संविधान के मूल उद्देश्यों पर सवालिया निशान: अंबेडकर जयंती के गौरवशाली क्षणों में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा मायावती ने बाबा साहेब को नमन करते हुए देश की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने रेखांकित किया कि यद्यपि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, परंतु यहाँ की सत्ता पर आज भी जातिवादी विचारधारा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। मायावती का मानना है कि इस मानसिकता के चलते संविधान की मूल आत्मा और उसके उद्देश्य आज भी हाशिए पर पड़े लोगों तक नहीं पहुँच पाए हैं। उन्होंने देश की जनता को सचेत किया कि जब तक जातिवाद का समूल नाश नहीं होगा, तब तक वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना असंभव है।
सर्वजन सुखाय के संकल्प की पूर्ति और राजनैतिक शक्ति: मायावती ने यह विचार साझा किया कि डॉ. अंबेडकर के ‘सर्वजन हिताय’ के स्वप्न को केवल बसपा की सरकार ही साकार कर सकती है। उन्होंने वर्तमान सरकारों पर आरोप लगाया कि वे बहुजन समाज के कल्याण के प्रति गंभीर नहीं हैं। उनके अनुसार, सुदृढ़ संवैधानिक ढांचा होने के बावजूद आज भी एक बड़ा वर्ग गरीबी की मार झेल रहा है और सामाजिक भेदभाव का शिकार हो रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि बहुजन समाज को बेरोजगारी और अपमान से मुक्ति चाहिए, तो उन्हें राजनैतिक रूप से संगठित होकर अपनी सरकार बनानी होगी।
श्रद्धांजलि सभा और अधिकारों का बोध: लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान बसपा प्रमुख ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों के पास आज जो भी संवैधानिक अधिकार और गरिमा है, वह बाबा साहेब के अथक परिश्रम की देन है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें केवल जयंती पर जश्न नहीं मनाना है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए अपने अधिकारों के लिए सजग रहना है। उन्होंने बाबा साहेब को दलितों और शोषितों का मसीहा बताते हुए उनके संघर्षों को वंदनीय बताया।
राजनैतिक संघर्ष और ऐतिहासिक गौरव के क्षण: उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने यह तथ्य दोहराया कि बाबा साहेब को भारत रत्न दिलाने का श्रेय बसपा के कड़े संघर्ष को जाता है। उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अंबेडकर जी के योगदान को हमेशा कमतर आँकने का प्रयास किया। इसके साथ ही, उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने को बहुजन चेतना की एक बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे पिछड़ा वर्ग के लोगों को शिक्षा और नौकरियों में भागीदारी का अवसर मिला। उनके अनुसार, बसपा ने हमेशा समाज के हर दबे-कुचले वर्ग की आवाज को मजबूती प्रदान की है।
सामाजिक परिवर्तन स्थल पर उमड़ा जनसैलाब: लखनऊ के विख्यात सामाजिक परिवर्तन स्थल पर बसपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कोने-कोने से आए कार्यकर्ताओं का जोश देखने लायक था। 18 मंडलों के प्रतिनिधियों ने इस समारोह में भाग लेकर यह सिद्ध किया कि बाबा साहेब का मिशन आज भी जीवित है। ‘बाबा साहेब का मिशन अधूरा, बसपा करेगी पूरा’ के उद्घोष के साथ कार्यकर्ताओं ने सामाजिक समानता का प्रण लिया। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि यह बसपा की सांगठनिक शक्ति और दलित-पिछड़ा एकता का एक बड़ा प्रदर्शन भी था।
शोषणमुक्त समाज और भविष्य की जवाबदेही: लेख के समापन में मायावती ने सत्तासीन दलों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकारों को अंबेडकर जयंती पर अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश करना चाहिए। उन्हें यह बताना चाहिए कि उन्होंने बहुजन समाज के शोषण को रोकने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए हैं। मायावती ने अंत में यह संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध लड़ाई और समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान की रक्षा करना ही बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने समाज के विकास के लिए न्यायपूर्ण वितरण और सुरक्षा की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।





































