा कृष्ण प्रेम कथा-
एक बार की बात है जब सूर्य ग्रहण के समय देवी राधा माता यशोदा और नंद बाबा के साथ कुरुक्षेत्र आयी थी। तो उस वक्त श्रीकृष्ण का रुक्मिणी से विवाह हो चुका था। यहां पर राधा और कृष्ण की भेंट हुई और रुक्मिणी ने भी प्रथम बार राधा रानी के दर्शन किए थे। रुक्मिणी ने राधा को गर्म दूध पीने के लिए दे दिया। राधा ने भी बिना सोचे वो गर्म दूध पी लिया। मगर दूध को पीने के बाद श्रीकृष्ण के शरीर पर फफोले हो गए।

जब रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण के शरीर पर वो फफोलें देखे तो उनसे इसके होने का कारण पूछा। तब श्री हरि के अवतार ने जो उत्तर दिया वो राधा कृष्ण के सच्चे प्रेम को दर्शाता है। श्रीकृष्ण कहते है राधा के गर्म दूध पीने से मेरे शरीर पर ऐसा हुआ है क्योंकि राधा रानी उनके ह्रदय में रहती है। राधा को कष्ट होने पर असर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण यानी मुझे होता है। इस पवित्र गाथा को सुनकर ही यह पता चलता है कि भले ही राधा कृष्ण पति पत्नी न हुए लेकिन इनके बीच अटूट प्रेम था।





































