सड़कों पर पुलिस का पहरा और हाई अलर्ट: नोएडा में चल रहे कर्मचारी आंदोलन ने आज भी गंभीर रूप अख्तियार कर रखा है, जिससे प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। जिले के प्रत्येक कोने में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है और सघन गश्त जारी है। कर्मचारी समूहों में इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण उन्हें कहीं भी एकत्रित होने का अवसर नहीं मिल रहा है। प्रशासन का मुख्य ध्यान औद्योगिक क्षेत्रों पर है, जहाँ कंपनियों के बाहर सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। समूचे नोएडा और पड़ोसी क्षेत्रों में हाई अलर्ट की घोषणा कर दी गई है ताकि स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोका जा सके।
मजदूरों की मांगें और सेक्टर-121 की हिंसा: फेज-2 क्षेत्र में प्रदर्शनकारी वर्कर इस बात पर अड़े हुए हैं कि 11,000 रुपये के अल्प वेतन पर 12 घंटे कार्य करना उनके शोषण के समान है। उनकी स्पष्ट मांग है कि वेतन को संशोधित कर न्यूनतम 20,000 रुपये किया जाए। वार्ता के तमाम प्रयासों के बावजूद श्रमिक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वहीं, सेक्टर-121 में हिंसक प्रदर्शन की खबरें सामने आईं, जहाँ घरेलू सहायिकाओं और सफाई कर्मियों ने वेतन के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया और पत्थरबाजी की। इस उपद्रव के दौरान पुलिस बस को क्षति पहुँचाई गई और ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। इस घटना ने प्रशासन को बल प्रयोग करने पर विवश कर दिया ताकि क्षेत्र में पुनः शांति स्थापित की जा सके।
गिरफ्तारियाँ और पुलिस प्रशासन की रणनीति: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कल की हिंसा में शामिल 350 से अधिक लोगों को अब तक हिरासत में लेकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। एडिशनल कांस्टेबल राजीव नारायण मिश्रा ने स्पष्ट किया कि 40,000 से अधिक मजदूरों की भीड़ को नियंत्रित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे धैर्यपूर्वक संभाला गया। पुलिस ने जनसामान्य से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी अपुष्ट खबर पर ध्यान न दें। कमिश्नरेट ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों और शांति भंग करने वालों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में डीसीपी द्वारा पीएसी बल के साथ पैदल गश्त की जा रही है।
सुनियोजित साजिश और डिजिटल जांच: पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने जांच के हवाले से बताया कि यह विरोध प्रदर्शन केवल श्रमिकों की नाराजगी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डिजिटल साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। सोशल मीडिया के माध्यम से श्रमिकों को उकसाने के लिए कई फर्जी अकाउंट्स का सहारा लिया जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि इसके पीछे कोई बड़ी बाहरी ताकत कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘नुकसान की वसूली’ का आदेश जारी किया है। हिंसा में लिप्त पाए गए लोगों की संपत्तियों से सरकारी और निजी नुकसान की भरपाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य अराजक तत्वों के मन में भय उत्पन्न करना है।
असमानता का मुद्दा और सेक्टर-80 में नया उबाल: श्रमिकों में रोष का एक बड़ा कारण कंपनियों की ‘हायर और फायर’ नीति है, जिसमें कर्मचारियों को भत्ते न देने पड़ें, इसलिए उन्हें नौ महीने के भीतर हटा दिया जाता है। इसके अलावा, कुशल और अकुशल श्रमिकों के बीच वेतन में मामूली अंतर ने भी आग में घी डालने का काम किया है। सेक्टर-80 में आज सुबह एक बार फिर प्रदर्शन शुरू हो गया है, जहाँ पुलिस बल और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हैं। ग्रेटर नोएडा के कासना थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और चेतावनी दी कि सड़क जाम करने या तोड़फोड़ करने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रम मंत्री की चेतावनी और हिंसक फुटेज: श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इस पूरे प्रकरण को प्रदेश की छवि धूमिल करने और विकास कार्यों में बाधा डालने का प्रयास बताया है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के विरुद्ध एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। इसी दौरान, सेक्टर-63 थाने पर हुए भीषण पथराव के वीडियो फुटेज भी सामने आए हैं, जिसमें उपद्रवियों को पुलिस स्टेशन पर हमला करते देखा जा सकता है। सीसीटीवी फुटेज में डंडे लेकर फैक्ट्री के दरवाजे तोड़ते दंगाइयों की तस्वीरें भी पुलिस ने बरामद की हैं। यद्यपि पुलिस का कहना है कि वर्तमान में नोएडा में शांति बहाल है, परंतु किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए एनसीआर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।





































